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संन्यास के पथ पर 'पांच पांडव': कौन हैं प्रेमानंद जी महाराज के ये 5 खास शिष्य, जिन्होंने कॉर्पोरेट, सेना छोड़ धारण किया साधु भेष!

Premanand Maharaj Ke Shishya: प्रेमानंद महाराज के पांच खास शिष्‍य हैं जो उनके साथ हमेशा नजर आते हैं. पहले ये पांचों शिष्‍य अलग-अलग क्षेत्रों में नौकरी करते थे. महाराज से मिलने के बाद उनकी जिंदगी बदल गई. आइए जानते हैं प्रेमानंद जी के इन पांच पांडवों के बारे में....

संन्यास के पथ पर 'पांच पांडव': कौन हैं प्रेमानंद जी महाराज के ये 5 खास शिष्य, जिन्होंने कॉर्पोरेट, सेना छोड़ धारण किया साधु भेष!
Image Credit: Premanand Maharaj Ke Shishya

Premanand Maharaj Ke Shishya: वृंदावन के प्रख्यात संत पूज्य प्रेमानंद जी महाराज के सत्संग और दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु जुटते हैं. विराट कोहली, अनुष्का शर्मा और शिल्पा शेट्टी जैसी दिग्गज हस्तियां भी महाराज जी का मार्गदर्शन लेने उनके आश्रम पहुंचती हैं. प्रेमानंद जी महाराज की रात में होने वाली 'पदयात्रा' (परिक्रमा) हो या सुबह का सत्संग, हर पल पांच खास शिष्य उनके साथ साये की तरह नजर आते हैं.

कहलाते हैं 'पांच पांडव'
महाराज जी के अनुयायी इन पांचों शिष्यों को प्यार और आदर से 'पांच पांडव' कहकर पुकारते हैं.  ये पांचों साधारण पृष्ठभूमि से नहीं हैं; कोई सेना में अफसर था, कोई प्रोफेसर, कोई सीए (CA), तो कोई सफल बिजनेसमैन. प्रेमानंद जी महाराज की भक्ति और विचारों से प्रेरित होकर इन्होंने अपनी चमक-धमक वाली जिंदगी और गाढ़ी कमाई की नौकरियां छोड़कर संन्यास का मार्ग चुन लिया. आइए जानिए प्रेमानंद जी महाराज के 'पांच पांडवों' का पूरा परिचय.

1-नवल नगर बाबा (पूर्व सेना अधिकारी)
पंजाब के पठानकोट निवासी नवल नगर बाबा एक सैन्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं. वे खुद वर्ष 2008 से 2017 तक भारतीय सेना में अधिकारी पद पर तैनात रहे और 2016 में कारगिल जैसी चुनौतीपूर्ण जगह पर ड्यूटी की. 2017 में महाराज जी के प्रवचनों से प्रभावित होकर उन्होंने देश सेवा के साथ-साथ अब अध्यात्म और गुरु सेवा का मार्ग चुन लिया.अब महाराज जी के सेवा में ही रहते हैं.

2. महामधुरी बाबा (पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर)
प्रेमानंद महाराज के खास शिष्यों में महामधुरी बाबा है जो पीलीभीत के रहने वाले हैं.महामधुरी बाबा वृंदावन आने से पहले एक डिग्री कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर थे.  पहली बार अपने भाई के साथ जब वे महाराज जी के दर्शन करने आए, तो उनके विचारों का उन पर ऐसा गहरा असर हुआ कि उन्होंने अध्यापन का पेशा छोड़कर साधु भेष धारण कर लिया.

3. श्यामा शरण बाबा (महाराज जी के भतीजे)
श्यामा शरण बाबा का महाराज जी से पारिवारिक और आध्यात्मिक दोनों नाता है. वे प्रेमानंद जी महाराज के सगे भाई के बेटे (भतीजे) हैं. उनका जन्म भी कानपुर के उसी 'अखीर' गांव वाले पैतृक मकान में हुआ था. बचपन से महाराज जी के वैराग्य की कहानियां सुनकर वे प्रेरित हुए और बाद में दीक्षा लेकर महाराज जी की सेवा में समर्पित हो गए. उन्‍होंने प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ले ली. अब वह महाराज के साये के रूप में मौजूद रहते हैं.

4. अलबेलिशरण बाबा (पूर्व चार्टर्ड अकाउंटेंट - CA)
दिल्ली के एक प्रतिष्ठित और संपन्न परिवार में जन्मे अलबेलिशरण बाबा का पूरा परिवार फाइनेंस और सीए क्षेत्र से जुड़ा था.  पिता, ताऊ और बहन सभी सीए थे और वे खुद भी सफल सीए थे. लेकिन भौतिक सुख-सुविधाओं को छोड़कर वे श्रीराधा रानी की भक्ति में रम गए और संन्यासी बन गए.

5. आनंद प्रसाद बाबा (पूर्व बड़े कारोबारी)
दिल्ली के रहने वाले आनंद प्रसाद बाबा का फुटवियर का बहुत बड़ा कारोबार था. वे अक्सर दर्शन के लिए वृंदावन आया करते थे. एक समय सांसारिक मोह-माया से मन विरक्त होने पर उन्होंने अपना चलता हुआ बिजनेस छोड़ दिया और महाराज जी की शरण में आ गए.  वर्तमान में वे आश्रम की व्यवस्थाओं का संचालन संभालते हैं.तब से आश्रम में रहकर पूरा प्रबंध देख रहे हैं.

आश्रम में क्या है इनकी मुख्य जिम्मेदारी?
ये 'पांच पांडव' न केवल महाराज जी की सुरक्षा और सेवा का ध्यान रखते हैं, बल्कि रात की पदयात्रा का प्रबंधन, आश्रम आने वाले अतिथियों व श्रद्धालुओं का परिचय कराना और सत्संग के दौरान भक्तों के प्रश्नों को क्रमबद्ध तरीके से महाराज जी के समक्ष प्रस्तुत करने का काम भी पूरी निष्ठा से संभालते हैं.

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About the Author

Preeti Chauhan

Preeti Chauhan

प्रीति चौहान जीन्यूज में पत्रकार हैं, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड डिजीटल टीम में  ब्रेकिंग, हाइपरलोकल, क्राइम, और अन्य मुद्दों को लेकर खबरें लिखती हैं. 
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