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Nainital tourism: उत्तराखंड अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, बर्फ से ढकी चोटियों और आध्यात्मिक शांति के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. इसे 'देवभूमि' कहा जाता है क्योंकि यहां हर कोने में ईश्वर का वास महसूस होता है. मंदिरों के दर्शन के साथ-साथ लोग यहां के शांत वातावरण और खूबसूरत पहाड़ियों में वक्त बिताने आते हैं. उत्तराखंड का सबसे प्रमुख और लोकप्रिय पर्यटन स्थल नैनीताल है.समुद्र तल से लगभग दो हजार मीटर की ऊंचाई पर बसा यह शहर हर साल लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। घने जंगलों, ठंडी हवाओं और खूबसूरत वादियों के बीच बसा नैनीताल हर किसी का मन मोह लेता है.
नैनीताल की खोज की रोचक कहानी
आज जिस नैनीताल में हर तरफ चहल-पहल दिखती है, कभी वह एक शांत और अनजान घाटी हुआ करता था. इस खूबसूरत जगह को दुनिया के नक्शे पर लाने का श्रेय पीटर बैरन नाम के एक अंग्रेज व्यापारी को जाता है. वे पहली बार साल 1839 में इस इलाके में आए थे और यहां की कुदरती खूबसूरती से बेहद प्रभावित हुए. इसके बाद वे साल 1841 में दोबारा यहां लौटे और इस जगह को एक पहाड़ी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की नींव रखी. बैरन ने अपनी प्रसिद्ध किताब 'वांडरिंग इन द हिमाला' में नैनीताल के अद्भुत सौंदर्य का विस्तार से वर्णन किया था. उनकी इस यात्रा के बाद धीरे-धीरे यह जगह अंग्रेजों की पसंदीदा पसंद बन गई और लोग यहां बसने लगे.
नाम के पीछे जुड़ी पौराणिक कथा
नैनीताल का नाम यहां की प्रसिद्ध 'नैना झील' के नाम पर पड़ा है. 'नैनी' का अर्थ आंख और 'ताल' का अर्थ झील होता है. अगर ध्यान से देखा जाए तो इस झील की बनावट भी बिल्कुल इंसान की आंख के आकार जैसी दिखाई देती है. झील के उत्तरी किनारे पर मां नैना देवी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है, जो देश के 64 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान शिव देवी सती के पार्थिव शरीर को लेकर आकाश मार्ग से जा रहे थे, तब इस स्थान पर देवी सती की बाईं आंख गिरी थी. इसी पावन घटना के कारण इस स्थान का नाम नैनीताल पड़ा और यह एक पवित्र धार्मिक केंद्र बन गया.
प्राचीन इतिहास और त्रि-ऋषि-सरोवर
नैनीताल का उल्लेख प्राचीन हिंदू ग्रंथों जैसे 'मानस खंड' में भी मिलता है. ग्रंथों में इस स्थान को 'त्रि-ऋषि-सरोवर' के नाम से पुकारा गया है. ऐसी कथा है कि प्राचीन काल में तीन महान संत अत्रि, पुलस्त्य और पुलह यहां तपस्या करने आए थे. जब उन्हें प्यास लगी और आसपास पानी का कोई स्रोत नहीं मिला, तो उन्होंने अपने तपोबल से एक बड़ा गड्ढा खोदा और उसमें मानसरोवर झील का पवित्र जल लाकर भर दिया. माना जाता है कि वही पवित्र जल आज की नैनी झील के रूप में मौजूद है, इसलिए इस पानी को बहुत पवित्र माना जाता है.
झीलों का शहर और सात सुंदर पहाड़ियां
नैनीताल को 'सिटी ऑफ लेक्स' यानी झीलों का शहर कहा जाता है, क्योंकि इस पूरे क्षेत्र में कई छोटी-बड़ी और बेहद सुंदर झीलें मौजूद हैं. इनमें नैनी झील, भीमताल, नौकुचियाताल, सात ताल, खुरपाताल, गरुड़ताल और सरियाताल प्रमुख हैं। यह पूरा शहर सात ऊंची और हरी-भरी पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जो इसे हवा के तेज झोंकों से बचाती हैं और एक सुरम्य घाटी का रूप देती हैं. शांत पानी में नाव चलाना और पहाड़ियों के बीच से ढलते सूरज को देखना यहां आने वाले हर पर्यटक के लिए एक कभी न भूलने वाला अनुभव बन जाता है.