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दुनिया में युद्ध से तनाव, लेकिन BRICS में रूस-भारत का 'महासंगम'; पुतिन के दिल्ली आने से US को क्या संदेश?

12 एवं 13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए रूस के राष्ट्रपति दिल्ली पहुंचेंगे. यह दौरा कई मायनों में खास हो जाता है. पुतिन एक साल से भी कम अंतराल के बीच भारत की यात्रा कर रहे हैं.

दुनिया में युद्ध से तनाव, लेकिन BRICS में रूस-भारत का 'महासंगम'; पुतिन के दिल्ली आने से US को क्या संदेश?
Image Credit: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत आएंगे पुतिन (फाइल फोटो)

भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी हिस्सा लेंगे. यह यात्रा ऐसे समय पर हो रही है, जब रूस और यूक्रेन के बीच पिछले चार साल से अधिक समय से युद्ध जारी है. वहीं, पश्चिम एशिया में भी जंग के हालात हैं. इसके अलावा अमेरिका और रूस के बीच शीत युद्ध देखने को मिल रही है. जानकारों का मानना है कि पुतिन की यह दिल्ली यात्रा सामान्य कूटनीतिक यात्रा से कहीं अधिक बढ़कर है.

दरअसल, लगातार बदलते वैश्विक समीकरणों और संवेदनशील तथा तनावपूर्ण माहौल में रूसी राष्ट्रपति पुतिन का दिल्ली आना दुनिया के तमाम कूटिनीतिक हलकों में हलचल पैदा करेगा. इसका सीधा असर भारत और अमेरिका के रिश्तों पर भी पड़ेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर  भारत पर टैरिफ के फैसले के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते निचले स्तर पर पहुंचे हैं. हालांकि, रूस और भारत के रिश्तों पर कोई खास असर नहीं हुआ.

पुतिन की दिल्ली यात्रा पर दुनिया की नजर

वर्तमान स्थिति में पूरा पश्चिम एशिया युद्ध के आगोश में है. ईरान और अमेरिका की जंग में कई देशों को नुकसान पहुंच रहा है. इस परिस्थिति में पश्चिम पश्चिमी देश एकतरफा नीतियां अपना रहे हैं. वहीं, पुतिन का भारत आना एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम है.

बता दें कि रूस और भारत के बीच ब्रिक्स सम्मेलन में होने वाली द्विपक्षीय वार्ता इसलिए भी अहम हो जाती है, क्योंकि दोनों देशों के बीच संबंध उच्चतम स्तर पर हैं और दोनों देश पश्चिम एशिया में गहरा प्रभाव रखते हैं.

ऐसे में जानकारों का मानना है कि अगर नई दिल्ली में होने वाली इस अहम बैठक में अगर शांति प्रयासों को लेकर कोई भी चर्चा होती है, तो इसका गहरा असर ग्लोबल साउथ और पश्चिमी एशिया के फ्यूचर पर पड़ने की पूरी संभावना है.

अमेरिका के लिए क्यों अहम है पुतिन की दिल्ली यात्रा

इस बात ने इनकार नहीं किया जा सकता है कि फिलहाल अमेरिका और रूस के बीच शीत युद्ध चल रहा है. हाल में ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से रूसी राष्ट्रपति से मुलाकात करने के लिए एक अहम बैठक का प्रस्ताव दिया था. हालांकि, उस प्रस्ताव पर रूस की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

इस बात से भी इनका नहीं किया जा सकता है कि अमेरिका की कूटनीति इस समय रूस को वैश्विक मंच पर पूरी तरीके से अलग-थलग करने पर लगी है. अमेरिका का मानना है कि दुनिया का कोई भी देश रूस के साथ मंच साझा न करें, लेकिन भारत ने पहले ही अपनी नीति स्पष्ट रखी है. पुतिन का भारत में भव्य स्वागत अमेरिका के लिए शांत और एक सीधा संदेश है. नई दिल्ली ने यह बता दिया है कि हमारी विदेश नीति किसी देश के हिसाब से नहीं, बल्कि अपने हितों को ध्यान में रखते हुए तय होती है.

