App

गांधी ‘राष्ट्रपिता’, बोस ‘नेताजी’, पटेल ‘सरदार’, जिन्ना ‘कायदे-आज़म’ कैसे बने; क्या है इन शब्दों का मतलब?

महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल और मोहम्मद अली जिन्ना के नाम के साथ जुड़ी ‘राष्ट्रपिता’, ‘नेताजी’, ‘सरदार’ और ‘कायदे-आजम’ जैसी उपाधियों की कहानी बेहद दिलचस्प है. जानिए ये संबोधन किसने, कब दिए और इनके असल मायने क्या हैं.

गांधी ‘राष्ट्रपिता’, बोस ‘नेताजी’, पटेल ‘सरदार’, जिन्ना ‘कायदे-आज़म’ कैसे बने; क्या है इन शब्दों का मतलब?
Image Credit: एआई के जरिए बनाई गई तस्वीर

कुछ नाम सिर्फ नाम नहीं रह जाते, बल्कि वो अपने साथ बहुत कुछ लेकर चल रहे होते हैं. महात्मा गांधी, वल्लभभाई पटेल, सुभाष चंद्र बोस और मोहम्मद अली जिन्ना... ये वो हस्तियां हैं जो जिनके दूसरे नाम भी मौजूद हैं और इन्हें अगर इनके असली नाम की बजाए दूसरे नामों से पुकारा जाए, तो भी पहचान लिया जाता है. जैसे गांधी जी को 'राष्ट्रपिता', वल्लभभाई पटेल को 'सरदार', सुभाष चंद्र बोस को 'नेताजी' और पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना को 'कायद-ए-आजम' कह देने से भी लोग इन हस्तियों तक पहुंच जाते हैं.

ये सब तो ठीक है लेकिन आप इन सभी नेताओं को दूसरे नामों के बारे में कितना जानते हैं? इन हस्तियों को ये नाम किसने दिए थे और इन नामों का मतलब क्या है? आज हम इन सभी सवालों के जवाब देंगे.

सबसे पहले बात करते हैं महात्मा गांधी की, महात्मा गांधी को 'राष्ट्रपिता' भी कहा जाता है. कहा जाता है कि उन्हें यह नाम सुभाष चंद्र बोस ने दिया था. 6 जुलाई 1944 को रंगून में मौजूद आजाद हिंद रेडियो से गांधी को संबोधित करते हुए बोस ने कहा था 'Father of our Nation… We ask for your blessings and good wishes.' यह सिर्फ शिष्टाचार नहीं था. गांधी और बोस की रणनीतियां अलग थीं, फिर भी सुभाष चंद्र बोस ने महात्मा गांधी को भारतीय राष्ट्रीय संघर्ष के नैतिक केंद्र के तौर पर संबोधित किया.

राष्ट्र: राज्य, देश या राजनीतिक समुदाय.
पिता: जनक, पिता.
भाषा: शुद्ध संस्कृत समास

नेताजी सुभाष चंद्र बोस

इसके बाद सुभाष चंद्र बोस की बात करते हैं, हालांकि उन्हें 'नेताजी' की उपाधि किसने दी? इसको लेकर किसी एक व्यक्ति का नाम नहीं लिया जा सकता. कहा जाता है कि सुभाष चंद्र बोस को 1942 में जर्मनी में मौजूद भारतीय सैनिकों (इन्डिश लीगेशन) और आजाद हिंद फौज के साथियों ने 'नेताजी' कहा था.

नेता = Leader
जी = सम्मान जताने वाला शब्द

सरदार वल्लभभाई पटेल

वल्लभभाई पटेल को 1928 के बारडोली सत्याग्रह के बाद 'सरदार' का लकब दिया गया. गुजरात के बारडोली में किसानों पर ब्रिटिश सरकार ने भूमि-राजस्व बढ़ा दिया था. पटेल ने किसानों के आंदोलन का नेतृत्व किया था. आंदोलन कामयाब हुआ और किसानों के बीच पटेल का सम्मान बहुत बढ़ गया. भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के मुताबिक इसी दौरान उन्हें 'Sardar' यानी नेता/मुखिया का संबोधन मिला. सरकार के Azadi Ka Amrit Mahotsav के डिजिटल रिकॉर्ड में इससे भी खास जानकारी देखने को मिलती है.

