West Asia War: ईरान ने सऊदी अरब में यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से किए गए तेज हमलों के बाद मक्का पैक्ट को लेकर सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये को धमकाना शुरू कर दिया है. बता दें कि इस पैक्ट के तहत ये तीनों देश सऊदी अरब पर हूती के हमले के बाद समझौते के जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं.
मक्का पैक्ट में साफ कहा गया है कि किसी एक देश पर हमला पैक्ट में शामिल सभी पर हमला माना जाएगा. ऐसे में ईरान ने धमकी देते हुए कहा कि यमन में किसी भी तरह का सैन्य हस्तक्षेप इलाके के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है.
बताया जा रहा है कि कि यमन मामले में सऊदी अरब की मदद के लिए हजारों पाकिस्तानी सैनिक तैनात किए जा सकते हैं. इस पर ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि आशा है कि यह अफवाह सच नहीं होगी. ईरानी सांसदों ने इस समझौते को केवल कागजी और राजनीतिक करार दिया. वहीं, सांसद इब्राहिम रजाई ने कहा कि अमेरिका की ओर से सालों तक शोषण किए जाने के बाद भी सऊदी को सुरक्षा नहीं मिली, तो तुर्किये और पाकिस्तान के साथ कागजी समझौता भी उसे सुरक्षा नहीं दे पाएगा.
ईरान का रुख तुर्किये के मुकाबले पाकिस्तान पर ज्यादा सख्त दिखा, क्योंकि पाकिस्तान अब तक तेहरान और वाशिंगटन के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था. ईरानी सांसद अहमद नादेरी ने कहा कि यमन युद्ध में शामिल होकर पाकिस्तान अब मध्यस्थ नहीं बल्कि क्षेत्रीय हस्तक्षेपकर्ता बन गया है. 'तसनीम' और 'नूर न्यूज' जैसी ईरानी मीडिया एजेंसियों ने इस प्रक्रिया को सऊदी युद्ध में तुर्किये-पाकिस्तान का शामिल होना और यमन की पीड़ित जनता के खिलाफ गठबंधन बताया है.
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पाकिस्तान की ओर से सऊदी अरब में हजारों सैनिकों की तैनाती को लेकर कहा कि उन्होंने इस तरह की अफवाह सुनी है और वह उम्मीद करते हैं कि ये बिल्कुल भी सच न हो. इस्माइल बघाई ने इस इलाके के मुल्कों को बेहद साफ तरीके से पता है कि यमन में किसी भी तरह का दखल खतरनाक रूप ले सकता है. ऐसे में उन्होंने उम्मीद जताई है कि सऊदी अरब मक्का पैक्ट का इस्तेमाल नहीं करेगा.