SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

फ्रांस की तरह धधक रहे कई देशः यूरोप से लेकर लैटिन अमेरिका तक फैली प्रदर्शन की आग

यूरोप के 6 देशों में पढ़ाई का बढ़ता खर्च, बेरोजगारी और महंगे घरों के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गए हैं. फ्रांस में हिंसक प्रदर्शन के बीच 2400 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. वहीं, इटली, ग्रीस, बेल्जियम और अल्बानिया में भी प्रदर्शन के दौरान हिंसा देखने को मिली.

Written By K. Raj Mishra
Published: Oct 19, 2026, 01:13 PM IST | Updated: Oct 19, 2026, 01:29 PM IST
Image Credit: प्रतीकात्मक AI तस्वीर
Join

फ्रांस में बढ़ती महंगाई के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शन अब हिंसक हो चुके हैं और नकाबपोश प्रदर्शनकारी लुटेरों में बदल चुके हैं. लगातार दूसरे दिन भी देश के कई शहरों में जमकर हिंसा और लूटपाट देखने को मिली. कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर खड़ी गाड़ियों को फूंक दिया और कई सरकारी इमारतों में भी आग लगा दी. इस हिंसा पर काबू पाने के लिए देशभर से करीब 2400 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है. हालात को देखते हुए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने देश को संबोधित किया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि हिंसा को कतई सही नहीं ठहराया जा सकता है और ऐसा करने वालों को सख्त सजा दी जाएगी. फ्रांस की तरह दुनिया के कई देश हिंसक प्रदर्शनों की आग में झुलस रहे हैं.

महंगाई की आग से धधक रहा इटली

फ्रांस की तरह इटली में भी महंगाई के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर चुके हैं. शनिवार को इटली के मिलान शहर में प्रदर्शनकारियों ने जमकर गदर काटा. मिलान के पियाजा डेल डुओमो (Piazza Duomo) और गैलेरिया विटोरियो इमानुएल II (Galleria Vittorio Emanuele II) इलाके में प्रदर्शनकारियों ने कई दुकानों में आग लगा दी. उपद्रवियों को भगाने के लिए पुलिस की ओर से आंसू गैस के गोले छोड़े गए, तो दंगाइयों की ओर से भी पुलिस पर पथराव कर दिया गया. इसमें कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की सूचना है. उधर, पुलिस ने करीब 50 उपद्रवियों को हिरासत में लिया है. इटली के बोलेन्या (Bologna) और ट्युरिन (Turin) शहर में हिंसक प्रदर्शन हुए. हिंसा के कारण स्थानीय रेलवे स्टेशनों को बंद करना पड़ा. पुलिस ने बोलेन्या से 7 लोगों को गिरफ्तार किया है.

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इन हिंसक प्रदर्शनों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि प्रदर्शन के अधिकार के नाम पर हिंसा को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक समाज का अधिकार है, लेकिन हिंसा और तोड़फोड़ स्वीकार नहीं की जा सकती है. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों और गुंडों में अंतर को पहचानना होगा. शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर शहरों को जलाने और पुलिस पर हमला करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. प्रधानमंत्री मेलोनी ने प्रदर्शनकारियों से अपील की करते हुए वे असामाजिक तत्वों को पहचानकर पुलिस के हवाले करें. गुंडों और प्रदर्शनकारियों में अंतर करना बहुत जरूरी है.

छात्र आंदोलन से सुलग उठा अल्बानिया

अल्बानिया में सरकारी भ्रष्टाचार और महंगी शिक्षा को लेकर छात्र सड़कों पर उतर चुके हैं. प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे को लेकर राजधानी तिराना में 17 अक्टूबर को काफी उग्र प्रदर्शन देखने को मिल रहा है. राजधानी में युवा प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय समेत कई सरकारी इमारतों और बैंकों को आग के हवाले कर दिया था. इससे देश को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. पुलिस और प्रदर्शनकारियों में हुई झड़पों में कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिनका अस्पतालों में इलाज चल रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री एदी रामा से युवाओं की नाराजगी अचानक नहीं बढ़ी है. आंदोलन में शामिल हुए प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश में शिक्षा को काफी महंगा कर दिया है. लाखों रुपये में डिग्री पाने के बाद भी नौकरी मिलने की संभावनाएं बहुत कम हैं.

प्रधानमंत्री एदी रामा पर भी भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लग चुके हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रधानमंत्री एदा रामा उनके टैक्स के पैसों से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के लिए देश के दक्षिणी तट पर लग्जरी रिसॉर्ट बनवा रहे हैं. बता दें कि एदी रारा साल 2013 से अल्बानिया के प्रधानमंत्री हैं. पिछले साल मई में वे चौथी पर चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बने थे. विपक्ष का आरोप है कि उन्होंने चुनावों में हेरफेर करके सत्ता हासिल की है.

पुर्तगालः मकान किराये में बेतहाशा बढ़ोतरी का विरोध

वहीं, पुर्तगाल में बढ़ती महंगाई, कम वेतन और मकान के किराये में बेतहाशा बढ़ोतरी को लेकर जनता ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. पुर्तगाल के सबसे बड़े ट्रेड यूनियन सीजीटीपी ने 18 अक्टूबर को राजधानी लिस्बन में नौकरी-पेशा करने वालों कम वेतन और आवासीय संकट को लेकर सरकार के खिलाफ मार्च निकाला. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि साल 2017 के बाद से जमीन की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है और मकानों का किराया भी महंगा हो गया है. इससे कम आय वाले लोगों और छात्रों के सामने छत का संकट खड़ा हो गया है. प्रदर्शनकारियों ने वेतन में बढ़ोतरी और आम लोगों को सस्ती दर पर मकान उपलब्ध कराने की मांग की है. उधर, पुर्तगाल के संसदीय मामलों के मंत्री कार्लोस अब्रेउ अमोरिम ने प्रदर्शनकारियों की मांगों को सिरे से ठुकरा दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार इन प्रदर्शनकारियों के आगे बिल्कुल नहीं झुकेगी.

