DNA: बच्चों को 1 लाख करोड़ के शेयर मुफ्त... क्या मस्क का यह दांव ट्रंप की डूबती नैया पार लगाएगा?
एलन मस्क का अमेरिकी बच्चों को स्पेसएक्स के 1 लाख करोड़ रुपये के शेयर बांटना सिर्फ दरियादिली है या इसके पीछे ट्रंप के 6 करोड़ वोटरों को साधने की सोची-समझी चुनावी बिसात बिछाई गई है? आज के इस DNA में हम इन्हीं सवालों को समझने की कोशिश करेंगे.
अमेरिका में मिड टर्म चुनाव से ठीक पहले सियासत में एक अनोखा मोड़ आ गया है. दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क क्रिसमस से दो महीने पहले ही अमेरिकी बच्चों के लिए 'सैंटा क्लॉज' बन गए हैं. मस्क ने देश के हर बच्चे को अपनी कंपनी स्पेसएक्स का एक-एक शेयर मुफ्त देने का बड़ा ऐलान किया है. करीब 1 लाख करोड़ रुपये के इस भारी-भरकम तोहफे को कहने के लिए तो बच्चों के भविष्य से जोड़ा जा रहा है, लेकिन सियासी गलियारों में इसे डोनाल्ड ट्रंप की नैया पार लगाने वाली 'चुनावी रेवड़ी' माना जा रहा है. आइए जानते हैं कैसे...
दरअसल, फ्रांस का दंगा अमेरिका में चुनावी मुद्दा बन गया है. ट्रंप अमेरिका के लोगों को फ्रांस के हालात का डर दिखाकर वोट मांग रहे हैं. दूसरी तरफ ट्रंप के करीबी और दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क..यूएस में मिड टर्म चुनाव से पहले..बच्चों के लिए सैंटा क्लॉज बन गए हैं. वो क्रिसमस से दो महीने पहले ही अमेरिका के बच्चों को उपहार बांट रहे हैं. मस्क ने अमेरिका के हर बच्चे को अपनी कंपनी स्पेसएक्स का एक शेयर देने का ऐलान किया है.
अपने पोस्ट में मस्क ने कहा है- अगले साल मैं अमेरिका के हर बच्चे को अपना एक स्पेसएक्स शेयर दूंगा. ये ऐसी कई चीजों में से पहली होगी. इसका मतलब ये है कि स्पेसएक्स का शेयर मस्क की तरफ से बच्चों को पहला तोहफा होगा. लेकिन इसके बाद भी इस तरह के उपहार बंद नहीं होंगे. आखिर मस्क अमेरिका के बच्चों को अपनी कंपनी का ये शेयर क्यों दे रहे हैं? एक बच्चा, एक शेयर वाली इस योजना पर मस्क की संपत्ति का कितना हिस्सा खर्च होगा? और सवाल ये भी कि जिस वक्त अमेरिका में मिड टर्म चुनाव होने वाले हैं, उसी समय मस्क को शेयर बांटने का विचार क्यों आया? आज हम इन सभी सवालों को डिकोड करेंगे.
1 लाख करोड़ का गणित: भारत के शिक्षा बजट का 70 फीसदी
अमेरिकी शेयर बाजार के मुताबिक स्पेसएक्स के एक शेयर का भाव लगभग 148 अमेरिकी डॉलर है. यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 14,000 रुपये. इस तरह मस्क हर बच्चे को 14,000 रुपये का शेयर बांटेंगे. मस्क ने ये साफ नहीं किया है कि वो किस उम्र के बच्चों को शेयर देंगे, लेकिन अगर 18 वर्ष तक के बच्चों को मानें तो अमेरिकी जनगणना के अनुसार, वहां इस उम्र के लगभग 7 करोड़ 30 लाख बच्चे हैं. इस तरह मस्क करीब 11 अरब डॉलर यानी 1 लाख करोड़ रुपये का शेयर बच्चों को मुफ्त में देंगे.
सोचिए, 1 लाख करोड़ रुपये मस्क बांट रहे हैं. ये भारत के शिक्षा बजट का 70% है. ये इसरो के बजट का लगभग 7 गुना है. इस पैसे से आयुष्मान भारत योजना 10 साल तक चलाई जा सकती है. और ये बच्चों के लिए मस्क का कोई अंतिम उपहार नहीं बल्कि सिर्फ शुरुआत है. मित्रो, आपको ये भी जानना चाहिए कि मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के शेयर का ग्राफ क्या रहा है. इसमें अभी तक कितना उतार-चढ़ाव आया है.
स्पेसएक्स के शेयर का हाल: कितना नफा, कितना नुकसान?
स्पेसएक्स का IPO इसी साल जून महीने में 135 डॉलर की कीमत पर आया था. लिस्टिंग के केवल 4 दिन बाद इसका भाव 226 डॉलर तक चला गया था. हालांकि अगस्त में ये 105 डॉलर तक आ गया. इसके बाद सितंबर-अक्टूबर में इसने वापसी की और अब ये 148 डॉलर के भाव पर कारोबार कर रहा है. यानी ये लिस्टिंग के भाव से करीब 10% ज्यादा पर है. इस तरह बच्चों को जो शेयर मिलेगा वो कोई फिक्स पैसा नहीं है. इसका दाम ज्यादा भी हो सकता है और कम होने की भी आशंका है.
मस्क की अकूत दौलत: सिर्फ 1 फीसदी हिस्से से सधेगा काम
मस्क जो पैसा बच्चों के बीच बांट रहे हैं, वो उनकी संपत्ति का कोई बहुत बड़ा हिस्सा नहीं है. अक्टूबर के बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक मस्क की कुल संपत्ति 904 अरब डॉलर है यानी 86 लाख करोड़ के आसपास. इसमें से वो 11 अरब डॉलर यानी 1 लाख करोड़ रुपये बच्चों को बांटेंगे. इसका ये अर्थ है कि अपनी कुल संपत्ति का केवल 1% वो बच्चों को देंगे.