BRICS में रूस-भारत साझेदारी को मिलेगी नई धार

गौर करने वाली बात है कि ब्रिक्स को पश्चिमी देशों के संगठन जी-7 के एक मजबूत विकल्प के तौर पर देखा जाता है. इस बीच ब्रिक्स के लिए भारत आत रहे पुतिन की नई दिल्ली में मौजूदगी से रूस और भारत की साझेदारी को एक नई ऊर्जा मिलने की संभावना है. बता दें कि पश्चिम एशिया संकट पर विषय पर भारत और रूस की सोच कई मानों में मेल खाती है. दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ हैं, लेकिन दोनों देश किसी भी क्षेत्र में सत्ता परिवर्तन या किसी बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ सख्त रहे हैं.

क्या है अमेरिका की असली चिंता?

जहां अमेरिका वर्तमान में युद्ध के पक्ष में और वह किसी भी तरीके से पीछे हटने को तैयार नहीं है, तो भारत ने हमेशा संयम बरतने और बातचीत से मसला सुलझाने की वकालत की है. रूस भी इस क्षेत्र में शांति का पैरोकार बनने की कोशिश कर रहा है.

कुछ जानकार मानते हैं कि अमेरिका के लिए असली चिंता यह है कि अगर भारत और रूस पश्चिमी एशिया को लेकर कोई साझा कूटनीतिक पहल करते हैं, तो इसमें मिडिल ईस्ट में अमेरिका का प्रभाव कम हो सकता है. ऐसे में अमेरिका को इस बात का भी डर है कि कहीं भारत, रूस और ब्रिक्स देश मिलकर कोई ऐसा प्रस्ताव न लाएं, जो अमेरिकी कूटनीति को पीछे छोड़े.

कच्चा तेल और ऊर्जा के संबंधों पर नई रणनीति पर जोर

यूक्रेन यूद्ध के बाद से ही अमेरिका और यूरोप की नजर भारत और रूस के बीच वर्षों से चल रहे ऊर्जा संबंधों पर गड़ी है. पश्चिमी देशों ने जब रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाए, तो भारत ने अपने नागरिकों को सस्ता तेल उपलब्ध कराने के लिए रूस से भारी मात्रा में रियायती कच्चा तेल खरीदा. आज के समय में रूस भारत का सबसे बड़ा तेल का आपूर्तिकर्ता बन चुका है.

ऐसे में पुतिन की भारत यात्रा तेल और ऊर्जा के संबंधों पर एक नई दीर्घकालिक रणनीति बन सकती है. यहां बात केवल कच्चे तेल से संबंधित नहीं है, बल्कि रूस भारत में रिफाइनरी लगाने, परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में नए रिएक्टर्स के निर्माण और प्राकृतिक गैस की सप्लाई को लेकर भी बड़े समझौते कर सकता है.

एक साल में दूसरी बार भारत की यात्रा पर आएंगे पुतिन

वैश्विक कुटनीति की दुनिया में किसी भी बड़े देश के राष्ट्रध्यक्ष का एक ही गेश में एक साल से कम समय में दोबारा आना काफी अहम माना जाता है. इससे पहले साल 2025 के दिसंबर में भी पुतिन ने भारत की यात्रा की थी. अब एक साल से भी कम समय में वह दूसरी बार भारत की यात्रा पर आ रहे हैं.  यह इस बात का प्रमाण है कि भारत और रूस के संबंध अब गहराई तक पहुंच चुके हैं. यह दौरा इसलिए भी खास है, क्योंकि यह 'रूटीन' से हटकर है. ऐसे में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि दोनों देशों के नेतृत्व के बीच एक व्यक्तिगत विश्वास कायम हो चुका है.

ऐसे में पुतिन की होने वाली भारत की यह यात्रा एक मील का पत्थर साबित होगी. भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि नई दिल्ली अपनी शर्तों पर कूटनीति करता है. भारत ने अमेरिका के साथ अपने नए और तकनीकी और रक्षा संबंधों को मजबूत करते हुए भी रूस के साथ अपनी पुरानी और आजमाई हुई दोस्ती को सींच सकता है.

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About the Author

abhinav tripathi

abhinav tripathi

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
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