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UNSC में परमानेंट सीट के लिए भारत की धमक मजबूत, रूस, मॉरीशस और पुर्तगाल ने दिया खुला समर्थन; जापान-जर्मनी के दावे पर सवाल

Global Support for India Bid for UNSC: UNSC में परमानेंट सीट के लिए भारत की धमक लगातार मजबूत हो रही है. रूस, मॉरीशस और पुर्तगाल ने भारत की स्थायी सदस्यता के लिए खुला समर्थन दिया है.

Written By Devinder Kumar
Published: Sep 27, 2026, 04:21 AM IST | Updated: Sep 27, 2026, 04:25 AM IST
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Countries that Supported India Bid for UNSC: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार और भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी लगातार मजबूत हो रही है. शनिवार को रूस के साथ ही मॉरीशस और पुर्तगाल ने भी भारत को UNSC का परमानेंट मेंबर बनाने का खुलकर समर्थन किया. रूस ने कहा कि भारत दुनिया की तीसरी बड़ी ताकत है और नजरअंदाज करके यूएन मजबूत नहीं हो सकता. इसके साथ ही उसने जर्मनी और जापान को यह दर्जा दिए जाने की मांग का विरोध भी किया.  

सुरक्षा परिषद में भारत को मिले स्थायी सीट लेकिन...

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र आम सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार करना अब वक्त की जरूरत हो गई है. दुनिया के इस सर्वोच्च नीति निकाय में अब ग्लोबल साउथ, विशेषकर एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व बढ़ना ही चाहिए.

जापान और जर्मनी का विरोध करते हुए लावरोव ने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार तो अवश्य हो. लेकिन परिषद के विस्तार में पश्चिमी देशों, विशेषकर जर्मनी और जापान को परमानेंट सीट ऑफर नहीं की जानी चाहिए, जो अब भी सैन्यवाद और प्रतिशोध की राह पर हैं.'

हम भी भारत की दावेदारी के समर्थन में- मॉरीशस

रूसी विदेश मंत्री ने कहा, 'हम UNSC में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के पक्ष में हैं. हम परमानेंट सीट के लिए ब्राजील और भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करते हैं. इस सुधार प्रक्रिया में अफ्रीकी महाद्वीप के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए.'

वहीं संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित करते हुए मॉरीशस के विदेश मंत्री धनंजय रामफुल ने भी भारत की दावेदारी का खुलकर सपोर्ट किया. उन्होंने कहा कि मॉरीशस सुरक्षा परिषद में सुधार पर G4 और L69 के रुख का समर्थन करता है. स्थायी सीट के लिए वह भारत की उम्मीदवारी का समर्थन दोहराता है.

रामफुल ने कहा कि वैश्विक मामलों में भारत की रचनात्मक भूमिका को देखते हुए उसे स्थायी सीट मिलनी ही चाहिए. वह इसके लिए सर्वथा योग्य उम्मीदवार है.

पुर्तगाल और मार्शल द्वीप समूह भी आए समर्थन में

पुर्तगाल ने भी UNSC में सुधार और भारत की दावेदारी का समर्थन किया है. प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो ने UNGA को संबोधित करते हुए सुरक्षा परिषद के विस्तार पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि हमें एक ऐसी परिषद बनाने की जरूरत है, जिसमें अफ्रीका, ब्राजील और भारत भी परमानेंट मेंबर के रूप में शामिल हो.

मार्शल द्वीप समूह ने भी भारत के सपोर्ट में आवाज उठाई. राष्ट्रपति हिल्डा हेन ने संयुक्त राष्ट्र में बोलते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता हासिल करने के मुद्दे पर मार्शल द्वीप समूह, जापान-भारत समेत G4 सहयोगियों के लिए अपना समर्थन दोहराता है.

'1.6 अरब से अधिक आबादी, फिर भी प्रतिनिधित्व नहीं'

जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने संयुक्त राष्ट्र में संबोधन के दौरान सुरक्षा परिषद में विस्तार की जरूरत पर बल दिया. उन्होंने कहा कि परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में सीटें बढ़ाई जानी चाहिए. जिससे इस संस्था में विभिन्न देशों की भागीदारी बढ़ाई जा सके.  

संयुक्त राष्ट्र में अफ्रीकी देशों ने भी सुरक्षा परिषद में अफ्रीका महाद्वीप को प्रतिनिधित्व देने की मांग जोरदार तरीके से उठाई. सिएरा लियोन के राष्ट्रपति जूलियस माडा बायो ने कहा कि 1.6 अरब से अधिक आबादी होने के बावजूद अफ्रीका के पास कोई स्थायी सीट नहीं है. घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता के लिए UNSC में सुधार आवश्यक है.

कैसे बढ़ सकती है सुरक्षा परिषद में संख्या?

बताते चलें कि मौजूदा समय में चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका UNSC स्थायी सदस्य हैं. इनके पास वीटो पावर भी है यानी इनमें से कोई भी एक सदस्य अगर वीटो लगा दे तो वह प्रस्ताव पास नहीं हो सकता. इसके अलावा 2-2 साल की अवधि के लिए 10 अस्थायी सदस्य भी नियमित रूप से चुने जाते हैं. परिषद में विस्तार और सुधार के लिए संयुक्त राष्ट्र आम सभा दो-तिहाई बहुमत की जरूरत है. आम सभा से पास होने के बाद प्रस्ताव सुरक्षा परिषद में जाएगा, जहां पांचों स्थायी सदस्य उस प्रस्ताव के पक्ष में और उनमें से कम से कम 3 सदस्य खुलकर समर्थन करें. तभी जाकर परिषद में कोई संशोधन हो सकता है. 
 

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About the Author

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
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