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Explainer: विनोद तावड़े की नई टीम तैयार: यूपी बीजेपी में 4 सह प्रभारी, जानिए किसकी क्या ताकत

Lucknow News: बीजेपी ने यूपी चुनाव को देखते हुए बड़ा फैसला लिया है. विनोद तावड़े को प्रभारी बनाए जाने के बाद चार सह प्रभारी भी नियुक्त कर दिए हैं.

Explainer: विनोद तावड़े की नई टीम तैयार: यूपी बीजेपी में 4 सह प्रभारी, जानिए किसकी क्या ताकत
Image Credit: Vinod Tawde

विशाल सिंह/लखनऊ: यूपी चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने बड़ा फैसला लिया है. बीजेपी यूपी प्रभारी विनोद तावड़े के साथ चार सह प्रभारी भी बनाए गए हैं. जगदीश पटेल के साथ मेधा कुलकर्णी, प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा को यूपी का प्रदेश सह प्रभारी बनाया गया है. चारों सह प्रभारियों को अलग-अलग क्षेत्र में जिम्मेदारी दी जाएगी.

100-100 सीटों की जिम्मेदारी
यूपी में एक सह प्रभारी के पास करीब 100 सीटों का दायित्व होगा. इससे पूरी टीम हर सीट का विश्लेषण कर सकेगी. 403 विधानसभा सीट को जोन में बांटकर चारों प्रभारी काम करेंगे. इसकी पूरी रिपोर्ट प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े को दी जाएगी. भाजपा के संगठन के 6 क्षेत्र में इनके दायित्व तय किए जाएंगे. विनोद तावड़े की नई टीम खास है वजह इसमें महाराष्ट्र, गुजरात और झारखंड से आए ऐसे नेता हैं, जिनका अनुभव केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं बल्कि संगठन, चुनाव प्रबंधन और अलग-अलग राज्यों में काम करने का भी रहा है.

यूपी प्रभारी विनोद तावड़े 
यूपी प्रभारी विनोद तावड़े महाराष्ट्र BJP के पुराने संगठनात्मक नेताओं में से एक हैं. उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति और ABVP से शुरू हुआ. बाद में महाराष्ट्र BJP में संगठन की कई जिम्मेदारियां संभालीं. वे विधान परिषद सदस्य रहे और विपक्ष के नेता की भूमिका भी निभाई. 2014 में बोरीवली विधानसभा से वह विधायक बने. देवेंद्र फडणवीस सरकार में स्कूल शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, मेडिकल शिक्षा, खेल एवं युवा कल्याण, संसदीय कार्य और सांस्कृतिक मामलों जैसे विभाग संभाले.

बिहार चुनाव के संगठनात्मक प्रबंधन की जिम्मेदारी 
2019 में विनोद तावड़े विधानसभा टिकट नहीं मिला और इसके बाद उनका फोकस राज्य की चुनावी राजनीति से ज्यादा संगठन पर हो गया. इसके बाद विनोद तावड़े की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका बढ़ी. राष्ट्रपति चुनाव के दौरान BJP के चुनाव प्रबंधन में जिम्मेदारी मिली और 2024 में BJP के सदस्यता अभियान की जिम्मेदारी भी संभाली. बिहार चुनाव के संगठनात्मक प्रबंधन में भी उनका अनुभव रहा. विनोद तावड़े पहले से यूपी संगठन के साथ संपर्क में रहे हैं. 2026 में उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और पार्टी-सरकार के नेताओं के साथ बैठकें भी की थीं.

जगदीश ईश्वरभाई पटेल
अगर विनोद तावड़े को चुनावी रणनीति और संगठन का राष्ट्रीय अनुभव वाला नेता माना जाए, तो जगदीश पटेल की खासियत गुजरात में जमीनी संगठन और चुनावी मैनेजमेंट है. जगदीश पटेल गुजरात BJP में लंबे समय से संगठनात्मक भूमिका में रहे हैं. वह अहमदाबाद नगर निगम में पार्षद भी रहे. गुजरात BJP के अहमदाबाद शहर अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली. मेहसाणा, गांधीनगर, भावनगर और सुरेंद्रनगर जैसे जिलों की संगठनात्मक जिम्मेदारियां मिलीं. 2019 में अमराईवाड़ी विधानसभा उपचुनाव जीतकर विधायक बने. 2024 लोकसभा चुनाव में उन्हें वाराणसी में नरेंद्र मोदी के चुनावी प्रबंधन और समन्वय की जिम्मेदारी में लगाया गया था. 2026 में उन्हें BJP का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया और इसके तुरंत बाद यूपी का सह-प्रभारी बनाया गया. दिलचस्प यह है कि वाराणसी से उनका पहले का जुड़ाव अब यूपी की जिम्मेदारी में काम आ सकता है.

मेधा कुलकर्णी 
मेधा कुलकर्णी का सफर बाकी तीन नेताओं से थोड़ा अलग है. वह मूल रूप से शिक्षाविद और पुणे की राजनीति से निकली BJP नेता हैं. उनका राजनीतिक आधार पुणे के कोथरूड इलाके में बना. वह पुणे नगर निगम की पार्षद रहीं. 2014 में BJP के टिकट पर कोथरूड से विधायक बनीं. 2014 से 2019 तक विधायक रहीं. 2019 में BJP ने कोथरूड से उन्हें टिकट न देकर चंद्रकांत पाटिल को उम्मीदवार बनाया. इस फैसले के बाद उनकी नाराजगी भी सामने आई थी. इसके बाद उन्हें BJP महिला मोर्चा में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी मिली. अप्रैल 2024 में वह महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद चुनी गईं. उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी मजबूत है. वह B.Sc., B.Ed., M.Ed. और PhD करने के बाद उन्होंने शिक्षण क्षेत्र में काम किया.

यूपी में क्या भूमिका हो सकती है?
मेधा कुलकर्णी के पास शहरी राजनीति, महिला संगठन, महाराष्ट्र BJP और संसदीय राजनीति का अनुभव है. इसलिए यूपी की बड़ी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों और महिला संगठन के लिहाज से उनका अनुभव पार्टी के लिए उपयोगी हो सकता है. हालांकि, यह नियुक्ति के बाद उनकी वास्तविक जिम्मेदारी पर निर्भर करेगा.

डॉ. प्रदीप वर्मा
प्रदीप वर्मा का सबसे बड़ा राजनीतिक परिचय संगठन के व्यक्ति और चुनावी मैनेजमेंट के रूप में है. उनका राजनीतिक सफर छात्र जीवन और RSS के संगठनात्मक काम से होते हुए BJP की झारखंड इकाई तक पहुंचा. 2013 में वह झारखंड BJP के प्रदेश सचिव बनाए गए. 2016 में प्रदेश उपाध्यक्ष भी बनाए गए. बाद में प्रदेश महामंत्री भी रहे. 2023 से झारखंड BJP में संगठनात्मक और मुख्यालय संबंधी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं. 2024 में राज्यसभा सांसद भी बने. 2026 में BJP के राष्ट्रीय सचिव बनाए गए. सबसे महत्वपूर्ण उनका चुनावी संगठनात्मक अनुभव है. 2024 लोकसभा और झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें संताल परगना क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया था. इसके अलावा बिहार और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भी अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभाली.  यानी उनका प्रोफाइल ज्यादा संगठन और चुनावी माइक्रो-मैनेजमेंट वाला है.

अनंत ओझा 
अनंत ओझा झारखंड की राजमहल विधानसभा की राजनीति से निकले BJP नेता हैं. उनका सबसे मजबूत राजनीतिक आधार साहिबगंज/राजमहल क्षेत्र रहा है. उन्होंने 2014 में राजमहल विधानसभा सीट जीती और 2019 में दूसरी बार भी BJP के टिकट पर जीत हासिल की. 2019 में उन्होंने AJSU के ताजुद्दीन अंसारी को 12,675 वोटों से हराया था. 2019 के बाद वे झारखंड BJP संगठन में प्रदेश महामंत्री भी रहे. 2020 में BJP विधायक दल की बैठक में उन्होंने बाबूलाल मरांडी के नाम को नेता प्रतिपक्ष बनाने का प्रस्ताव रखा था. हालांकि, बाद के चुनाव में वे राजमहल सीट बरकरार नहीं रख पाए और अब उन्हें पूर्व विधायक के तौर पर संगठनात्मक भूमिका में देखा जा रहा है. 2026 में भी वे झारखंड में पार्टी के कार्यक्रमों और आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं. जुलाई 2026 में JPSC-JSSC मुद्दे पर निकले मशाल जुलूस का नेतृत्व भी उन्होंने किया था. 

 

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About the Author

Amitesh Pandey

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अमितेश कुमार पांडेय डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सीनियर सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से ताल्लुक रखने वाले अमितेश को मीडिया जगत में 8 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.अमितेश के पास डेस्क एडिटिंग के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से ग्राउंड रिपोर्टिंग का भी व्यावहारिक अनुभव है. अमितेश ने उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों- लखनऊ, प्रयागराज और गाज़ियाबाद में जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है. स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ पेपर अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान में काम करने का अनुभव है. अमितेश ने पत्रकारिता की पढ़ाई प्रयागराज से की है.अमितेश पांडेय से आप amitesh.pandey@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप अमितेश से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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