बातचीत पड़ी भारी! किसके कहने पर अराघची अमेरिका से कॉन्टैक्ट कर रहे? भड़के ईरानी सांसदों ने की महाभियोग की तैयारी
यूएन के मंच से अमेरिकी हुक्मरानों को जमकर खरी खोटी सुनाने के बाद उन्हीं से कॉन्टैक्ट करने पर तेहरान के सांसदों के दिमाग का पारा गरमाने के साथ उनकी त्योरियां चढ़ गई हैं.
अमेरिकी धरती से वहीं के हुक्मरानों को मानवता का दुश्मन और उनकी फौज को मासूम बच्चियों का कातिल बताकर संयुक्त राष्ट्र के मंच से ललकार कर दुश्मनों को चुनौती देने से गदगद इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की मौजूदा लीडरशिप ने अपने डेलिगेशन की तारीफों के पुल बांधने शुरू ही किए थे कि अचानक सात समंदर पार से आई एक खबर ने उसी दल में शामिल विदेश मंत्री अब्बास अराघची को विलेन बना दिया.
दरअसल कई मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला कि अराघची ने यूएन के कार्यक्रम के बहाने कतर के नेताओं और दूतों के जरिए अमेरिकी प्रशासन से अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क किया है. इससे खार खाए ईरान के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने अराघची के खिलाफ महाभियोग चलाकर सजा देने की मांग की है.
किसके कहने पर कॉन्टैक्ट कर रहे: ईरानी सांसद
ईरान के सांसदों ने अमेरिका के अधिकारियों से बातचीत को लेकर विदेश मंत्री अब्बास अराघची के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव रखा है. ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के एक सदस्य ने गुरुवार को इस फैसले की जानकारी दी है.
सांसद अली खेजरियन ने कहा कि अराघची को सिर्फ यूएन में ईरान का पक्ष रखने को कहा गया था. उन्हें पर्दे के पीछे या सामने किसी भी तरह से डोनाल्ड ट्रंप या फिर उनके किसी सियासतदान और अफसर के साथ बातचीत करने की इजाजत नहीं दी गई थी. न्यूयॉर्क में पहुंचकर कतर के डिप्लोमैटिक चैनल का इस्तेमाल करके अमेरिका से बातचीत करने अराघची ने ईरान के साथ अपराधिक कृत्य किया है.
खेजरियन ने ये भी कहा कि अमेरिकी अफसरों से किसी भी तरह का कॉन्टैक्ट इस्लामिक रिपब्लिक की तय नीतियों के दायरे से बाहर हुआ है. इसकी हम निंदा करते हैं, क्योंकि इससे हमारे महान मुल्क के भविष्य को झटका लग सकता है. अराघची ने गलत किया. इस तथ्य से सहमत कई सांसदों ने अराघची के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव दर्ज कराया है और अब हम संसद में इस मामले को आगे बढ़ा रहे हैं.'
अराघची को जवाब देना पड़ेगा: ईरानी सांसद
इसी तरह कई कुछ अन्य नेताओं ने कहा कि विदेश मंत्री के अपनी यात्रा से लौटने के बाद उन्हें संसद के सामने पेश होना होगा और यह बताना होगा कि अमेरिकी पक्ष के साथ हुई बातचीत किस आधार पर की गई.