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City of mughal sweets: उत्तर प्रदेश का आगरा शहर केवल मोहब्बत की निशानी 'ताजमहल' के लिए ही नहीं, बल्कि अपने बेमिसाल जायके के लिए भी दुनिया भर में मशहूर है. पेठे की मिठास और आगरा का नाम एक-दूसरे के पर्याय बन चुके हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस पेठे का स्वाद आज आप बड़े चाव से लेते हैं, उसकी जड़ें मुगलिया सल्तनत और ताजमहल के निर्माण से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं? यही वजह है कि आगरा को 'मुगल मिठाई का शहर' भी कहा जाता है. आज इस 'मुगल मिठाई' की मिठास भारत की सरहदों को पार कर विदेशों तक अपनी छाप छोड़ चुकी है.शाही रसोई से ताज के मजदूरों तक: पढ़िए पेठे के जन्म की 2 दिलचस्प कहानियां....
1. 22 हजार मजदूरों की ताकत बना पेठा
ऐसा कहा जाता है कि 17वीं शताब्दी में जब मुगल बादशाह शाहजहां ताजमहल का निर्माण करवा रहे थे, तब भीषण गर्मी और कड़ी मेहनत के कारण 22 हजार मजदूर तेजी से थक जाते थे. शाहजहां ने अपनी शाही रसोई के मुख्य रसोइए (खांसमा) को एक ऐसी मिठाई तैयार करने का फरमान दिया जो पचने में हल्की हो, शरीर को तुरंत ऊर्जा (Energy) दे और लंबे समय तक खराब न हो. इसके बाद मुगलों के बावर्चियों ने पेठे (सफेद कद्दू/ऐश गॉर्ड) और चीनी की चाशनी के मेल से यह अनोखी मिठाई इजाद की.इस मिठाई को वहां काम कर रहे कारीगरों ने खूब पसंद किया गया.
2. बेगम मुमताज की शाही रेसिपी
एक अन्य प्रचलित कहानी के अनुसार, मुमताज महल ने स्वयं अपने हाथों से यह खास मिठाई बनाकर शाहजहां को पेश की थी. शाहजहां को इसका स्वाद इतना पसंद आया कि उन्होंने इसे तुरंत 'शाही मिठाई' का दर्जा देकर मुगलई दस्तरखान का नियमित हिस्सा बना दिया.और यह मिठाई मुगलों की रसोई का हिस्सा बन गई थी.
'सफेद सूखी मिठाई' से लेकर 50+ फ्लेवर्स का आधुनिक सफर
समय के साथ आगरा के पेठा उद्योग ने खुद को आधुनिक रंग-रूप में ढाला है. शुरुआती दौर में केवल पारंपरिक 'अंगूरी पेठा' और 'सूखा पेठा' ही बनाया जाता था. लेकिन आज आगरा के बाजार में 50 से अधिक तरह के पेठे मिलते हैं. अगर इनमें से कुछ खास की बात करें तो, केसर-इलायची पेठा,पान पेठा,चॉकलेट व स्ट्रॉबेरी पेठा,सैंडविच व चेरी पेठा और गुलकंद पेठा प्रमुख हैं.
जीआई टैग (GI Tag) और अंतरराष्ट्रीय पहचान
अपनी इसी अनूठी ऐतिहासिक विरासत और प्रामाणिक स्वाद के कारण 'आगरा का पेठा' (Agra Petha) भौगोलिक संकेत यानी GI Tag हासिल कर चुका है. आज दुबई, अमेरिका, ब्रिटेन और खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय और विदेशी पर्यटक आगरा आगमन पर पेठा ले जाना कभी नहीं भूलते.