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राजस्थान जलदाय विभाग (PHED) में ट्यूबवेल और पंप हाउसों की मरम्मत के नाम पर लगाए गए 1.75 करोड़ रुपए के टेंडर निरस्त कर दिए गए हैं. ज़ी मीडिया की खबर के बाद विभाग में हलचल मची और अधीक्षण अभियंता (SE) भगवान सहाय मीणा तथा अधिशासी अभियंता (XEN) संजय शर्मा को बैकफुट पर आना पड़ा. जयपुर नॉर्थ-3 डिवीजन में लगाए गए इन टेंडरों को अब निरस्त कर नए सिरे से सब डिवीजन वाइज टेंडर लगाने का फैसला किया गया है.
इस पूरे मामले में प्रमुख सचिव हेमंत गेरा के दखल के बाद टेंडर निरस्त करने की कार्रवाई हुई. पहले विभाग की ओर से डिवीजन वाइज टेंडर जारी किए गए थे, जिनकी कुल राशि करीब 1.75 करोड़ रुपए थी. टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने के बाद अब विभाग ने पुराने टेंडर निरस्त कर सब डिवीजन स्तर पर नए टेंडर जारी करने का निर्णय लिया है.
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल अधिकारियों के बदलते बयानों को लेकर खड़ा हो रहा है. अधीक्षण अभियंता भगवान सहाय मीणा ने पहले कहा था कि अधिशासी अभियंता की ओर से जो प्रस्ताव भेजा गया था, उसी को उन्होंने अप्रूव किया था. वहीं अब उनका कहना है कि XEN ने ही टेंडर निरस्त करने का प्रस्ताव भेजा है. दूसरी ओर अधिशासी अभियंता संजय शर्मा ने पहले कहा था कि उन्होंने वही किया, जो अधीक्षण अभियंता ने कहा, लेकिन अब टेंडर निरस्त होने के बाद उन्होंने पूरे मामले पर चुप्पी साध ली है. टेंडर निरस्त करने की वजह को लेकर भी अधिकारियों की ओर से स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है.
अब इस पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं. आखिर 1.75 करोड़ रुपए के टेंडर डिवीजन स्तर पर लगाने की जरूरत क्यों पड़ी. क्या इस प्रक्रिया से चुनिंदा फर्मों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही थी. यदि टेंडर प्रक्रिया सही थी, तो फिर खबर सामने आने और प्रमुख सचिव के दखल के बाद इन्हें निरस्त क्यों किया गया.
सरकार लगातार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करने का दावा कर रही है. ऐसे में अब निगाहें जलदाय विभाग के उच्च अधिकारियों पर हैं. सवाल यह भी है कि क्या केवल टेंडर निरस्त करना ही पर्याप्त कार्रवाई होगी या फिर इस मामले में जिम्मेदार SE भगवान सहाय मीणा और XEN संजय शर्मा की भूमिका की भी जांच कर कार्रवाई की जाएगी.