फ्रांस का योगी मॉडल: छात्रों में हिंसा भड़काने वालों को एक-एक कर पकड़ रही पुलिस, मां-बाप करेंगे नुकसान की भरपाई
France Students Violent Protest: फ्रांस में शिक्षा के अभाव के चलते छात्र सड़कों पर प्रदर्शन करने पहुंचे. ये प्रोटेस्ट इतना भीषण थी कि हिंसा के चलते बड़ी संख्या में कई टीचर्स और छात्र घायल हो गए. फ्रांसीसी सरकार अब दंगा भड़काने वालों की गिरफ्तारी कर रही है.
France Students Protest: शिक्षा किसी भी राष्ट्र निर्माण में अहम होता है. इसकी कमी किसी भी देश के पतन का कारण बन सकती है. अच्छी शिक्षा मिलना छात्रों का मौलिक अधिकार है, लेकिन फ्रांस में इस अधिकार को बचाए रखने के लिए गुस्साए छात्र सड़कों पर उतर आए हैं. यहां शिक्षा का अभाव, खराब सुविधाओं, शिक्षा बजट में भारी कटौती और टीचर्स की कमी के चलते छात्रों ने हिंसक प्रदर्शन किया.
पुलिस के साथ छात्रों का टकराव इतना ज्यादा बढ़ गया कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट से लेकर सड़कों तक जगह-जगह आग फैल गई. पेरिस के स्कूलों से शुरू हुई ये हिंसा मार्सिले, टूलूज और स्ट्रासबर्ग समेत अन्य कई शहरों तक फैल गई. देश के अलग-अलग कोने में हुए प्रदर्शन के चलते 5,000 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हुई है और 400 हाई स्कूल बंद कर दिए गए हैं.
बच्चे-टीचर्स सब घायल
फ्रांस में हुए इस हिंसक प्रदर्शन में 65 टीचर्स स्टाफ घायल हुए, जिनमें 40 सेकेंड्री स्कूल के प्रिंसिपल भी हैं. हाई स्कूल के गेट के बाहर हुई हिंसक झड़पों में लगभग 170 छात्र भी घायल हुए हैं.
घटना को लेकर फ्रांस की गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने बताया कि प्रदर्शनों के दौरान बैरिकेड जलाए गए, पुलिसकर्मियों पर पटाखे फेंके गए और जवाबी कार्रवाई में आंसू गैस के गोले छोड़े गए. इसके बाद पुलिस ने एक ही दिन में 1,747 लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें से अधिकतर टीनएजर्स थे.
हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तारी
हिंसक प्रदर्शन के बाद अब फ्रांसीसी पुलिस भरपाई करने के लिए उन एक्टिविस्ट्स को गिरफ्तार कर रही है, जिन्होंने देशभर के स्कूलों में फैली अशांति को भड़काने में मदद की थी. तोड़फोड़, झड़पें और आगजनी के चलते पहले लगभग 2,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया था.
सरकार का आरोप है कि कट्टरपंथी वामपंथी गुट देश में इस अराजकता को बढ़ावा दे रहे हैं. 'फॉक्स न्यूज' के मुताबिक, रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 'ला फ्रांस इंसौमीस' (LFI) के कुछ राजनेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से फ्रांस में अशांति फैलाई गई. उनपर हिंसा को बढ़ावा देने और दंगा भड़काने के आरोप लगे हैं. LFI ने इन आरोपों से साफ इंकार किया है.
शिक्षा के अभाव में सड़कों पर उतरे छात्र
'कॉलिन रग न्यूज' की रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूलों के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने बताया कि कक्षाओं में केवल 35 छात्र ही होते हैं, कमरों में पर्याप्त कुर्सियां नहीं होतीं, हीटिंग सिस्टम खराब होते हैं और लंच का समय इतना कम होता है कि छात्रों को कक्षाओं के बीच भोजन करने में भी कठिनाई होती है.
छात्रों के मुताबिक, स्कूल में टीचर्स की कमी के चलते हफ्तों तक कोई शिक्षक पढ़ाने नहीं आता और न ही सब्सिट्यूशन में कोई आता है. इसी समस्या के चलते छात्रों ने अपनी मांगों को रखते हुए प्रदर्शन किया.
कट्टरपंथी आंदोलनकारियों पर लगा आरोप
फ्रांस में हुए हिंसक प्रदर्शनों को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और छात्र संघों ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था की कड़ी निंदा करते हुए नाबालिगों के खिलाफ लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले और नॉन लीथल फ्लैश बॉल का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया.
फ्रांसीसी सरकार का कहना है कि कट्टरपंथी आंदोलनकारियों ने छात्रों की परेशानी का फायदा उठाकर रिहायशी इलाकों में अराजकता फैलाई है. फ्रांस के न्याय मंत्री गेराल्ड डारमैनिन ने सार्वजनिक रूप से सुझाव दिया कि नाबालिग प्रदर्शनकारियों के माता-पिता को सड़क झड़पों के दौरान डैमेज हुई पब्लिक प्रॉपर्टी के लिए कानूनी रूप से मुआवजा देना चाहिए.