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Dehradun News: उत्तराखंड में नर्सिंग विद्यार्थियों को स्टाइपेंड देने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है. रविवार को नर्सिंग एकता मंच के बैनर तले प्रदेशभर के नर्सिंग अभ्यर्थियों ने स्वास्थ्य मंत्री के आवास की ओर कूच किया. अभ्यर्थियों ने प्रशिक्षण के दौरान स्टाइपेंड दिए जाने की मांग उठाते हुए सरकार से जल्द ठोस निर्णय लेने की अपील की. नर्सिंग एकता मंच का कहना है कि नर्सिंग विद्यार्थी स्वास्थ्य सेवाओं का अहम हिस्सा हैं. ऐसे में प्रशिक्षण के दौरान उन्हें आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए.
सरकार को दी चेतावनी
देहरादून में रविवार को नर्सिंग अभ्यर्थियों ने स्टाइपेंड की मांग को लेकर आवाज बुलंद की. नर्सिंग एकता मंच के नेतृत्व में प्रदेशभर के अभ्यर्थियों ने स्वास्थ्य मंत्री के आवास की ओर कूच किया. इस दौरान नर्सिंग विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के दौरान स्टाइपेंड दिए जाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई. मंच के सदस्यों का कहना है कि नर्सिंग विद्यार्थी स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. प्रशिक्षण के दौरान उन्हें आर्थिक सहायता मिलना जरूरी है. अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की कि उनके हितों को ध्यान में रखते हुए स्टाइपेंड को लेकर जल्द ठोस निर्णय लिया जाए. नर्सिंग एकता मंच ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों की मांग पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए, ताकि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें आर्थिक राहत मिल सके.
करोड़ों रुपये से बना बेस अस्पताल
उत्तराखंड के चमोली जिले के सिमली में करोड़ों रुपये की लागत से बना बेस अस्पताल का संचालन नहीं होने से स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है. बेस अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती और पर्याप्त चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता नहीं होने के कारण लोगों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है. लंबे समय से अस्पताल को पूर्ण बेस अस्पताल के रूप में संचालित करने की मांग कर रही जनता का सब्र अब जवाब देने लगा है. इसी के चलते बेस अस्पताल संघर्ष समिति सिमली के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों ने अपनी मांगों को लेकर सिमली से देहरादून तक पैदल कूच शुरू कर दिया है.
बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की मांग
सिमली में मां चंडिका की भूमि से आज बेस अस्पताल को पूर्ण बेस अस्पताल बनाने की मांग को लेकर एक विशाल पैदल यात्रा देहरादून के लिए निकल चुकी है. इस पैदल यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और क्षेत्रीय लोग शामिल हैं. मातृशक्ति की भारी भागीदारी ने आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन प्रदान किया है. आंदोलनकारियों का कहना है कि जब क्षेत्र में करोड़ों रुपये खर्च कर अस्पताल का निर्माण किया गया है, तो उसमें विशेषज्ञ डॉक्टरों, आवश्यक चिकित्सा मशीनों और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें.