BKTC कर्मचारियों का आंदोलन तेज: आर-पार की लड़ाई के मूड में कर्मचारी, विश्राम गृहों और स्कूलों में तालाबंदी का ऐलान
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अस्थायी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर क्रमिक अनशन पर बैठे हैं. 20 अक्टूबर से अनशन की अवधि बढ़ाने की चेतावनी दी है.
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अस्थायी कर्मचारियों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों का अपनी मांगों को लेकर क्रमिक अनशन 7वें दिन भी जारी रहा. सरकार और शासन स्तर पर ठोस निर्णय नहीं होने से कर्मचारियों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है. कर्मचारियों ने आंदोलन को और तेज करने का ऐलान करते हुए 20 अक्टूबर से अनशन की अवधि दो घंटे से बढ़ाकर पांच घंटे करने तथा 26 अक्टूबर से समिति के अधीन सभी विश्राम गृहों और विद्यालयों में तालाबंदी की चेतावनी दी है.
मांगों को लेकर आंदोलन को मजबूर बीकेटीसी के अस्थायी कर्मचारी
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में वन टाइम सेटलमेंट, समान कार्य-समान वेतन और मुख्यमंत्री घोषणा संख्या 426/2024 का शीघ्र क्रियान्वयन शामिल है. कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले 20 से 30 वर्षों से मंदिर समिति में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनके भविष्य और सेवा संबंधी मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया. लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद समाधान नहीं होने से कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है.
सांकेतिक कार्य बहिष्कार करेंगे
संयुक्त कर्मचारी संघ ने आंदोलन की अगली रणनीति स्पष्ट कर दी है. मंगलवार यानी 20 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक कर्मचारी प्रतिदिन सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक सांकेतिक कार्य बहिष्कार और अनशन करेंगे. अब तक दो घंटे चल रहा अनशन बढ़ाकर पांच घंटे किया जाएगा.
विश्राम गृहों और स्कूलों में लगाएंगे ताला
कर्मचारियों ने पहले 19 अक्टूबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी थी. हालांकि, दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक अनुष्ठानों को प्रभावित होने से बचाने के लिए संघ ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है, लेकिन कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि इसे उनकी कमजोरी न समझा जाए. यदि इस अवधि में उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो 26 अक्टूबर से BKTC के सभी विश्राम गृहों और विद्यालयों में तालाबंदी कर आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा.
कल से बढ़ जाएगी अनशन की अवधि
अनशनकारी कर्मचारी डॉ. अमित बन्दोलिया और राकेश झिकवाण ने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से मंदिर समिति को अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इसके बावजूद उनकी जायज मांगों का समाधान नहीं हो रहा है. उन्होंने कहा कि मंगलवार से अनशन की अवधि दो घंटे से बढ़ाकर पांच घंटे की जा रही है. इसके बाद भी यदि सरकार और शासन की ओर से सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो 26 अक्टूबर से समिति के सभी विश्राम गृहों और विद्यालयों में तालाबंदी की जाएगी और विशाल आंदोलन शुरू किया जाएगा.
अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे
कर्मचारियों ने कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं. उनकी मांग किसी विशेष लाभ की नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा के अनुरूप न्याय, उचित वेतन और भविष्य की सुरक्षा की है. आंदोलनरत कर्मचारियों ने सनातन धर्म और राजधर्म की मर्यादा का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों और उनके आश्रितों के हितों की रक्षा करना शासन की जिम्मेदारी है. उनका कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो उन्हें आंदोलन और तेज करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.
इनका मिला समर्थन
सातवें दिन के अनशन को बदरीनाथ के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चन्द्र उनियाल, BKTC के पूर्व सदस्य भास्कर डिमरी, मुखिया महाप्रभु बैठक बृजेश पंचभैया, बदरीनाथ के तीर्थपुरोहित अजय बिजल्वाण, बर्फानी बाबा अमृतानंद महाराज सहित कई लोगों ने समर्थन दिया.
(उत्तराखंड चमोली से पुष्कर चौधरी की रिपोर्ट)
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