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9/11 हमले को 25 साल बरस हो चुके हैं लेकिन उस हमले से उठने वाली धूल आज भी लोगों को प्रभावित कर रही है. कहा जा रहा है कि 11 सितंबर 2001 को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले के बाद उठने वाली धूल आज भी लोगों के कैंसर की वजह बनी हुई है. कैंसर के अलावा भी हजारों लोग अलग-अलग बीमारियों का शिकार हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक इस हमले से जुड़े कैंसर के प्रमाणित मामलों में सिर्फ दो साल में 75 फीसदी का इजाफा हुआ है.
11 सितंबर 2001 को जब अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेट सेंटर के दोनों टॉवरों को जब आतंकियों ने निशाना बनाया तो, करोड़ों टन निर्माण सामग्री धूल/मलबे में कनवर्ट में हो गई. यह धूल और मलबा इतना ज्यादा था कि लोअर मैनहट्टन के एक बड़े हिस्से को अपने चपेट में ले लिया था. यह धूल कोई आम धूल नहीं थी, इसमें एस्बेस्टस, बेंजीन, भारी धातुएं, कांच और सीमेंट समेत बड़ी तादाद में खतरनाक पदार्थ भी थे. Northwell Health के मुताबिक, इस जहरीले मिश्रण में करीब 150 तरह के रसायन मौजूद थे. जो इंसानों के लिए बहुत खतरनाक साबित हो रहे हैं. Northwell Health के आंकड़ों ने यह चिंता तब और बढ़ा दी है. क्योंकि आज भी इस हमले वाली जगह के आसपास रहने वाले लोगों के इलाज और स्वास्थ्य निगरानी की जाती है.
बिजनेस वायर ने नॉर्थवेल वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हेल्थ कार्यक्रम की डायरेक्टर डॉ. जैकलिन मोलिन ने कहा,'उस समय लाखों लोग बीमारी के खतरे में थे और आज भी खतरे में हैं. शुरुआत में हमें सांस से जुड़ी संबंधी देखने को मिलीं, लेकिन अब हमारे मरीजों में कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं.' उन्होंने आगे बताया,'कैंसर के 57000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं और दुर्लभ कैंसर समेत कैंसर के मरीजों की तादाद बढ़ रही है.
अमेरिकी CDC के World Trade Center Health Program के आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च 2024 तक 35955 जिंदा लोगों के पास कम से कम एक कैंसर सर्टिफिकेशन था. इसके अलावा 2925 मृत सदस्यों के पास भी कैंसर सर्टिफिकेशन दर्ज थी. यानी उस तारीख तक कुल 38880 सदस्यों के पास कैंसर सर्टिफिकेशन थी. हालांकि CDC साफ करता है कि एक व्यक्ति के पास एक से ज्यादा स्वास्थ्य संबंधी सर्टिफिकेशन हो सकती हैं. इसलिए इन आंकड़ों को सीधे-सीधे अलग-अलग कैंसर मरीजों की संख्या नहीं माना जाना चाहिए.
रिपोर्ट में बताया गया कि इन मरीजों में अलग-अलग तरह के कैंसर मिले हैं, लेकिन प्रोस्टेट और स्किन का कैंसर की तादाद ज्यादा है. इसके बाद ब्रेस्ट और यूरिनरी ट्रैक्ट से जुड़े कैंसर के मरीजों की तादाद अधिक है. डॉक्टरों ने लंग के कैंसर को लेकर भी चिंता जाहिर की है. क्योंकि नॉर्थवेल के अंदर पिछले 5 वर्षों में लंग के कैंसर वाले मरीजों तादाद दोगुना हो चुकी है.
अगर आपके जेहन में यह सवाल आ रहा है कि मरीजों के अंदर मौजूद बीमारी सामने आने में ढाई दहाई क्यों लग गईं? तो इसका जवाब है कि कैंसर जैसी बीमारियां जहरीले रसायन या पदार्थ के संपर्क में आने के तुरंत बाद दिखाई नहीं देतीं. इनको खतरनाक रूप लेने में कई साल, यहां तक कि कई दहाई भी लग जाती हैं.
11 सितंबर 2001 की सुबह को 19 आतंकवादियों ने 4 यात्री विमानों को अमेरिका के अलग-अलग हवाई अड्डों से हाईजैक कर लिया था. इन्हीं में से दो विमान न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के Twin Tower से टकराए थे. इसके अलावा तीसरा विमान अमेरिका के रक्षा मंत्रालय पेंटागन पर गिराया गया था. जबकि चौथा विमान पेनसिलवेनिया में हादसे का शिकार हो गया था. इन हमलों में तकरीबन 3000 लोगों की मौत हुई थी.

कहा जाता है कि अमेरिका के 9/11 हमले की जिम्मेदारी अल-कायदा ने ली थी. उस समय इस आतंकी संगठन का चीफ ओसामा बिन लादेन था. जिसे तालिबान ने पनाह दे रखी थी. ऐसे में अमेरिका ने बदलने की कार्रवाई करते हुए अफगानिस्तान पर हमले किए और तालिबान से कहा कि वो ओसामा को उसके हवाले कर दे. हालांकि तालिबान ने ऐसा नहीं किया. इसके बाद अमेरिका ने 'War on Terror' का आगाज किया और दुनियाभर में कई आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ ऑपरेशन चलाकर उन्हें नाकारा करने की कोशिश की.
अमेरिका की यह मुहिम वर्षों तक चलती रही और इसी के तहत 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन को अमेरिका ने मार गिराया. जिस समय अमेरिका में हमला हुआ था, तब जॉर्ज डब्ल्यू. बुश राष्ट्रपति थे. जबकि 2011 में जब लादेन को मौत के घाट उतारा तो, बराक ओबामा राष्ट्रपति के पद थे. ओसामा बिन लादेन को अमेरिका ने किस तरह मारा, इसको लेकर Netflix पर 'American Manhunt: Osama bin Laden' भी मौजूद है. इसमें दिखाया गया है कि ओसामा बिन लादेन किस तरह पाकिस्तान में अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था. नेटफ्लिक्स की यह सीरीज 3 एपिसोड वाली डॉक्युमेंट्री है जो 2025 में आई थी. इसके अलावा Zero Dark Thirty नाम की फिल्म भी इसी कहानी पर आधारित है. जो 2012 में आई थी.