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Nainital News/ विनोद कांडपाल: कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी (DSB) परिसर में छात्रसंघ चुनाव के नतीजे सिर्फ एक राजनीतिक हार-जीत का आंकड़ा नहीं हैं, बल्कि यह एक मां के अटूट विश्वास और अनोखे 'मास्टरस्ट्रोक' की इमोशनल कहानी भी बयां करते हैं. डीएसबी छात्रसंघ चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी भानु प्रताप चौहान ने अध्यक्ष पद पर परचम लहराते हुए शानदार जीत दर्ज की है, लेकिन कैंपस से लेकर पूरे नैनीताल में इस जीत से ज्यादा चर्चा उस मां की हो रही है. जिसने अपने बेटे को अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाने के लिए खुद कॉलेज में दाखिला ले लिया और चुनावी मैदान में ढाल बनकर खड़ी रहीं.
बेटे की जीत के लिए बनीं छात्रा
भानु प्रताप की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे उनकी मां बीना चौहान का सबसे बड़ा योगदान माना जा रहा है. बेटे के चुनावी अभियान को मजबूती देने और कैंपस के भीतर उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने के लिए बीना चौहान ने इस साल खुद डीएसबी परिसर के पॉलिटिकल साइंस विभाग में एडमिशन लिया. इसके बाद वे महज एक अभिभावक बनकर नहीं रहीं, बल्कि एक सहपाठी और मजबूत चुनावी रणनीतिकार की तरह वोट मांगती और रणनीतियां बनाती नजर आईं.
पार्षद मां के राजनीतिक अनुभव का मिला फायदा
आपको बता दें कि बीना चौहान सिर्फ एक भावुक मां नहीं हैं, बल्कि उनका अपना एक मजबूत राजनीतिक जनाधार भी है. वह हल्द्वानी-काठगोदाम नगर निगम के वार्ड नंबर 10 (नवाबी रोड-मल्ला गोरखपुर) से मौजूदा पार्षद हैं. उन्होंने अपने इसी राजनीतिक अनुभव और जमीनी रणनीति का पूरा फायदा अपने बेटे के चुनाव में लगाया. समर्थन जुटाने से लेकर छात्र-छात्राओं के बीच पैठ बनाने तक, मां-बेटे की इस जोड़ी ने विरोधियों के पसीने छुड़ा दिए.
एबीवीपी के शुभम कुमार को 482 वोटों से हराया
चुनावी नतीजों की बात करें तो निर्दलीय उम्मीदवार भानु प्रताप चौहान को कुल 1,355 वोट हासिल हुए. वहीं उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के प्रत्याशी शुभम कुमार को 873 वोट मिले. भानु प्रताप ने शुभम को भारी-भरकम 482 वोटों के अंतर से शिकस्त देकर निर्दलीय के तौर पर अपना दबदबा कायम किया. जीत का ऐलान होते ही समर्थकों ने मां-बेटे की इस जोड़ी को कंधों पर उठा लिया और नारेबाजी करते हुए जश्न मनाया.
बेटे की जीत पर मां ने कहा कि बेटे ने भी पार्षद के चुनाव में दिन रात मेहनत की थी. अब उन्होंने बेटे को अध्यक्ष बनाने के लिए कड़ी मेहनत की.
मां-बेटे की जोड़ी की चर्चा
छात्र राजनीति के इतिहास में डीएसबी परिसर का यह चुनाव लंबे समय तक याद रखा जाएगा. बेटे को जीत का सेहरा पहनाने के लिए एक मां का खुद यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेना और चुनावी रणनीति की कमान संभालना, इस बार के छात्रसंघ चुनाव की सबसे अनोखी और खूबसूरत तस्वीर बन गई है. फिलहाल, नैनीताल की वादियों से लेकर कॉलेज के हर गलियारे में इस 'सुपरमॉम' और उनके नवनिर्वाचित अध्यक्ष बेटे की जोड़ी की चर्चा ही हर जुबां पर छाई हुई है.