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Valley of Flowers: यदि आप प्रकृति प्रेमी हैं और मानसून में किसी जादुई जगह की सैर करना चाहते हैं, तो उत्तराखंड की 'वैली ऑफ फ्लावर्स' आपके लिए सबसे बेहतरीन विकल्प है. समुद्र तल से लगभग 12,000 फीट (3,600 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित यह घाटी सर्दियों में बर्फ की चादर से ढकी रहती है, लेकिन मानसून आते ही यह अनगिनत रंगों के फूलों से सज जाती है. चमोली जिले में नंदा देवी नेशनल पार्क के पास स्थित यह घाटी 87.5 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैली हुई है.
घाटी की खोज की दिलचस्प कहानी
इस बेहद खूबसूरत घाटी को दुनिया के सामने लाने का श्रेय ब्रिटिश पर्वतारोही और वनस्पति शास्त्री फ्रैंक सिडनी स्माइथ को जाता है. वर्ष 1931 में एक अभियान से लौटते समय वे रास्ता भटक गए थे और अचानक इस खूबसूरत घाटी में पहुंच गए. इसके बाद 1937 में वे यहां दोबारा आए और कुछ समय बिताने के बाद उन्होंने 'वैली ऑफ फ्लावर्स' नाम से एक किताब भी लिखी, जिसने इस घाटी को दुनियाभर में मशहूर कर दिया.
रंग बदलने वाली जादुई घाटी
यह घाटी अपनी एक खास खासियत के लिए जानी जाती है. यहां खिले फूलों का रंग हर 15 दिनों में बदल जाता है. इसी अद्भुत नजारे के कारण इसे 'जादुई घाटी' भी कहा जाता है. यहां 500 से भी अधिक प्रजातियों के रंग-बिरंगे फूल पाए जाते हैं, जिनमें कई दुर्लभ और विदेशी प्रजातियां भी शामिल हैं.इसकी अलौकिक सुंदरता और जैव विविधता के कारण इसे यूनेस्को (UNESCO) द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है.
कब और कैसे जाएं?
यह घाटी साल में केवल 4 महीने के लिए खुलती है. आमतौर पर 1 जून से इसे पर्यटकों के लिए खोला जाता है और अक्टूबर के अंत तक यह खुली रहती है.
यात्रा का रास्ता: सबसे पहले हरिद्वार या ऋषिकेश पहुंचे. वहां से सड़क मार्ग द्वारा जोशीमठ और फिर गोविंदघाट जाएं.
ट्रेक की शुरुआत: गोविंदघाट से 3 किमी दूर पुलना गांव पहुंचे. इसके बाद पुलना से लगभग 11 किलोमीटर का पैदल ट्रेक करके घांघरिया पहुंचना होता है.
अंतिम पड़ाव: घांघरिया से 4 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई तय करके आप फूलों की घाटी पहुंच सकते हैं.
पर्यटकों के लिए जरूरी बातें
एंट्री फीस: घाटी में प्रवेश के लिए भारतीय पर्यटकों को 150 रुपये और विदेशी पर्यटकों को 600 रुपये की फीस देनी होती है.
रजिस्ट्रेशन: यहां जाने के लिए पहले से रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है.
खाने-पीने की व्यवस्था: घाटी के मुख्य हिस्से में कोई दुकान या रेस्तरां नहीं है. इसलिए ट्रेक पर जाते समय अपने साथ पानी और हल्का खाने-पीने का सामान जरूर ले जाएं.
अगर आप एडवेंचर और कुदरत की खूबसूरती को एक साथ महसूस करना चाहते हैं, तो इस मानसून फूलों की घाटी की यात्रा आपकी जिंदगी का एक यादगार अनुभव बन सकती है.