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उत्तराखंड 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. रामनगर विधानसभा सीट पर दिलचस्प दावेदारी देखने को मिली है. यहां एक NRI (Non-Resident Indian) ने ताल ठोंकने का ऐलान कर दिया है. अमेरिका में रहकर पिछले 28 वर्षों से कंप्यूटर इंजीनियर के रूप में काम कर रहे एनआरआई विजय शर्मा भदौला के चुनाव लड़ने की घोषणा पर सियासी हलचल मच गई है. विजय शर्मा भदौला ने रामनगर से कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ने की दावेदारी पेश करने के संकेत दिए हैं.
NRI विजय शर्मा भदौला ने रामनगर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी राजनीतिक दावेदारी का ऐलान किया. विजय शर्मा भदौला ने कहा कि उनका परिवार उत्तराखंड राज्य आंदोलन से जुड़ा रहा है. उनकी माता सुमलता भदौला ने कई वर्षों तक राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और पूरा परिवार इस आंदोलन का हिस्सा रहा. उन्होंने बताया कि वह पिछले 28 वर्षों से अमेरिका में कंप्यूटर इंजीनियर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्होंने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से MBA किया है.
वर्तमान में वह डेटा साइंटिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं. पिछले सात वर्षों से वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी कार्य कर रहे हैं. माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और फेसबुक जैसी बड़ी कंपनियों के डेटा सेंटर निर्माण से जुड़े कार्यों में भी उन्होंने विशेषज्ञता हासिल की है. उन्होंने रामनगर के विकास को लेकर अपनी प्राथमिकताएं बताते हुए कहा कि क्षेत्र के युवाओं के सामने सबसे बड़ी समस्या रोजगार की है. यहां उद्योग और रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं हैं.
उनका कहना है कि रामनगर और आसपास के क्षेत्रों में बीपीओ सेक्टर को विकसित कर रोजगार की बड़ी संभावनाएं पैदा की जा सकती हैं. इंश्योरेंस और मेडिकल सेवाओं से जुड़े बीपीओ स्थापित किए जाएं तो प्रत्येक बीपीओ में दो से तीन हजार लोगों को रोजगार मिल सकता है. उन्होंने रामनगर में कम से कम 50 बीपीओ स्थापित करने का लक्ष्य रखने की बात कही. उनके अनुसार इससे करीब 40 से 50 हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है.
विजय शर्मा ने कहा कि वह पिछले दो वर्षों से रामनगर में रहकर क्षेत्र के विकास को लेकर काम कर रहे हैं. इससे पहले भी करीब 15 वर्षों से उत्तराखंड के विकास के मुद्दे पर प्रयास करते रहे हैं. उन्होंने कहा कि सिस्टम से बाहर रहकर उन्होंने कई बार ब्लूप्रिंट और विजन लेटर के माध्यम से विकास का खाका प्रस्तुत किया, लेकिन जब तक व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनेंगे, तब तक सिस्टम में बदलाव लाना मुश्किल है. इसी सोच के साथ वह अपने अमेरिकी करियर को दांव पर लगाकर रामनगर आए हैं.
उन्होंने बिजली व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि रामनगर के आसपास बड़े-बड़े पावर प्लांट होने के बावजूद क्षेत्र को पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है. रामनगर को बिजली की कैटेगरी-सी में रखा गया है, जिसके चलते यहां बिजली की उपलब्धता को लेकर समस्याएं बनी रहती हैं.
(रामनगर से विजय कश्यप की रिपोर्ट)