ग्रीसः महंगी शिक्षा पर छात्रों का फूटा गुस्सा

ग्रीस में भी छात्रों का उग्र प्रदर्शन देखने को मिल रहा है. हजारों की संख्या में छात्रों ने संसद को घेर रखा है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि महंगाई काफी बढ़ गई है. इसका असर उनकी शिक्षा पर पड़ रहा है. उनका कहना है कि हॉस्टलों की किराया, बिजली, खाना और आने-जाने का खर्च इतना बढ़ गया है कि पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो रहा है. 13 अक्टूबर से हजारों छात्र संसद के सामने तंबू लगाकर बैठे हैं. उनका कहना है कि जब तक सरकार छात्र आवास और बढ़ते खर्च की समस्या पर ध्यान नहीं देती, वे अपना विरोध जारी रखेंगे.

बोलीवियाः सरकार को लगानी पड़ी इमरजेंसी

बोलीविया में भी बढ़ती महंगाई से जनता परेशान हो उठी है. मई में देश में कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन देखने को मिले. मजदूरों, किसानों और युवाओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था. सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद जून में बोलिविया के राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज ने आपातकाल लगा दिया था. इमरजेंसी की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा था, 'प्रदर्शनकारियों ने लोगों के काम, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को बाधित कर दिया है. इसे देखते हुए देश में 90 दिनों के लिए इमरजेंसी लगाई जा रही है. लोग अब सड़क अवरोधों के बंधक नहीं रह सकते.' सितंबर में सरकार ने आपातकाल को अगले 90 दिनों के लिए और बढ़ा दिया. आपातकाल के दौरान किसी भी तरह के प्रदर्शन पर पूर्ण रूप से रोक लगी हुई है. प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस और सेना को विशेष अधिकार दिए हैं.

अर्जेंटीनाः उच्च शिक्षा नीति के खिलाफ प्रदर्शन

लैटिन अमेरिकी देश अर्जेंटीना की सड़कों पर छात्रों का असंतोष साफ दिखाई दे रहा है. राष्ट्रपति जेवियर माइली की उच्च शिक्षा नीति के खिलाफ हजारों छात्र आंदोलन कर रहे हैं. पिछले सप्ताह राजधानी ब्यूनस आयर्स में प्रदर्शनकारियों और पुलिस की झड़प देखने को मिली थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संसद के बाहर हजारों की संख्या में छात्रों के साथ ट्रेड यूनियन के सदस्य भी आंदोलन पर बैठे थे. इसी दौरान कुछ उपद्रवियों ने पथराव कर दिया था, जिसके बाद पुलिस ने भी लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे. इस घटना में कई लोग घायल हुए थे.

ऑस्ट्रेलियाः महंगाई से परेशान हुई जनता

महंगाई की मार से ऑस्ट्रेलिया की जनता भी परेशान है. देश के सबसे बड़े ट्रेड यूनियन संगठन ACTU ने पिछले महीने ही महंगाई और आव्रजन नीतियों के खिलाफ 'मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया' नाम की रैलियों का आयोजन किया था. इन प्रदर्शनों के जरिए भारतीय मूल के प्रवासियों को भी निशाना बनाया गया और उनके खिलाफ नारेबाजी की गई. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बड़ी संख्या में भारतीयों के आने से देश के संसाधन घटे हैं और देश में महंगाई बड़ी तेजी से बढ़ी है. उनका कहना था कि आव्रजन नीतियों के कारण हमारे बच्चे घर पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, हमारे अस्पतालों में हमें सात घंटे इंतजार करना पड़ता है और हमारे यहां सड़कें कम पड़ रही हैं.

फ्रांस हिंसा पर ट्रंप का बड़ा बयान

उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में हो रहे हिंसक प्रदर्शनों के लिए देश की आव्रजन नीति को जिम्मेदार ठहराया है. ट्रंप ने हालात सुधारने के लिए फ्रांस सरकार को अपनी सीमाएं बंद करने की सलाह दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अलग-अलग देशों से आए लोगों ने ही फ्रांस को तोड़ दिया. इससे पहले ट्रंप ने फ्रांस को विरोध-प्रदर्शन करने के लिए अच्छी जगह बताते हुए तंज कसा था. उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा था कि फ्रांस क्रांति करने वालों के लिए अच्छी जगह है. ट्रंप ने कहा था कि फ्रांस घूमने के लिए खूबसूरत जगह है, लेकिन वहां क्रांति और दंगों का माहौल बना रहता है.  

ये भी पढ़ें- फ्रांस में हिंसा की आग, सड़कों पर बवाल: मैक्रों की चेतावनी- तबाही मचाने वालों को चुकानी होगी कीमत; 2400 लोग गिरफ्तार

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

कर्मराज मिश्रा ज़ी न्यूज (डिजिटल) टीम में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. वे यहां देश-विदेश की राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लिखते हैं. कानपुर यूनीवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर की डिग्री हासिल करके IBN-7 न्यूज चैनल से इंटर्नशिप की. इसके बाद खबर फास्ट, नेशन लाइव और साधना न्यूज न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल का रुख किया और 2017 से 2020 तक हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में बतौर सीनियर सब एडिटर काम किया. इसके बाद News Nation, India Ahead के बाद वर्तमान में Z Media का हिस्सा हैं. मीडिया में 10 साल के कार्यकाल के दौरान यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और दिल्ली विधानसभा चुनावों के अलावा 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव कवर किया है.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES