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सांसारिक मोह-माया, सुख-सुविधाओं, धन-दौलत और पारिवारिक जीवन का त्याग कर 7 युवतियां जैन साध्वी बनने जा रही हैं. आत्मकल्याण और संयम की राह पर चलने का संकल्प लेकर सातों दीक्षार्थी बहनें रविवार को मांगलिक कलश और होठों पर णमोकार महामंत्र के साथ बिनौली यात्रा पर निकलीं. इस अवसर पर सहारनपुर के जैन बाग मंदिर में जैन समाज की माताओं और बहनों ने अश्रुपूरित नेत्रों और हर्षित हृदय से सातों दीक्षार्थियों की पारंपरिक गोद भराई की रस्म निभाई. यह आयोजन सांसारिक जीवन से विदाई लेकर संयम और साधना के जीवन में प्रवेश करने का प्रतीक रहा.
खास बात यह है कि सात दीक्षार्थियों में दो युवतियां सहारनपुर की रहने वाली हैं, जिनमें चार्टर्ड अकाउंटेंट रंगोली जैन और कारोबारी परिवार की बेटी सुनीता शामिल हैं. रंगोली जैन का वैराग्य का निर्णय विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है. उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट की पढ़ाई पूरी करने के बाद करीब 10 वर्षों तक कोलकाता में पेशेवर जीवन बिताया और अच्छी प्रतिष्ठा तथा लाखों के पैकेज वाले करियर को छोड़कर साधना का मार्ग चुना. रंगोली ने 19 नवंबर 2017 को आचार्य सुपार्श्व सागर से आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लिया था और सात जुलाई 2024 को उन्हें संघ प्रवेश मिला.
जैन समाज के अध्यक्ष राजेश कुमार जैन के अनुसार, रंगोली का परिवार भी धार्मिक परंपराओं से जुड़ा रहा है. उनके दादा सुमित प्रकाश जैन, जिन्हें सहारनपुर में बक्से वाले जैन के नाम से जाना जाता था, स्वयं जैन मुनि बन गए थे. रंगोली ने भी बचपन से ही आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत का संकल्प लिया था. पिछले कई वर्षों से वह संतों और माताजी के सानिध्य में रहकर साधना कर रही थीं और बीते करीब एक वर्ष से उनकी दिनचर्या पूरी तरह दीक्षित साध्वियों जैसी हो गई थीं.
वहीं, दूसरी दीक्षार्थी प्रखरश्री की कहानी भी युवाओं के लिए चर्चा का विषय है. मध्य प्रदेश के बैतूल में 13 अक्टूबर 1997 को जन्मीं प्रखरश्री ने बीए एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद लंदन में कानून की पढ़ाई और न्यायिक क्षेत्र में सफलता हासिल कर जज बनीं, लेकिन सांसारिक प्रतिष्ठा और करियर को पीछे छोड़कर उन्होंने संयम का रास्ता चुना. 9 जुलाई 2020 से ब्रह्मचर्य का पालन कर रहीं प्रखरश्री अब अपना जीवन आत्मकल्याण और धर्म साधना के लिए समर्पित करने जा रही हैं.
इनके अलावा मध्य प्रदेश के भिंड की गिरजा वर्ष 2020 से ब्रह्मचर्य व्रत का पालन कर रही हैं. पांचवीं तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने सांसारिक जीवन से दूरी बनाकर साधना का मार्ग अपनाया और औरंगाबाद में ब्रह्मचर्य व्रत लिया था. ग्वालियर में 20 सितंबर 1997 को जन्मीं सोनम ने फाइन आर्ट्स में एमए किया है और स्टेनोग्राफी में भी दक्षता हासिल की है. उन्होंने 30 अप्रैल 2025 से ब्रह्मचर्य व्रत धारण कर रखा है. मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मेहगांव निवासी मुकेश जैन और मीनू जैन की 27 वर्षीय बेटी चेतना ने भी सांसारिक जीवन त्यागने का निर्णय लिया है. उन्होंने 12वीं तक शिक्षा प्राप्त की और 20 फरवरी 2022 को गणाचार्य विराग सागर से ब्रह्मचर्य व्रत लिया था. 15 अप्रैल 2023 को उन्हें संघ प्रवेश दिया गया.
इसके अलावा सहारनपुर की सुनीता और दिल्ली निवासी बबली भी दीक्षा लेने जा रही हैं. जैन समाज के अध्यक्ष राजेश कुमार जैन ने कहा कि यह केवल सात युवतियों का त्याग नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है. उन्होंने कहा कि सातों दीक्षार्थी अलग-अलग जिलों और क्षेत्रों से संबंध रखती हैं, लेकिन उनका उद्देश्य एक ही है, आत्मा को परमात्मा की ओर अग्रसर करना. उन्होंने बताया कि सहारनपुर में पहली बार एक साथ सात दीक्षार्थी बहनों की बिनौली और गोद भराई का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें दूर-दराज से बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग शामिल हुए. उन्होंने कहा कि रंगोली और सुनीता के सहारनपुर से होने के कारण स्थानीय समाज में विशेष उत्साह है.
(सहारनपुर से नीना जैन की रिपोर्ट)