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पोलर रिसर्चर्स ने आर्कटिक और अंटार्कटिक के बीच सैटेलाइट वीडियो कॉल करने के लिए गुओवांग कॉन्स्टेलेशन इस्तेमाल किया, जो एलन मस्क के स्टारलिंक का संभावित चीनी प्रतिद्वंद्वी है. सरकारी मीडिया के अनुसार, यह कॉल देश के सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन की बढ़ती क्षमताओं को दिखाती है.
चीन हाल के वर्षों में अपने लो-अर्थ-ऑर्बिट कॉन्स्टेलेशन को तेजी से डेवलप कर रहा है, खासकर तब से जब अमेरिका स्थित स्टारलिंक ने यूक्रेन को रूस के पूर्ण पैमाने पर हमले का विरोध करने में मदद करके अपनी युद्ध-समय की अहमियत साबित की. चीन ने डेटा सुरक्षा चिंताओं के कारण अपने क्षेत्र में विदेशी सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विसेज पर रोक लगा दी है. सरकारी प्रसारक CCTV के अनुसार, यह लगभग रियल-टाइम कॉल सितंबर के आखिर में तीन चीनी आर्कटिक अभियान जहाजों यानी जुएलॉन्ग, जिडी और टैंसुओ-3 पर मौजूद रिसर्चर्स और अंटार्कटिक में चीन के किनलिंग स्टेशन के कर्मचारियों के बीच हुई. बताया गया है कि कॉल में देरी एक सेकंड से भी कम थी. गुओवांग कॉन्स्टेलेशन का कामकाज सरकारी स्वामित्व वाली चाइना सैटेलाइट नेटवर्क ग्रुप देखती है.
नेटवर्क का डिप्लॉयमेंट अभी शुरुआती चरण में है. सैटेलाइट लॉन्च दिसंबर 2024 में शुरू हुए 13,000 सैटेलाइट में से 180 से ज्यादा अब ऑर्बिट में हैं. आर्कटिक रिसर्चर्स ने रिसर्च जहाजों और चीन की नेशनल मरीन डेटा एंड इंफॉर्मेशन सर्विस के बीच रियल-टाइम संचार का समर्थन करने की गुओवांग की क्षमता का भी टेस्ट किया, जिसमें डेटा फाइलें और यात्रा लॉग भेजे गए.
रिपोर्ट में कहा गया कि यह टेस्ट चीन के लिए आर्कटिक इलाकों में इंडिपेंटेंड और कंट्रोल्ड कम्युनिकेशन हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम था, साथ ही यह सुनिश्चित करना कि डेटा देश के भीतर रहे और डेटा सुरक्षा में सुधार हो.
रिपोर्ट के अनुसार, पोलर टेस्ट के दौरान दर्ज की गई अधिकतम अपलिंक और डाउनलिंक रफ्तार करीब 30 मेगाबिट प्रति सेकंड (Mbps) थी. इसकी तुलना में, स्पेसएक्स का स्टारलिंक आमतौर पर जगह और नेटवर्क की स्थितियों के आधार पर 25Mbps और 220Mbps के बीच डाउनलोड रफ्तार देता है.
चीनी ऑनलाइन सैन्य पर्यवेक्षकों के मुताबिक, 30Mbps का सैटेलाइट लिंक अधिकांश स्ट्रैटजिक कम्युनिकेश के लिए काफी होगा और संभावित रूप से बिना क्रू मेंबर्स वाले सिस्टम के रियल-टाइम कंट्रोल के लिए बेहतर है. हालांकि, 11,000 सैटेलाइट वाले स्टारलिंक की तुलना में 180 सैटेलाइट वाले गुओवांग नेटवर्क का कवरेज, कुल डेटा क्षमता और उपलब्धता अभी भी सीमित है. जानकारों का कहना है कि यह नेटवर्क मिलिट्री कम्युनिकेशन के लिए जरूरी क्षमताओं, जैसे कि नेटवर्क की मजबूती और जैमिंग से बचने की क्षमता, के मामले में भी पीछे है.
चाइना सैटेलाइट नेटवर्क ग्रुप का टारगेट साल 2027 के आखिर तक पूरे चीन में गुओवांग कवरेज देने के लिए ऑर्बिट में 400 सैटेलाइट हों. लंबे समय में, इस नेटवर्क के तहत 2029 के आखिर तक लगभग 1,300 सैटेलाइट तैनात किए जाने और 2035 तक इनकी संख्या 12,992 तक पहुंचाने की उम्मीद है.
गुओवांग के अलावा, चीन 'कियानफान' कॉन्स्टेलेशन भी बना रहा है, जिसमें 15,000 सैटेलाइट शामिल करने का टारगेट है. इस नेटवर्क ने अगस्त 2024 में सैटेलाइट लॉन्च करना शुरू किया था और पिछले महीने तक ऑर्बिट में 256 सैटेलाइट मौजूद थे. सरकारी समर्थन वाली कंपनी, शंघाई स्पेससेल टेक्नोलॉजीज ने कहा है कि उसका टारगेट इस साल के आखिर तक स्पेस में 324 सैटेलाइट तैनात करना है.