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Govind Ballabh Pant Story: यूपी के पहले सीएम पंडित गोविंद बल्लभपंत की 139वीं जयंती है. स्वतंत्र भारत के राजनीति के पुरोधा और उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत एक महान स्वतंत्रता सेनानी, कुशल प्रशासक और दूरदर्शी राजनेता थे. उन्होंने देश की आजादी की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाने के साथ-साथ आजाद भारत में उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे और पुलिस-कृषि व्यवस्था की मजबूत नींव रखी थी. बाद में भारत के गृह मंत्री के रूप में उन्होंने राजभाषा हिंदी को स्थापित करने और देश के राज्यों के पुनर्गठन में भी ऐतिहासिक योगदान दिया।
पंडित गोविंद बल्लभ पंत का प्रारंभिक जीवन व जन्म
उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख सेनानी पंडित गोविंद बल्लभ पंत का जन्म 10 सितंबर 1887 को तत्कालीन संयुक्त प्रांत (वर्तमान उत्तराखंड) के अल्मोड़ा जिले के खूंट गांव में हुआ था. उनका जन्म एक प्रतिष्ठित कराहड़े ब्राह्मण परिवार में हुआ था.
शिक्षा और वकालत
उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से वकालत (LL.B.) की पढ़ाई पूरी की और 1909 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में टॉप किया. इसके बाद उन्होंने काशीपुर में वकालत शुरू की. एक वकील के रूप में उन्होंने 1925 के ऐतिहासिक 'काकोरी ट्रेन डकैती कांड' में राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और अन्य क्रांतिकारियों की पैरवी (कानूनी बचाव) के लिए मुफ्त कानूनी लड़ाई लड़ी।
स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव
महात्मा गांधी के आह्वान पर गोविंद बल्लभ पंत ने वकालत छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की. कुमाऊं क्षेत्र में अंग्रेजों की ‘कुली बेगार’ प्रथा के खिलाफ आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. इसके बाद वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए और ब्रिटिश शासन के खिलाफ कई आंदोलनों का नेतृत्व किया. आइए जानते हैं उनके राजनीतिक सफर की कहानी.
साइमन कमीशन का विरोध
जब साइमन कमीशन लखनऊ आया, तो पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ गोविंद बल्लभ पंत ने इसका जोरदार विरोध किया. अंग्रेजों के लाठीचार्ज में नेहरू जी को बचाते हुए पंत जी के सिर और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आईं, जिसके कारण उनका शरीर जीवन भर के लिए थोड़ा कांपता रहा.
राजनीतिक सफर
पंत का राजनीतिक सफर 1920 के दशक में तेजी से आगे बढ़ा. वे 1923 और 1926 में उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य चुने गए थे. 1934 में केंद्रीय विधानसभा पहुंचे और 1937 में प्रांतीय विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए.
संयुक्त प्रांत के प्रीमियर से यूपी के पहले मुख्यमंत्री तक.....
1937 के चुनाव में कांग्रेस को बहुमत मिलने के बाद गोविंद बल्लभ पंत ने 17 जुलाई 1937 को संयुक्त प्रांत (यूनाइटेड प्रोविंसेज) के प्रीमियर (प्रधानमंत्री) के रूप में शपथ ली. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कांग्रेस मंत्रालयों के इस्तीफे के साथ उन्होंने भी 1939 में पद छोड़ दिया.1946 में फिर चुनाव हुए और पंत दोबारा प्रीमियर बने. 26 जनवरी 1950 को भारत के गणतंत्र बनने और संयुक्त प्रांत का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश होने के बाद वे राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने.
उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री (1950 - 1954)
24 जनवरी 1950 को जब संयुक्त प्रांत का नाम बदलकर 'उत्तर प्रदेश' रखा गया, तब पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली और 27 दिसंबर 1954 तक इस पद पर रहे।
जमींदारी उन्मूलन कानून
यूपी के सीएम रहते हुए उन्होंने राज्य में 'जमींदारी उन्मूलन अधिनियम' (Zamindari Abolition Act) लागू किया, जिसने लाखों गरीब किसानों को जमीन का मालिकाना हक दिया.
मुख्यमंत्री के रूप में प्रमुख कार्य
पंडित गोविंद बल्लभ पंत को आधुनिक उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक नींव रखने वाले नेताओं में गिना जाता है. उनके कार्यकाल में प्रशासनिक सुधार, शिक्षा विस्तार और भूमि सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए. वे साफ-सुथरी राजनीति और सादगीपूर्ण जीवनशैली के लिए भी जाने जाते थे.
केंद्र की राजनीति में बड़ी भूमिका
1955 में सरदार वल्लभभाई पटेल के बाद वे देश के गृह मंत्री बने. उनके कार्यकाल के दौरान 'राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956' (States Reorganisation Act) पारित हुआ और उन्होंने हिंदी को भारत की राजभाषा का दर्जा दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई.
भारत रत्न और निधन
देश के प्रति उनके योगदान को देखते हुए वर्ष 1957 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया. 7 मार्च 1961 को गृह मंत्री के पद पर रहते हुए दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया.
क्यों याद किए जाते हैं गोविंद बल्लभ पंत?
उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री
स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख सेनानी
संयुक्त प्रांत के लोकप्रिय प्रीमियर
भारत के गृह मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण योगदान
भारत रत्न से सम्मानित
ईमानदार और सादगीपूर्ण सार्वजनिक जीवन की मिसाल
पंडित गोविंद बल्लभ पंत का नाम भारतीय लोकतंत्र, स्वतंत्रता संग्राम और उत्तर प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है. उन्हें आधुनिक उत्तर प्रदेश के प्रमुख निर्माताओं में गिना जाता है.