'झंडा उठाने-दरी बिछाने दिल्ली पहुंच गए अखिलेश' ओम प्रकाश राजभर का सपा अध्यक्ष पर तीखा हमला
इंडिया गठबंधन की दिल्ली में रैली को लेकर ओम प्रकाश राजभर ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर हमला बोला है.
सुभासपा अध्यक्ष व योगी कैबिनेट में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर हमला बोला है. उन्होंने 'इंडिया गठबंधन' की दिल्ली रैली को लेकर भी अखिलेश पर निशाना साधा है. सिख-विरोधी दंगों का जिक्र करते हुए आज (रविवार, 1 नवंबर) होने जा रही इंडिया गठबंधन की रैली को लेकर ओम प्रकाश राजभर ने सपा अध्यक्ष पर तीखा हमला बोला है.
ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश पर हमला
ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, अखिलेश यादव जी, याद है आपको? आज ही के दिन 1 नवंबर 1984 को आपके ‘बड़के भइया’ के पिता जी के इशारे पर दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में बड़े पैमाने पर सिख-विरोधी हिंसा और दंगे भड़क उठे थे. हजारों की संख्या में सिख भाइयों की कांग्रेसियों ने हत्या की थी. इस दुख भरे दिन के लिए मेरी संवेदनाएं सिख समाज के लोगों के साथ हैं. मुलायम सिंह जी भी इस दिन को शोक के रूप में मनाते थे. अखिलेश भाई क्या आपने अपने पिता की? परंपरा को ध्यान में रखने की? कोशिश की?
अराजकता फैलाने के लिए दिल्ली में बुलाई गई रैली
ओम प्रकाश राजभर ने आगे लिखा, हद कर दिए हैं, एक इशारे पर सारी संवेदना भूल आधी रात दिल्ली में ‘बड़के भइया’ की सेवा में लग गए. अराजकता फैलाने के लिए दिल्ली में बुलाई गई रैली में झंडा उठाने-दरी बिछाने के लिए आप दिल्ली पहुंच गए हैं. पहले भी आपकी एक फोटो आई थी, जब आप उनका झंडा ढो रहे थे. इतनी मेहनत अपनी पार्टी की लिए किए होते तो आज सपा कुछ और होती.
इन लोगों को लोकतंत्र में विश्वास नहीं
उन्होंने लिखा, आप खुद को कृष्णवंशी कहते है, कुछ तो लाज रखिए अपने पिता मुलायम सिंह जी की, कुछ तो इज्जत रखिए चाचा शिवपाल जी की. इतना दबकर भी कोई राजनीति करता है क्या? जरा सोचिएगा. ओम प्रकाश राजभर कहा, "ये (विपक्ष) के लोग लोकतंत्र में विश्वास नहीं करते, जब संसद चलता है, तो सदन में बहस-चर्चा करनी चाहिए, लेकिन ये सदन के बाहर बहस-चर्चा करते हैं. ये लोग चर्चा से भागते हैं."
दिल्ली में कांग्रेस की रैली
बता दें कि इंडिया गठबंधन आज यानी रविवार एक नवंबर को दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ रैली कर रही है. इसमें कांग्रेस के साथ सपा और इंडिया गठबंधन के दल शामिल हैं. वहीं आज ही के दिन 1 नवंबर 1984 को सिख विरोधी दंगे हुए थे, जिसको लेकर हमेशा से कांग्रेस पर सवाल उठते रहे हैं.
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