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कहावत है कि इंसान जो बोता है, एक दिन वही काटता है. शेख हसीना सरकार का तख्तापलट करवाकर वहां के शासन के प्रधान सलाहकार बने मोहम्मद यूनुस को अब इस कड़वी हकीकत का बखूबी अहसास हो रहा है. अपने डेढ़ साल के शासनकाल में यूनुस में हिंदुओं समेत सैकड़ों अल्पसंख्यकों और हसीना समर्थकों को मौत के घाट उतरवाया था. अब उसी यूनुस को दुनियाभर में दुत्कार मिल रही है.
यूनुस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. यह वीडियो न्यूयार्क के जॉन एफ. कैनेडी एयरपोर्ट का है, जिसमें वे अपने एक सहयोगी के साथ व्हीलचेयर पर बैठकर जाते दिख रहे थे. वहां पर लोगों ने उन्हें घेर लिया और 'आतंकवादी वापस जाओ', 'आतंकवादी यूनुस यूएस में क्या करने आए हो', 'आतंकी वापस जाओ' के नारे लगाए.
“YOU TERRORIST, WHY DID YOU COME HERE” Muhammad Yunus has fled Bangladesh and been spotted at JFK airport with the same concubine he has been involved in a relationship for years, while leaving his sick wife at home, now facing peak humiliation and public anger. Karma. https://t.co/RiR6n4Yeky
— Toofani 🇧🇩 (@Ekattor_71) October 13, 2026
वीडियो में एक व्यक्ति को यह कहते हुए भी सुना गया, 'तुम आतंकी हो, यूएस में क्यों आए हो. तुमने मेरे मुल्क में हजारों लोगों को मरवा डाला. मेरे देश में लोकतंत्र को खत्म कर दिया. तुम आतंकी वापस जाओ.'
अचानक इस विरोध से व्हील चेयर पर बैठे यूनुस के चेहरे का रंग उड़ गया. उसके मुंह से कोई बोल नहीं निकला. वहीं हालात बिगड़ते देख यूनुस का सहायक तेजी से व्हील चेयर चलाकर उसे एयरपोर्ट से बाहर निकाल ले गया.
यह कोई पहली बार नहीं है, जब मोहम्मद यूनुस और उनकी समर्थक नेशनल सिटीजन पार्टी के नेताओं को इस तरह की जलालत झेलनी पड़ी हो. इससे पहले सितंबर 2025 में एनसीपी सदस्य सचिव अख्तर हुसैन अपने एक ग्रुप के साथ कैनेडी एयरपोर्ट के बाहर निकला था. तब वहां पर मौजूद अवामी लीग समर्थकों ने उन्हें पहचान लिया और अंडे बरसाकर खूब नारेबाजी की थी.
बताते चलें कि शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद बवाली छात्रों ने मोहम्मद यूनुस को देश का प्रधान सलाहकार बनाया था. सत्ता संभालने पर उसने कहा कि वह हालात सुधारकर 6 महीने में चुनाव करवाकर नई सरकार को शासन सौंप देगा. लेकिन कुर्सी मिलते ही यूनुस के तेवर बदल गए और वह चुनाव कार्यक्रम को आगे बढ़ाता रहा. ऐसा करके वह करीब 2 साल यानी अगस्त 2024 से फरवरी 2026 तक बांग्लादेश की सत्ता पर काबिज रहा.
उसके इसे शासनकाल को बांग्लादेश में काले दौर के रूप में लोग याद करते हैं. उसकी सरपरस्ती में जमात ए इस्लामी और दूसरे कट्टरपंथियों ने चुन-चुनकर हिंदुओं की हत्याएं की. उनके घरों को जलाया गया और संपत्तियों को स्वाहा कर दिया गया. शेख हसीना सरकार में उपद्रवियों पर कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों को नौकरियों से निकाल दिया गया या मरवा दिया गया.
आखिरकार बांग्लादेश में चुनाव हुए, जिसमें अवामी लीग को प्रतिबंधित कर दिया गया. शेख हसीना की अनुपस्थिति में हुए इलेक्शन में बीएनपी स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में आई और तारिक रहमान देश के नए पीएम बने. रहमान सरकार के दौर में हिंदुओं पर अत्याचारों का सिलसिला थमा नहीं है और उन्हें अब भी भय के साये में रहना पड़ रहा है. वहीं हालात सुधारने के बजाय तारिक रहमान कट्टरपंथियों को मौन संरक्षण देते हुए सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं.