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सितंबर का महीना खगोलीय घटनाओं से भरा पड़ा है. इस महीने की 23 तारीख को शरद विषुव होगा यानी इस तारीख को दिन और रात की अवधि बराबर होगी. आगामी 23 सिंतबर को दिन और रात की अवधि करीब 12-12 घंटे होगी. यही नजारा 21 मार्च को भी देखने को मिलता है. वैज्ञानिक बताते हैं कि इस दिन सूरज की सीधी किरणें भूमध्य रेखा पर पड़ेंगी. यही कारण है कि दिन और रात की अवधि बराबर होती है.
इसके साथ ही 26 सितंबर को पूर्णिमा होगी, जिसको दुनिया के कई देशों में ‘हार्वेस्ट मून’ के नाम से जाना जाता है. यह इसलिए भी खास है, क्योंकि ये पूर्णिमा शरद विषुव के एकदम पास पड़ती है. कुछ देशों में इसको पारंपरिक रूप से 'कार्न मून' भी कहा जाता है. बता दें यह चंद्रमा सूर्यास्त से ठीक पहले लगातार कई रातों तक उगता है. इस दौरान किसान मक्के की फसल को तैयार करते हैं.
बताया जाता है कि हार्वेस्ट मून उगने के दौरान लाल रंग का नजर आता है. इसकी खास वजह रिफ्रैक्शन को माना जाता है. चूंकि, सूर्यास्त के समय ही चंद्रमा उग जाता है, ऐसे में सूर्य की लाल रोशनी अधिक मात्रा में आखों में पहुंचती है, जिससे चंद्रमा लाल नजर आता है. जवाहर तारा मंडल की पूर्व वैज्ञानिक सुरूर फातिमा की मानें, तो इस महीने कई ग्रह चंद्रमा के करीब दिखाई देने वाला है. ऐसे में खगोलीय घटना के लिहाज से सितंबर काफी खास है.

सितंबर के महीने में कई उल्का बौछारें भी होने की संभावना है, जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में इप्सिलोन उल्का वर्षा कहते हैं. बता दें कि 'सितंबर इप्सिलोन पर्सिड्स' एक वार्षिक खगोलीय घटना है, जो 9 सितंबर से लेकर 10 सितंबर तक देखने को मिलेगी. यह एक हल्की उल्का वर्षा (उल्कापात) है. इस दौरान आसमान में टूटते हुए तारे नजर आते हैं.
कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि ये उल्कापिंड करीब 64 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेंगे. अगर उस वक्त आसामान साफ रहता है, तो देर रात इन्हें देखा दा सकेगा. इसके अलावा 27 सितंबर को डे टाइम सेक्सटैटिड्स होगा लेकिन दिन में होने के कारण इसे देखना संभव नहीं है.