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विशाल सिंह/लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच बीजेपी संगठन को मजबूत करने में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है. पार्टी जल्द ही अपने पांच प्रमुख मोर्चों की नई प्रदेश इकाइयों का ऐलान कर सकती है। तैयारी ऐसी है कि पितृपक्ष के दौरान ही नई टीमों को जिम्मेदारी सौंपकर चुनावी होमवर्क शुरू करा दिया जाए. महिला, किसान, ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति मोर्चा ने अपनी संभावित टीमों की सूची प्रदेश नेतृत्व को सौंप दी है. अब अंतिम मंजूरी के बाद इन नामों की घोषणा कर दी जाएगी. हर मोर्चे में तीन महामंत्री, 10 उपाध्यक्ष और 10 मंत्री समेत करीब 30 सदस्यीय टीम होगी. नई टीमों के गठन में क्षेत्रीय संतुलन और नए चेहरों को मौका देने पर खास जोर रहेगा.
बीजेपी के 5 मोर्चों की नई टीम
3 महामंत्री
10 उपाध्यक्ष
10 मंत्री
अन्य पदाधिकारी
करीब 30 सदस्यीय प्रदेश टीम
बीजेपी इस बार मोर्चों की टीम में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर खास जोर दे रही है. हर मोर्चे में नए चेहरों को भी जगह दी जा सकती है. फिलहाल पांचों मोर्चों की कमान मौजूदा प्रदेश अध्यक्षों के पास है.
वर्तमान में इन मोर्चों के अध्यक्ष
ओबीसी मोर्चा: प्रकाश पाल
महिला मोर्चा: सरोज कुशवाहा
किसान मोर्चा: देवेंद्र चौधरी
अनुसूचित जाति मोर्चा: अशोक रावत
अनुसूचित जनजाति मोर्चा: विद्याभूषण गोंड
नई प्रदेश टीमें इन्हीं अध्यक्षों के नेतृत्व में काम करेंगी
पितृपक्ष के बाद घोषित होने की संभावना -वहीं, बीजेपी युवा मोर्चा की प्रदेश इकाई के गठन में थोड़ा और समय लग सकता है. सेवा संकल्प अभियान और वाराणसी से वडनगर की यात्रा में युवा मोर्चा के कई पदाधिकारी व्यस्त हैं. ऐसे में युवा मोर्चा की नई टीम पितृपक्ष के बाद घोषित होने की संभावना है. अल्पसंख्यक मोर्चा को लेकर भी फिलहाल यही संभावना है कि पहले प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान हो और बाकी टीम बाद में घोषित की जाए.
बीजेपी की प्राथमिकता फिलहाल पांच प्रमुख मोर्चों की प्रदेश टीमों को अंतिम रूप देना है. विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना चाहती है. नई टीमों के गठन के बाद पदाधिकारियों को क्षेत्रवार जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं, ताकि अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच संगठनात्मक गतिविधियां तेज की जा सकें.
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी वक्त भले ही हो, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने अपनी व्यूहरचना तेज कर दी है. पितृपक्ष के ही दौरान अपने पांचों प्रमुख मोर्चों की कार्यकारिणी का ऐलान कर बीजेपी साफ संदेश देना चाहती है कि वह संगठन के मामले में किसी भी स्तर पर ढील देने के मूड में नहीं है. क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधते हुए नई टीमों के जरिए अब जमीन पर मोर्चा संभालने की बारी है.