यह फारसी भाषा का शब्द है और इसका अर्थ नेता, मुखिया या प्रमुख होता है.

मोहम्मद अली जिन्ना

आखिर में बात करते हैं पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की. उन्हें पाकिस्तान में 'कायद-ए-आजम' भी कहा जाता है. Daily Pakistan नाम की वेबसाइट के मुताबिक मोहम्मद अली जिन्ना को 'कायदे-आजम' का संबोधन सबसे पहले मौलाना मजहरुद्दीन ने दिया था. लेख में ‘Pakistanica’ विश्वकोश के छठे संस्करण (नवंबर 2008, पेज 889) के हवाले से बताया गया है कि दिसंबर 1937 में दिल्ली में मौलाना मजहरुद्दीन ने जिन्ना और लियाकत अली खान के सम्मान में एक स्वागत समारोह आयोजित किया था. इस दौरान पेश किए गए स्वागत-पत्र में जिन्ना को 'कायदे-आजम, फिदाए मुल्क व मिल्लत, रहनुमाए मिल्लत और कायदे मिल्लत' जैसे संबोधनों से नवाजा गया. लेख के मुताबिक, इसके बाद मौलाना मजहरुद्दीन ने 'कायदे-आजम' नाम का प्रचार शुरू किया।.फिर दिसंबर 1938 में पटना में ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के अधिवेशन में मियां फिरोजुद्दीन अहमद ने 'कायदे-आजम जिंदाबाद' का नारा लगाया, जिसके बाद यह संबोधन जिन्ना के लिए बेहद लोकप्रिय हो गया.

कायद: नेता, अगुवा
आजम: महान, सबसे बड़ा

दोनों शब्द अरबी मूल के हैं और उर्दू में यह राजनीतिक सम्मानसूचक संबोधन बना.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

Tahir Kamran

Tahir Kamran

Zee News में नेशनल डेस्क पर देश–विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरें लिखते हैं. करियर का आगाज 2015 से 'पंजाब केसरी' ग्रुप के उर्दू अखबार ‘हिंद समाचार’ से किया, जहां वे कंटेट राइटर से पेज डिजाइनर तक पहुंचे. इसके बाद उर्दू, हिंदी और पंजाबी - तीनों भाषाओं में काम करने का मौका मिला. 2018 में डिजिटल की तरफ कूच करते हुए पंजाब केसरी ग्रुप की उर्दू वेबसाइट की लॉन्चिंग टीम का नेतृत्व किया. इसके बाद 2020 में 'Zee Salaam' ज्वाइन किया, यहां भी वेबसाइट को लॉन्च करने के साथ-साथ तीन साल टीम का नेतृत्व भी किया. इसी दौरान ZEE Delhi NCR वेबसाइट भी लॉन्च हुई, जिसमें उनका अहम योगदान रहा. 2023 में India Daily Live की लॉन्चिंग टीम के साथ काम किया और शुरुआती दिनों में हिंदी के अलावा पंजाबी, तमिल, तेलुगु और गुजराती वेबसाइट टीमों को मैनेज किया. अक्टूबर 2024 में फिर से Zee Media में में वापसी करते हुए नेशनल टीम का हिस्सा बने. तकनीक में दिलचस्पी की वजह से उन्होंने React.js और वेब डिजाइनिंग सीखी. यही कारण है कि उनकी खबरों में HTML-CSS के छोटे-छोटे ग्राफिक्स दिख जाते हैं, जो मुश्किल बातों को भी आसान बना देते हैं. करियर की शुरुआत में कुछ दिनों तक फोटो स्टूडियो में भी काम किया, जहां कैमरा, Adobe Photoshop और ग्राफिक डिजाइनिंग सीखी, जो आज भी उनके डिजिटल काम में मदद करता है. उर्दू शायरी से प्यार अलग ही है. ग़ज़लें, नज़्में, गीत भी लिखते हैं और कई अखबारों में उनकी शायरी छप भी चुकी हैं. राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा, अनवर जलालपुरी खुशबीर सिंह शाद और नवाज देवबंदी, माजिद देवबंदी  जैसे शायरों के इंटरव्यू व बातचीत का अनुभव भी उनके पास है. आप tahir.kamran@india.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facbook से जुड़ सकते हैं. 
Read More