वाराणसी 5 करोड़ ठगी कांड: सपा नेता अवधेश पाठक पर कसा शिकंजा, भाइयों ने आरोपों को नकारा; ठोका मानहानि का दावा
Varanasi Audhesh Pathak Fraud Case: वाराणसी में 5 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में ज़ी मीडिया की टीम आरोपी सपा नेता अवधेश पाठक के वाराणसी स्थित घर पहुंची, जहां उनके आरोपी भाई सुरेश और रमेश पाठक मौजूद मिले. दोनों भाइयों ने पुलिस नोटिस की बात स्वीकारते हुए ठगी के सभी आरोपों को फर्जी बताया. जानिए क्या है ये पूरा मामला?
Varanasi Audhesh Pathak Fraud Case/ जयपाल: वाराणसी में 5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और जमीनी हेरफेर के मामले में घिरे समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता अवधेश पाठक और उनके परिवार पर शिकंजा कसता जा रहा है. एक तरफ जहां पुलिस की टीमें आरोपियों की तलाश में वाराणसी से लेकर लखनऊ तक खाक छान रही हैं, वहीं दूसरी तरफ Zee Media की टीम सीधे आरोपी सपा नेता अवधेश पाठक के घर पहुंची.
सपा नेता के वाराणसी के आवास पर जब Zee Media पहुंची, तो वहां का माहौल काफी तनावपूर्ण था. पुलिस की रेड के दावों के बीच आरोपी भाइयों सुरेश पाठक और रमेश पाठक से हुई एक्सक्लूसिव बातचीत ने इस पूरे हाई-प्रोफाइल मामले को एक नया मोड़ दे दिया है.
Zee Media से क्या बोले आरोपी भाई?
पुलिसिया दबिश के बाद घर पर मौजूद मिले दोनों भाइयों सुरेश और रमेश पाठक ने Zee Media के कैमरों के सामने आकर अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि कानपुर पुलिस ने इस 5 करोड़ के कथित घोटाले में उन्हें नोटिस थमाया है, लेकिन आरोपों के नाम पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी. इस मामले को लेकर सुरेश पाठक ने कहा कि हमारे ऊपर लगाए गए 5 करोड़ की ठगी, फर्जी बैनामे समेत सारे आरोप मनगढ़ंत और बेबुनियाद हैं. हम भगोड़े नहीं हैं. अगर पुलिस जांच के लिए आती है, तो हम पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं.
आरोपी अवधेश पाठक के अचानक गायब होने के सवाल पर भाइयों ने सफाई देते हुए कहा कि बड़े भाई पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करने लखनऊ गए हुए हैं. वे पुलिस से भाग नहीं रहे हैं.
आरोपी भाइयों ने दी मानहानि की चेतावनी
इस केस में अब सीधा राजनीतिक तड़का भी लग चुका है. बातचीत के दौरान भाइयों ने आरोप लगाया कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए सत्ता पक्ष के इशारे पर उनके परिवार को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अवधेश पाठक शिवपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के मजबूत दावेदार हैं. इसी वजह से चुनाव से ठीक पहले एक सोची-समझी साजिश के तहत उनकी सामाजिक और राजनीतिक छवि को धूमिल किया जा रहा है.
आरोपी पक्ष ने साफ किया कि वे सिर्फ कानूनी लड़ाई ही नहीं लड़ेंगे, बल्कि इस झूठी एफआईआर और चरित्र हनन के खिलाफ जल्द ही अदालत में मानहानि (Defamation) का मुकदमा भी ठोकेंगे.
क्या है 5 करोड़ की जालसाजी का पूरा खेल?
यह मामला 2013 में पंजीकृत हुई 'एक्सेस इंफ्राविल्ड प्राइवेट लिमिटेड' कंपनी और 3 साल पुराने लेन-देन से जुड़ा है. लखनऊ के फैजुल्लानगर निवासी शैलेंद्र वर्मा ने कानपुर कोतवाली में सपा नेता अवधेश पाठक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था. उनकी कंपनी गंगोत्री फाइनेंशियल एडबाइजरी प्राइवेट लिमिटेड वित्तीय व आर्थिक निवेश की सलाह देने का व्यवसाय करती है. आरोप है कि अवधेश पाठक और उनके भाइयों ने जाली दस्तावेजों के जरिए 30 लाख रुपये का फर्जी बैनामा किया, मारपीट की और कंपनी के करोड़ों रुपये के शेयर व प्लॉट्स हड़प लिए.
जल्द चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी
सपा नेता अवधेश पाठक व उनके दोनों भाई रमेश पाठक और सुरेश पाठक के खिलाफ तीन साल पहले कानपुर के कोतवाली में कोर्ट के आदेश पर धोखाधड़ी समेत अन्य आरोपों में केस दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी. कानपुर और वाराणसी पुलिस की संयुक्त टीम अब इस मामले में जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल करने की होड़ में है. शुक्रवार शाम अदिवा गांव से लेकर लखनऊ के अरुणाचलम अपार्टमेंट तक हुई पुलिसिया हलचल ने यह साफ कर दिया है कि खाकी अब ढील देने के मूड में नहीं है.
अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या सपा नेता अवधेश पाठक पुलिस के सामने खुद को बेगुनाह साबित कर पाते हैं या फिर 5 करोड़ के इस कथित फर्जीवाड़े की आंच शिवपुर विधानसभा के सियासी गणित को भी झुलसा देगी.