बद्रीनाथ धाम पर हिमस्खलन का खतरा! करीब 400 इमारतों पर मंडराया संकट, स्टडी में बड़ा खुलासा
"बद्रीनाथ धाम पर एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है। एक नई वैज्ञानिक स्टडी ने चेतावनी दी है कि धाम के ऊपर लटके तीन ग्लेशियरों से हिमस्खलन हो सकता है, जिसकी चपेट में करीब 400 इमारतें आ सकती हैं।"
उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम के ऊपर मंडरा रहे तीन लटकते ग्लेशियरों ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है. एक ताजा रिसर्च में कहा गया है कि अगर इन ग्लेशियरों से बड़ी मात्रा में बर्फ खिसकती है तो नीचे बसे बद्रीनाथ कस्बे में भारी तबाही हो सकती है. करीब 400 इमारतें, सड़कें, पुल और हेलीपैड तक इसकी चपेट में आ सकते हैं. हालांकि रिसर्च टीम ने साफ किया है कि ये किसी तरह की तत्काल चेतावनी नहीं है, बल्कि सैटेलाइट तस्वीरों और कंप्यूटर मॉडल के आधार पर बनाया गया एक संभावित खतरे का अनुमान है.
क्या कहती है नई रिसर्च?
ये स्टडी 28 अक्टूबर को Landslides नाम के इंटरनेशनल जर्नल में छपी है. इसका टाइटल है-बद्रीनाथ टाउनशिप में लटकते ग्लेशियरों से हिमस्खलन की आशंका का आकलन_। इस प्रोजेक्ट में IISc बेंगलुरु, DRDO और कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट शामिल थे.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक टीम ने बद्रीनाथ के ऊपर 4700 से 5465 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद तीन हैंगिंग ग्लेशियरों को ट्रैक किया. RAMMS नाम के एडवांस सिमुलेशन सॉफ्टवेयर से ये देखा गया कि बर्फ टूटने पर वो किस रास्ते से नीचे आएगी और कितना नुकसान करेगी.
तीन में से दूसरा ग्लेशियर सबसे खतरनाक
रिपोर्ट के मुताबिक तीनों में से Site-2 सबसे ज्यादा संवेदनशील है. इसमें लगभग 53 लाख क्यूबिक मीटर बर्फ जमी होने का अंदाजा है और इसका ढलान भी सबसे ज्यादा है. सबसे खराब स्थिति का सिमुलेशन बताता है कि अगर यहीं से हिमस्खलन हुआ तो लगभग 398 मकान/होटल/दुकानें3.87 हेक्टेयर खेती की जमीन 15.57 हेक्टेयर जंगल 2.66 KM सड़कें, 2 पुल, 1 हेलीपैड और पार्किंग एरिया प्रभावित हो सकते हैं.
बर्फ की रफ्तार होगी 283 KM/घंटा
मॉडल में बर्फ के नीचे आने की स्पीड 78.5 मीटर प्रति सेकेंड, यानी करीब 283 KM प्रति घंटा तक दिखाई गई है. इतनी तेज रफ्तार में कुछ भी सामने आए तो तबाही तय है.
क्या ग्लेशियर अभी टूटने वाला है?
वैज्ञानिकों ने कहा है कि अभी घबराने जैसी कोई बात नहीं है. ये सिर्फ "क्या होगा अगर" वाली स्टडी है. लेकिन बढ़ता तापमान और लगातार हो रहा निर्माण लटकते ग्लेशियरों को अस्थिर जरूर बना रहा है, इसलिए खतरे को हल्के में नहीं लिया जा सकता.
बचाव के लिए क्या सुझाव दिए गए?
रिसर्चर्स ने सरकार को 4 बड़े सुझाव दिए हैं-खतरे वाले इलाकों का प्रॉपर मैप बनाना, ग्लेशियरों पर सेंसर लगाकर अर्ली वार्निंग सिस्टम शुरू करना, संवेदनशील जोन में नया कंस्ट्रक्शन रोकना और स्थानीय लोगों व यात्रियों को आपदा प्रबंधन की ट्रेनिंग देना।ये स्टडी एक बार फिर याद दिलाती है कि चारधाम विकास के साथ-साथ हिमालय की सुरक्षा पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है.
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