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मेरठ, पारस गोयल: यूपी के चर्चित हत्याकांड की कातिल पत्नियां इस वक्त मेरठ जिला जेल की सलाखों के पीछे अपनी सजा काट रही हैं. सौरभ हत्याकांड हो या फिर अमित कश्यप हत्याकांड दोनों ही मामलों ने समाज को झकझोर कर रख दिया था. इन दोनों हत्याकांड की कातिल पत्नियों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. दोनों अपने बच्चों के लिए व्रत रखने वाली हैं.
आमतौर पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का निर्जला व्रत रखती हैं, लेकिन अपने प्रेमियों के लिए पतियों को मौत के घाट उतारने वाली जेल में बंद मुस्कान और रवीता इस बार करवा चौथ का व्रत नहीं रखेंगी. जेल अधीक्षक वीरेश राज ने स्थिति साफ करते हुए बताया कि दोनों महिलाओं ने करवा चौथ का व्रत रखने से इनकार कर दिया है. हालांकि, वे अपने बच्चों की सलामती और लंबी उम्र के लिए रखा जाने वाला 'अहोई अष्टमी' का व्रत जरूर रखेंगी.
जेल अधीक्षक वीरेश राज ने बताया कि इन महिलाओं के साथ लगभग इक्कीस महिलाओं ने व्रत रखने की इच्छा जताई है. चार के बच्चे तो यहीं जेल में हैं. चार के बच्चे बाहर हैं. किसी के नानी-नाना, दादी-दादा के पास हैं. इक्कीस महिलाओं ने कहा है कि वो अपने बच्चों के लिए व्रत रखेंगी. व्रत के लिए एनजीओ द्वारा जो सामग्री दी जाती है, वो उनको वितरित की जाएगी. उन्होंने बताया कि मुस्कान और रवीता ने भी अपने बच्चों के लिए व्रत रखने के लिए कहा है.
सवाल पूछने पर कि क्या मुस्कान और रवीता ने करवा चौथ का व्रत रखा, तो जेल अधीक्षक ने साफ बताया कि करवा चौथ का व्रत मुस्कान और रवीता ने नहीं रखा है. व्रत जो बच्चों के लिए रखा जाता है, जिसको अहोई अष्टमी भी कहते हैं, उसको रखेंगी. यहां पर सभी त्योहार बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं.
सौरभ हत्याकांड से जुड़ा एक अन्य दोषी साहिल की जेल दिनचर्या को लेकर भी जेल प्रशासन ने अहम जानकारी साझा की. जेल अधीक्षक ने बताया कि राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी द्वारा सेकंड सर्कल में बंदियों के स्वास्थ्य और फिटनेस के लिए एक विशाल जिम की स्थापना करवाई गई थी, जिसका उद्घाटन भी उन्होंने खुद किया था. जेल में बंद सभी पुरुष बंदी अपनी इच्छा के अनुसार इस जिम का इस्तेमाल करते हैं. बंदी साहिल भी शाम को सेकंड सर्किल में जिम करता है.
दोनों की दूसरी जेल में शिफ्टिंग को लेकर उन्होंने बताया कि जेल शिफ्टिंग की प्रक्रिया एक लंबी प्रक्रिया होती है. पुरुष आगरा सेंट्रल जेल जाते हैं और महिलाएं नारी निकेतन लखनऊ जाती हैं. प्रदेश में केवल एक ही महिला जेल है तो जैसे-जैसे सीटें खाली होती हैं, जिसका नंबर आता है उसको भेजा जाता है.
जेल अधीक्षक ने आगे बताया कि अभी हमारे यहां पहले से 8 महिलाएं हैं, जिनको शिफ्ट किया जाना है. उसके बाद इनका नंबर आएगा. प्रदेश की लगभग सभी जेलों में ऐसी महिलाएं होती हैं, सेंट्रल जेल आगरा में भी सीटों की काफी कमी है, इसमें दो-चार साल भी लग जाते हैं.