इजरायल के बैन की उड़ीं धज्जियां: फ्लाईदुबई से दर्जनों ओमानी पायलटों ने काट दी एंट्री की 'सीक्रेट पर्चियां'
फ्लाईदुबई में चाकूबाजी और हिंसा की घटना के बाद एक बड़ा खुलासा हुआ है. यह पहली बार नहीं जब किसी ओमानी पायलट ने तेल अवीव के लिए उड़ान भरी. इससे पहले भी दर्जनों ओमानी पायलटों ने इजरायल के एंट्री बैन को दरकिनार कर तेल अवीव के लिए उड़ानें भरीं.
फ्लाईदुबई विमान की घटना से इजरायल की नाकामी सामने आई है. दरअसल, यहूदी मुल्क की सुरक्षा एजेंसियां उन पायलटों पर लगी रोक को ठीक से लागू करने में नाकाम रहीं, जो उन देशों से हैं जिनके इजरायल के साथ दोस्ताना संबंध नहीं हैं और जो तेल अवीव के लिए उड़ान भरते हैं.
इस घटना में विमान का को-पायलट ओमान का रहने वाला था. उसने कैप्टन को जानबूझकर चाकू मारकर घायल करने के बाद विमान को क्रैश करने की कोशिश की. हालांकि, विमान में सवार इजरायली यात्रियों, कैप्टन और अन्य पायलटों ने इस हमले को नाकाम कर दिया. बाद में विमान की सऊदी अरब में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई और फिर यात्रियों (जिनमें से अधिकतर इजरायली थे) को इजरायल भेजा गया.
उड़ान भरने की मनाही फिर कैसे हुई चूक?
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 में इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच राजनयिक संबंध स्थापित करने वाले 'अब्राहम समझौते' के तहत, उन देशों के पायलटों को इजरायल के लिए उड़ान भरने की मनाही है जिनके यहूदी मुल्क के साथ संबंध नहीं हैं.
ओमान के इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं. हालांकि, 'चैनल 12' की रिपोर्ट के मुताबिक, इस रोक के बावजूद हाल के वर्षों में दर्जनों ओमान के पायलटों को इजरायल के लिए उड़ान भरने की इजाजत दी गई है.
नेटवर्क ने कहा कि इजरायल ने असल में इस रोक को लागू करने की जिम्मेदारी विदेशी एयरलाइंस को सौंप दी थी और उन पर भरोसा किया था कि वे यह तय करेंगी कि जिन देशों के इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं, वहां के पायलटों को इजरायल जाने वाली फ्लाइट्स उड़ाने ना दी जाएं.
शिन बेट ने खुद नहीं की जांच
रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल की खुफिया एजेंसी 'शिन बेट' ने फ्लाईदुबई के पायलटों के बैकग्राउंड की खुद से जांच नहीं की. इसके बजाय, उसने एयरलाइन से सिर्फ इतना कहा कि वे ऐसे देशों के पायलटों को विमान न उड़ाने दें, जिने इजरायल के साथ संबंध नहीं हैं.
ट्रांसपोर्टेशन मिनिस्ट्री ने 'चैनल 12' को बताया कि शिन बेट ने सामान की ज्यादा जांच करने की गुजारिश के अलावा, फ्लाईदुबई से जुड़े खतरों के बारे में कभी कोई खास चेतावनी जारी नहीं की थी.
नेटवर्क ने एयरलाइन इंडस्ट्री के एक अज्ञात अधिकारी के हवाले से कहा, 'शिन बेट के पास यह जानने के सभी साधन हैं कि दुबई एयरलाइन के सभी पायलट कौन हैं, लेकिन उन्होंने बस आंखें मूंद लेना ही बेहतर समझा.' अधिकारी ने कहा, 'इजरायल में उन्हें उम्मीद थी कि एयरलाइन काफी भरोसेमंद होगी, इसलिए उन्होंने हाल के वर्षों में कोई समीक्षा नहीं की.'
ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री की हो सकती है जांच
रिपोर्ट में 'स्टेट कॉम्पट्रोलर ऑफिस' की 2024 की एक सिफारिश का भी जिक्र किया गया है, जिसमें सरकार से हवाई यात्रा से जुड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा करने को कहा गया था. जैसे-जैसे इजरायली अधिकारी इस घटना की जांच कर रहे हैं, ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री की भी जांच हो सकती है, जिसमें 'सेंटर फॉर एविएशन सिक्योरिटी ऑपरेशन्स' के काम की भी समीक्षा शामिल है. चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सेंटर को हाल के वर्षों में इजरायल में फ्लाइट क्रू के प्रवेश की निगरानी और देखरेख के लिए बनाया गया था.
नेटवर्क ने यह भी बताया कि शिन बेट का इजरायली एयरलाइंस एल अल, इजराएयर और अर्किआ के साथ महीनों से विवाद चल रहा था. जुलाई में, एजेंसी ने ईरान के साथ युद्ध के बीच मध्य पूर्व में तनाव से जुड़ी चिंताओं के कारण एयरलाइंस को दुबई में उतरने से रोक दिया था.
हालांकि, वह फैसला विदेशी एयरलाइंस के बजाय इजरायली एयरलाइंस पर लागू होता था, लेकिन चैनल 12 ने कहा कि गैर-इजरायली एयरलाइंस के प्रति भी इसी तरह की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था अपनाई जाती तो हमले को रोका जा सकता था.
पायलट को मिली मेडिकल क्लीयरेंस
इस बीच, UAE और सऊदी अरब के अधिकारी फ्लाईदुबई घटना की अपनी जांच जारी रखे हुए थे. खबरों के अनुसार, शिन बेट और मोसाद दोनों देशों में अपने समकक्षों के साथ सहयोग कर रहे थे.
सऊदी अरब ने कहा कि कैप्टन और को-पायलट, जिनका चोटों के लिए अस्पताल में इलाज किया गया था, उन्हें मेडिकल क्लीयरेंस मिल गई थी और वे गुरुवार सुबह अबू धाबी के लिए रवाना हो गए थे.
इजरायली अधिकारियों के साथ साझा की गई शुरुआती जानकारी से संकेत मिला कि को-पायलट ने शायद राष्ट्रवादी कारणों से ऐसा किया हो, जिससे आतंकवादी हमले की आशंका पैदा होती है. यह आकलन कथित तौर पर सऊदी जांचकर्ताओं के सामने को-पायलट के बयानों और जांच के दौरान इकट्ठा की गई अन्य जानकारी पर आधारित था.
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को पहले कहा था कि ओमान के फर्स्ट ऑफिसर को इस्लामिक कट्टरपंथी विचारधारा की शिक्षा दी गई थी. चैनल 12 ने कहा कि यह आकलन सऊदी जांच की गतिविधियों से परिचित दो इजरायली सूत्रों से मिली जानकारी पर आधारित था.
हालांकि, UAE कथित तौर पर इजरायल के उस फैसले से नाराज था, जिसमें जांच पूरी होने से पहले ही राष्ट्रवादी मकसद के बारे में शुरुआती निष्कर्ष पर पहुंचने की कोशिश की गई थी. नेटवर्क के अनुसार, अबू धाबी ने जांच खुद करने पर जोर दिया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि UAE ने राष्ट्रवादी मकसद की संभावना से इनकार नहीं किया है, लेकिन वह जांच के पक्के नतीजे का इंतजार कर रहा है.
साथ ही, मोसाद और शिन बेट के अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या को-पायलट ने अकेले यह काम किया या किसी आतंकवादी संगठन के कहने पर. फिलहाल, यह अनुमान मजबूत होता जा रहा है कि उसने राष्ट्रवादी कारणों से अकेले ही यह कदम उठाया. हालांकि, इस संभावना की पुष्टि नहीं हुई है और ईरान शामिल होने का भी कोई पक्का संकेत नहीं मिला है.