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बांग्लादेश में हिंदुओं पर जुल्म की इंतहा! जगन्नाथ यूनिवर्सिटी में पहले की 'बीफ' पार्टी, अब नवरात्रि में गोहत्या प्लान कर रहे कट्टरपंथी

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद हिंदुओं के भयानक दमन का दौर चल रहा है. वहां पर जगन्नाथ यूनिवर्सिटी में कट्टरपंथी मुस्लिम छात्रों ने पहले 'बीफ' पार्टी की. अब वही स्टूडेंट्स नवरात्रि में यूनिवर्सिटी में गोहत्या का प्लान कर रहे हैं.

Written By Devinder Kumar
Published: Oct 16, 2026, 05:06 PM IST | Updated: Oct 16, 2026, 05:20 PM IST
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अफगानिस्तान और पाकिस्तान में तो हिंदू पहले ही साफ हो चुके थे. अब बांग्लादेश में भी हिंदुओं के सफाये का अभियान चल रहा है. जिस मुल्क का निर्माण भारत ने अपने खून-पसीने को कुर्बान करके करवाया था, अब उसी के बाशिंदे वहां रह रहे अल्पसंख्यक हिंदुओं पर जुल्म की हद पार करके अपना असली रंग दिखा रहे हैं. अब वहां पर ऐसा मामला सामने आया है, जिससे दुनियाभर में रह रहे करोड़ों हिंदुओं का खून खौला दिया है. वहां राजधानी ढाका की जगन्नाथ यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले मुस्लिम स्टूडेंट्स ने पहले मंदिर के सामने बीफ खिचड़ी पार्टी का आयोजन किया. अब वे नवरात्र में यूनिवर्सिटी परिसर में गाय काटने की योजना बना रहे हैं, जिसके लिए प्रशासन ने भी अपनी सहमति दे दी है.

यूनिवर्सिटी में मंदिर के पास की गई बीफ खिचड़ी पार्टी

बांग्लादेश के डेली स्टार और बीबीसी बांग्ला की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी के इस्लामिक इतिहास विभाग में पढ़ने वाले मुस्लिम छात्रों ने 12 अक्टूबर को यूनिवर्सिटी परिसर में बने मंदिर के पास बीफ खिचड़ी पार्टी का आयोजन किया गया. इसके लिए गोमांस यूनिवर्सिटी में लाया गया और उसे मंदिर के पास में ही पकाकर सबको खिलाया गया. यही नहीं, हिंदुओं को अपमानित करने के लिए चूल्हे की ईंटें भी मंदिर परिसर की ही इस्तेमाल की गईं.

रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदू स्टूडेंट्स ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से मिलकर पहले बीफ खिचड़ी पार्टी का विरोध किया था. लेकिन उनके विरोध को कोई तवज्जो नहीं दी गई. इससे वहां पढ़ने वाले मुस्लिम स्टूडेंट्स का हौसला बढ़ा. इसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी परिसर में सरेआम गाय काटकर उसके मांस से मटन बनाकर पार्टी करने का एलान कर दिया.

अब यूनिवर्सिटी में गो हत्या का प्लान कर रहे मुस्लिम स्टूडेंट्स

खबरों के अनुसार, हिंदू स्टूडेंट्स ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से मिलकर इस फैसले पर सख्ती से विरोध जताया और गो-हत्या रोके जाने की मांग की. उनकी मांग को देखते हुए प्रोफेसर मोहम्मद आजम खान ने सरकारी नियमों का हवाला देते हुए यूनिवर्सिटी में गाय की कुर्बानी की अनुमति देने से इनकार किया. इसके लिए सरकार के उन नियमों का हवाला दिया गया, जिसके तहत तय बूचड़खानों के अलावा कहीं ओर पशुओं की कुर्बानी नहीं दी जा सकती.

ये भी पढ़ें- अमेरिका में मोहम्मद यूनुस का हुआ जोरदार विरोध, लगे 'वापस जाओ' के नारे, लोग बोले- तुम हत्यारे हो

लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन का यह फैसला वहां पढ़ने वाले मुस्लिम स्टूडेंट्स को रास नहीं आया. उन्होंने इसे मजहबी आजादी की मुद्दा बनाते हुए जबरदस्त दबाव बना दिया. जिसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उनके आगे झुकते हुए नवरात्र में यूनिवर्सिटी में गाय काटे जाने को अनुमति दे दी है. आयोजकों के मुताबिक, यह कार्यक्रम आर्ट्स बिल्डिंग के पास एक खुले मैदान में किया जाएगा.

ढाका में चंदा इकट्ठा करके खरीदी गई गाय

बीबीसी बांग्ला की रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम छात्रों ने इस आयोजन के लिए चंदा इकट्ठा कर एक गाय खरीदी है. वहीं कट्टरपंथी इस्लामिक पार्टी खेलाफत मजलिस से जुड़े छात्र संगठन बांग्लादेश इस्लामी छात्र मजलिस ने भी कथित तौर पर एक गाय देने की पेशकश की है. यही नहीं, सोशल मीडिया पर एक पब्लिक इन्विटेशन जारी किया गया है, जिसमें 70 टका देकर कोई भी व्यक्ति इस बीफ पार्टी में शामिल हो सकता है.

जगन्नाथ विश्वविद्यालय केंद्रीय छात्र संघ के महासचिव अब्दुल अलीम आरिफ का कहना है कि छात्र प्रतिनिधियों ने इस आयोजन के लिए  विश्वविद्यालय प्रशासन से अनुमति हासिल की है. यूनिवर्सिटी के अधिकारियों से हुई मुलाकात में इस बात पर सहमति बनी कि गोहत्या के इस कार्यक्रम को आयोजित किया जा सकता है और इसमें कोई रुकावट नहीं है. उन्होंने कहा कि यह मजहबी आजादी का मुद्दा है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है.

अपनी स्थिति पर खून के आंसू बहा रहे बांग्लादेशी हिंदू

वहीं हिंदू छात्र-छात्रा देश में अपनी दयनीय स्थिति को जानते हुए न चाहते हुए भी खामोश रहने को मजबूर हैं. वे इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि अगर उन्होंने इसके विरोध में आवाज उठाई तो कट्टरपंथी मुस्लिम जमात उनके पीछे पड़ जाएगी. उन कट्टरपंथियों के खिलाफ उन्हें पुलिस-प्रशासन या सरकार से भी कोई मदद नहीं मिलेगी. जो शेख हसीना सरकार के पतन के बाद एकदम 180 यू-टर्न लेकर घोर कट्टरपंथी रुख अपना चुका है और हिंदुओं के दमन पर अक्सर खामोश ही रहा है. 
 

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About the Author

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
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