सपा-कांग्रेस में जाने की अटकलों पर ब्रेक: अवध के कद्दावर नेता कौशल किशोर माने, जानिए BJP ने कैसे पलटा पासा?
UP Politics: उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने अवध के बड़े पासी नेता और पूर्व सांसद कौशल किशोर की नाराजगी को आखिरकार चुनाव से ठीक पहले दूर कर लिया है. पार्टी ने उनके बेटे विकास किशोर को अनुसूचित जाति मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया है. इसके बाद कौशल किशोर ने अपने बेटे के साथ तस्वीर पोस्ट करके बधाई दी और बीजेपी नेतृत्व का आभार व्यक्त किया.
UP Politics/ विशाल रघुवंशी: उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक समीकरणों यानी 'सोशल इंजीनियरिंग' का हमेशा से बड़ा रोल रहा है. प्रदेश में आगामी चुनावी जंग से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी ने अवध बेल्ट में एक बड़ा राजनीतिक डैमेज कंट्रोल कर लिया है. पिछले काफी समय से पार्टी से असंतुष्ट चल रहे अवध के कद्दावर पासी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर की नाराजगी को बीजेपी नेतृत्व ने आखिरकार दूर कर दिया है.
पार्टी ने कौशल किशोर के बेटे विकास किशोर को भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति (SC) मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया है. इस नई जिम्मेदारी के बाद कौशल किशोर के तेवर पूरी तरह से बदल चुके हैं. उन्होंने अपने बेटे के साथ तस्वीर साझा करते हुए बीजेपी शीर्ष नेतृत्व का आभार जताया है और पार्टी के पक्ष में सोशल मीडिया पर एक्टिव हो गए हैं.
अवध बेल्ट और पासी समाज का सियासी गणित
उत्तर प्रदेश का अवध बेल्ट पारंपरिक रूप से बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है. इसमें लखनऊ, रायबरेली, हरदोई, सीतापुर, उन्नाव और लखीमपुर खीरी जैसे प्रमुख जिले आते हैं. इस इलाके में दलित राजनीति की सबसे अहम धुरी पासी समुदाय है, जो जाटव समाज के बाद प्रदेश में दलित आबादी का दूसरा सबसे बड़ा समूह है.
कौशल किशोर अवध क्षेत्र में पासी समाज के सबसे बड़े और जमीनी चेहरों में गिने जाते हैं. हालांकि, वे पिछला लोकसभा चुनाव हार गए थे, लेकिन 2027 के महासंग्राम से पहले बीजेपी पासी समाज के इतने बड़े नेता को खोने या नाराज करने का जोखिम बिल्कुल नहीं उठा सकती थी.
सपा-कांग्रेस में जाने की अटकलों पर लगा विराम
पिछले कुछ महीनों से कौशल किशोर के रुख को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म था. मलिहाबाद में की गई कौशल किशोर की तरफ से आत्म सम्मान रैली के बाद उनकी नाराजगी और ज्यादा बढ़ गई थी. कुछ महीने पहले मलिहाबाद से विधायक उनकी पत्नी ने मंदिर में भेदभाव की शिकायत भी की थी.
इसके बाद उनकी नाराजगी खुलकर सामने आ गई थी. चर्चाएं यहां तक थीं कि वे सपा या कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं, लेकिन बीजेपी ने समय रहते पासा फेंका और उनके बेटे विकास किशोर को संगठन में बड़ा पद सौंपकर न केवल कौशल किशोर को मनाया, बल्कि अवध में दलित और पासी वोट बैंक में होने वाली संभावित सेंधमारी को भी पूरी तरह से रोक लिया है.
बीजेपी का बड़ा मास्टरस्ट्रोक
चुनावी दहलीज पर खड़ी बीजेपी के लिए कौशल किशोर को साधना एक बड़ी राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है. बेटे को संगठन में जिम्मेदारी देकर बीजेपी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने कोर दलित वोट बैंक में किसी भी तरह की नाराजगी का रिस्क लेने के मूड में नहीं है. अब देखना यह होगा कि यह डैमेज कंट्रोल चुनाव में पार्टी को कितना सियासी फायदा दिला पाता है.