'ट्रंप अकाउंट्स' का कनेक्शन और शेयर बांटने का फॉर्मूला
इस योजना की घोषणा से अमेरिका के बच्चे जितने खुश नहीं हैं, उससे ज्यादा राष्ट्रपति ट्रंप हैं. ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मस्क को शुक्रिया कहा. ट्रंप ने लिखा, हमारे शानदार दोस्त एलन मस्क का बहुत-बहुत धन्यवाद, जिन्होंने 'ट्रंपअकाउंट्स' के जरिए लाखों अमेरिकी बच्चों को स्पेसएक्स के शेयर देकर अद्भुत उदारता दिखाई है. जब हमने 'ट्रंप अकाउंट्स' बनाए थे, तब यही सोचा गया था. अमेरिका के 7 करोड़ से ज्यादा बच्चों तक शेयर पहुंचाने की प्रक्रिया क्या होगी, इसके बारे में मस्क या उनकी कंपनी की तरफ से फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी गई है. लेकिन ये कसर ट्रंप ने पूरी कर दी.
ट्रंप ने कहा है कि बच्चों को स्पेसएक्स के शेयर..ट्रंप अकाउंट के जरिए दिए जाएंगे. यानी वो अकाउंट जो खास तौर पर बच्चों के लिए बनाया गया है और ट्रंप के नाम पर है. यही वजह है कि मस्क की इस दरियादिली को ट्रंप के फायदे के लिए बताया जा रहा है.
बच्चों को तोहफा या 6 करोड़ वोटरों को साधने की बिसात?
मस्क ने बच्चों को शेयर देने की घोषणा 3 नवंबर को होने वाले मिड टर्म चुनाव से ठीक 2 हफ्ते पहले की है. भारत की तरह अमेरिका में भी 18 साल से कम उम्र के बच्चे वोट नहीं दे सकते. यानी जिन बच्चों को शेयर मिलेगा, वो तो मस्क के करीबी ट्रंप को फायदा नहीं पहुंचा सकते, लेकिन उनके माता-पिता तक संदेश जरूर जाएगा. अमेरिका में 3 करोड़ से ज्यादा ऐसे परिवार हैं, जिनके घर में इस उम्र के बच्चे हैं. यानी मस्क के इस फैसले का असर अमेरिका के 3 करोड़ घरों पर होगा. एक अनुमान के मुताबिक इन घरों में करीब 6 करोड़ वोटर हैं. यानी मस्क की ये दरियादिली 6 करोड़ मतदाताओं को प्रभावित करेगी.
अमेरिका में ट्रंप और मस्क की जुगलबंदी किसी से छिपी नहीं है. पिछले मंगलवार को DNA में हमने बताया था कि मिड टर्म चुनाव के लिए रिपब्लिकन पार्टी को मस्क ने रिकॉर्ड चंदा दिया है. ट्रंप के राष्ट्रपति कैंपेन से लेकर मिड टर्म चुनाव तक मस्क 6,300 करोड़ रुपये खर्च कर चुके हैं. और अब वो दूसरी तरफ ये योजना लेकर आए हैं.
ट्रंप का 5,000 डॉलर का वादा और सरकारी खजाने पर बोझ
चुनाव से पहले बच्चों को लुभाने के लिए मस्क योजना लेकर आए हैं. दूसरी तरफ ट्रंप इससे भी बड़ा वादा कर चुके हैं. ट्रंप ने पिछले महीने ही अमेरिका में 18 साल से ज्यादा उम्र के हर नागरिक को 5,000 डॉलर देने का वादा किया था. यानी भारतीय मुद्रा में करीब पौने 5 लाख रुपये. लेकिन उसके साथ शर्त ये थोपी है कि संसद के दोनों सदनों में उनकी पार्टी का कंट्रोल बने रहना चाहिए. यानी मिड टर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को जीत मिले.
अमेरिका में 24 करोड़ से ज्यादा लोग 18 साल से ज्यादा उम्र के हैं. इस तरह ट्रंप को अपनी ये घोषणा पूरी करने के लिए 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च करने होंगे. यानी मस्क जितना पैसा बांट रहे हैं, उसका लगभग 110 गुना ज्यादा. खास बात ये है कि मस्क की तरह ट्रंप ये पैसा अपनी जेब से नहीं देंगे. अपनी कंपनी के शेयर नहीं बांटेंगे. बल्कि अमेरिका के सरकारी खजाने से देंगे. वो खजाना जो खाली है. जिस पर 40 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज चढ़ा हुआ है.
हार का डर और गिरती अप्रूवल रेटिंग: क्या काम आएगी रेवड़ी?
चुनाव में हार का डर ट्रंप को इतना सता रहा है कि वो ऐसे वादे भी कर रहे हैं, जिनके पूरा होने पर अमेरिका के लोगों को भी यकीन नहीं है. यही वजह है कि अमेरिका के लोग इन वादों को ज्यादा भाव नहीं दे रहे हैं. 5,000 डॉलर की रेवड़ी के बावजूद मिड टर्म चुनाव से पहले ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिरकर सिर्फ 31% रह गई है. यानी सिर्फ 31% लोग ट्रंप के काम-काज से संतुष्ट हैं. 47% मतदाताओं ने ट्रंप की विरोधी पार्टी डेमोक्रेट्स को वोट देने की इच्छा जताई है, जबकि रिपब्लिकन्स को सिर्फ 35% लोगों ने चुना. यानी पैसा बांटने की योजना से ट्रंप को कोई फायदा होता नहीं दिख रहा है.
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