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आतंकवाद पर भारत ने PAK को किया बेनकाब: UN में उठाई CCIT अपनाने की मांग, पहलगाम का जिक्र कर मुनीर के मुल्क को लगाई 'लताड़'

आतंकवाद के मुद्दे पर भारत ने एक बार फिर से पाकिस्तान को घेरा है. अंतरराष्ट्रीय कानूनी मामलों से संबंधित महासभा की बैठक में भारत ने कहा कि दुनिया सीसीआईटी को जल्द अपनाना होगा, जो पिछले 30 साल से पेंडिंग पड़ा है.

Written By abhinav tripathi
Published: Oct 07, 2026, 09:40 AM IST | Updated: Oct 07, 2026, 09:51 AM IST
Image Credit: यूएन में भारत ने पाकिस्तान को घेरा. (फोटो- स्क्रीनग्रैब)
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भारत ने एक बार फिर आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरा और  'अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक कन्वेंशन' (सीसीआईटी) को जल्द अपनाने की मांग की है. भारत ने इस दौरान पहलगाम आतंकवादी नरसंहार के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून एक्शन लेने की वकालत की.

दरअसल, अंतरराष्ट्रीय कानूनी मामलों से संबंधित महासभा की छठी समिति में बोलते भाजपा सांसद बिप्लब कुमार देब ने कहा कि पिछले साल पहलगाम में हुए हमले में 26 बेगुनाह नागरिक मारे गए थे. ऐसे आतंकी हमलों के मामलों में सीमा-पार आतंकवाद के दोषियों, आयोजकों, फाइनेंसरों और प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराना जरूरी है. बाता दें कि पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी.

आतंकवाद के खिलाफ लोगों की रक्षा जरूरी: भारत  

भारत ने कहा कि पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद का राज्य प्रायोजक है. देब की ओर से कहा गया कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे को मजबूत करना जरूरी है और इसके लिए सीसीआईटी को जल्द अपनाना होगा. यह पिछले तीन दशक से लटका है. भारत ने साल 1996 में सीसीआईटी का प्रस्ताव रखा था, जिसको कुछ देशों ने रोक दिया. ये वह देश हैं, दो 'अच्छे आतंकवादी' और 'बुरे आतंकवादियों' में भेदभाव करते हैं. इन देशों ने तर्क दिया था कि इनमें स्वतंत्रता सेनानियों को शामिल नहीं किया जा सकता.

हालांकि, भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद में 'अच्छा' या 'बुरा' का अंतर नहीं किया जा सकता है. नागरिकों को निशाना बनाने का कई भी औचित्य नहीं हो सकता है. महासभा में भारत के प्रतिनिधिमंडल के शामिल बिप्लब कुमार देब, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और त्रिपुरा के पूर्व सीएम हैं.

नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे आतंकी

अपने संबोधन के दौरान देब ने कहा कि भारत तो इस बात की चिंता है कि आतंकिवादियों की ओर से भर्ती, कट्टरपंथ फैलाने, प्रोपेगैंडा, ऑपरेशन की योजना बनाने और आतंकवादी वित्तपोषण के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह आतंकवाद से निपटने के मामले में भारत की छह प्राथमिकताओं में से एक है.

अन्य प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें आतंकवादी वित्तपोषण को समाप्त करना, पीड़ितों को केंद्र में रखना, राष्ट्रीय स्तर पर स्वामित्व वाली क्षमता निर्माण को मजबूत करना, आतंकवादी विचारधारा का सामना करना और बुनियादी ढांचे को बाधित करना शामिल है. (इनपुट- आईएएनएस)

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About the Author

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
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