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हिंसा से यूरोप में हाहाकार, बैकफुट पर सरकार: फ्रांस में पेट्रोल बम से पुलिसकर्मी को जलाने पर एक्शन; जर्मनी-पोलैंड में कोहराम

फ्रांस से लेकर जर्मनी तक यूरोपीय संघ के कई देश इस समय हिंसा से गुजर रहे हैं. महंगाई और कई सरकारी नीतियों के खिलाफ लोगों ने पहले प्रदर्शन किया, जो अब हिंसा का रूप ले चुका है. सबसे बुरी स्थिति फ्रांस की है. जहां पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प देखने को मिली.

Written By abhinav tripathi
Published: Nov 02, 2026, 11:47 AM IST | Updated: Nov 02, 2026, 12:52 PM IST
Image Credit: हिंसा की आग में जल रहा यूरोप. (फोटो- एआई)
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Protests In Europe: यूरोप के अधिकांश देश इस समय भारी हिंसा की मार झेल रहे हैं. बढ़ती महंगाई, सरकारी नीतियों और बेरोजगारी जैसे अहम मुद्दों को लेकर यूरोप के कई देशों में हिंसा जारी है. आकड़ों के मुताबिक, इस साल 19 अक्टूबर तक यूरोप में 22,000 से अधिक विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है. यूरोपीय संघ के अधिकांश देशों में हालात तनावपूर्ण हैं. हालांकि, सबसे खराब स्थिति फ्रांस की है, जहां पर सबसे अधिक प्रदर्शन देखने को मिला.

दरअसल, यूरोपीय संघ से जुड़े अधिकांश देशों में बेरोजगारी, शिक्षा, बढ़ते मकान के किराए और बढ़ती फीस के खिलाफ प्रदर्शन जारी है. सबसे बुरी स्थिति फ्रांस की है, जहां पर इस साल लगभग 7,300 प्रदर्शन हुए. सबसे खास बात है कि यूरोपीय संघ की कुल आबादी में फ्रांस की हिस्सेदारी केवल 15 फीसदी है, लेकिन यूरोप में हुए हिंसक प्रदर्शनों में से 66 प्रतिशत अकेले फ्रांस में हुए.

बुरे दौर से गुजर रहा फ्रांस

रिपोर्ट्स के अनुसार, फ्रांस की अर्थव्यवस्था भी संघर्ष कर रही है. इस साल फ्रांस की आर्थिक विकास दर केवल 0.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है. सामान्य स्थिति में औसतन यह 1.4 प्रतिशत रहती है. बताया जाता है कि बढ़ते सरकारी कर्ज और खर्चों के कारण सरकार जनता की मांगे पूरी नहीं कर रही है. फ्रांस के बाद सबसे अधिक प्रदर्शन ग्रीस में देखने को मिला है.

प्रदर्शनकारियों के पेट्रोल बम से पुलिसकर्मी झुलसा

हिंसात्मक प्रदर्शन के बीच फ्रांस से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने लोगों को डरा दिया. गत शनिवार को प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर पेट्रोल बम से हमला किया. इस हमले में एक पुलिसकर्मी के पैर में आग लग गई. पुलिस के पांव और शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर चोट लगी है. इस घटना की तस्वीरें भी सामने आई है, जो वास्तव में डरा देने वाली हैं.

इस घटना को लेकर फ्रांस के गृहमंत्री लॉरेंट नुनेज ने कहा कि यह पुलिसकर्मी की हत्या की कोशिश है. इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है. पीड़ित पुलिसकर्मी का कहना है कि यह कोई आम पेट्रोल बम नहीं था. यह एक खतरनाक और आधुनिक बम था, जिसमें जलाने की क्षमता काफी अधिक थी. घटना का वीडियो सामने आने के बाद भी अभी तक हमलावर की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है. इस प्रकरण में हत्या की कोशिश का मामला दर्ज कर लिया गया है. 

पुलिस ने लिया एक्शन

इस घटना के बाद तनाव काफी बढ़ गया. फ्रांस की राजधानी में हुई इस वारदात के बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें कई प्रदर्शनकारियों को चोटें आई हैं. फ्रांस के 'येलो वेस्ट' नाम के संगठन ने कहा कि पुलिस के हथगोलों (ग्रेनेड) से दर्जनों प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं. बता दें कि अक्टूबर की शुरुआत में छात्र प्रदर्शनों के दौरान एक 15 साल के लड़के का हाथ पुलिस के ग्रेनेड से उड़ गया. बताया जा रहा है कि अकेले शनिवार को हुए प्रदर्शनों में पुलिस ने 770 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है.

अक्टूबर में प्रदर्शन की आग में जला फ्रांस

फ्रांस के अलग-अलग शहरों में अक्टूबर की शुरुआत से प्रदर्शन देखने को मिला. सरकार विरोधी इस प्रदर्शन में छात्र और कर्मचारी दोनों शामिल हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, हालिया प्रदर्शनों में 3.2 लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया. इससे पहले 17 अक्टूबर को 5.4 लाख और 24 अक्टूबर को 4 लाख लोग सड़क पर नजर आए. फ्रांस में प्रदर्शन की शुरुआत छात्रों ने की थी. वे विद्यालयों की खराब स्थिति, शिक्षकों की कमी और खराब सुविधाओं से नाराज थे.

जर्मनी में भी बिगड़े हालात

हिंसा की आग जर्मनी तक फैल गई है. यहां भी हालात ठीक नहीं हैं. जर्मनी में 'जेन जेड रेजिस्ट' नाम के संगठन के आह्वान पर 34 शहरों में एक लाख से अधिक युवा सड़क पर उतरे और शिक्षा, स्वास्थ्य, घर और पर्यावरण सुरक्षा में सुधार को लेकर प्रदर्शन करने लगे. विरोध प्रदर्शनों के दौरान बर्लिन और फ्रैंकफर्ट जैसे शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी देखने को मिलीं. प्रदर्शन कर रहे लोगों ने दुकानों में तोड़फोड़ की और आगजनी भी की.

यूरोप के अन्य देशों में हिंसा की आग

केवल फ्रांस और जर्मनी ही नहीं, बल्कि यूरोप के अन्य कई देशों में भी हालात काफी खराब हैं. हालांकि, सबसे खास बात है कि इस साल कुल प्रदर्शनों की संख्या पिछले 5 साल के औसत से 7 प्रतिशत कम है. जानकार मानते हैं कि भले ही यूरोप के अलग-अलग देशों में विरोध प्रदर्शन की संख्या कम हो, लेकिन हिंसक प्रदर्शन पिछले पांच सालों के मुकाबले तीन गुना बढ़े हैं.

नवंबर में भी प्रदर्शन का अंत नहीं

गौर करने वाली बात है कि यूरोपीय संघ के अधिकांश देशों में जारी प्रदर्शन के खत्म होने की संभावना नजर नहीं आ रही है. माना जा रहा है कि आने वाले समय में यूरोप में और भी अधिक प्रदर्शन होने की उम्मीद है. चूंकि, फ्रांस में कुछ समय बाद राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहे हैं, जिससे राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है.

माना जा रहा है कि जर्मनी में 2 से 6 नवंबर के बीच कई शहरों में प्रदर्शन हो सकते हैं. वहां पर ट्रेड यूनियनों ने 14 नवंबर और युवाओं ने 20 नवंबर को प्रदर्शन बुलाया है. उधर, स्पेन में 11 नवंबर को और ब्रिटेन में 20 नवंबर को महंगाई के खिलाफ बड़ी हड़ताल की तैयारी चल रही है. 

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About the Author

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
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