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Who was Surendra Koli: निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की लाश हरिद्वार में उसकी चाय की दुकान पर मिली है. माना जा रहा है कि सुरेंद्र कोली ने सुसाइड कर लिया. निठारी कांड में बरी होने के बाद सुरेंद्र कोली हरिद्वार में अकेले रह रहा था. चार दिन पहले ही सुरेंद्र ने एक चाय की दुकान खोली थी. अब उसी चाय की दुकान पर उनकी लाश मिली है. स्थानीय लोग कई सवाल खड़े कर रहे हैं.
चार दिन पहले ही खोली थी दुकान
हरिद्वार के सप्त सरोवर रोड पर चाय की दुकान चलाने वाले सुरेंद्र कोली के बारे में पड़ोसियों ने कई अहम बातें बताईं. बताया जा रहा है कि कोली पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में अकेला रह रहा था और करीब चार दिन पहले ही सड़क किनारे दुकान किराये पर लेकर चाय बेचने का काम शुरू किया था. दुकान के लिए उसने संचालक को कुछ महीनों का किराया एडवांस भी दिया था.
एडवांस रकम फंसने को लेकर था परेशान
स्थानीय लोगों के मुताबिक, क्षेत्र में कुंभ की तैयारियों को लेकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही है. इसी बीच दुकान हटने और एडवांस रकम फंसने को लेकर वह परेशान था. हालांकि, दुकान हटने की चिंता को मौत की वजह मानना फिलहाल पड़ोसियों का अनुमान है, पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है. पुलिस आत्महत्या के कारणों समेत पूरे मामले की हर पहलू से जांच कर रही है.
कौन था सुरेंद्र कोली?
सुरेंद्र कोली उत्तराखंड के अल्मोड़ा के पास एक गांव का रहने वाला था. गांव में वह बकरियों की देखरेख का काम करता था. साल 2000 में दिल्ली के रहने वाले एक ब्रिगेडियर ने सुरेंद्र कोली को लेकर दिल्ली आया था. तीन साल बाद ही बिग्रेडियर को दिल्ली छोड़कर जाना पड़ा. इसी बीच सुरेंद्र कोली की मुलाकात मोनिंदर सिंह पंधेर से हुई. मोनिंदर सिंह पंधेर कारोबारी था, वह नोएडा के सेक्टर 31 से सटे निठारी गांव में रहता था. मोनिंदर सुरेंद्र कोली को निठारी गांव में ही अपने साथ रख लिया.
निठारी कांड का मुख्य आरोपी था
सुरेंद्र कोली उसके घर की देखरेख करने लगा. इसी बीच साल 2005 में निठारी गांव से बच्चे और महिलाओं के गायब होने की शिकायतें मिलने लगीं. सुरेंद्र कोली पर आरोप लगा कि वह मासूम बच्चे और महिलाओं को बहाने से बुलाकर यौन शोषण करता था. उसके बाद हत्या कर शव को नाले में फेंक देता था. निठारी कांड में कुल 19 एफआईआर दर्ज की गईं. 3 दिसंबर 2006 को नाले की सफाई के दौरान मानव अवशेष मिले. इसमें बच्चों की खोपड़ियां थीं. पुलिस ने सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह को मुख्य आरोपी बनाया. साल 2007 में जांच सीबीआई को सौंपी गईं. सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की.
निठारी कांड में कब क्या हुआ?
मामले में 13 फरवरी 2009 को गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट ने सुरेंद्र कोली और मोनिंदर को फांसी की सजा सुनाई. इसके बाद 11 सितंबर 2009 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मौत की सजा से बरी कर दिया. 9 सितंबर 2014 को सुरेंद्र कोली को मेरठ जेल में फांसी दी जानी थी. इससे ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने फांसी टाल दी थी. 24 जुलाई 2017 को सीबीआई कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को दोषी ठहराया. 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सबूत के अभाव में सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया था. बरी होने के बाद सुरेंद्र कोली हरिद्वार आकर रहने लगा था.