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कोलकाता हादसे के बाद एक्शन: यूपी में दुर्गा पूजा पंडालों की सुरक्षा का रियलिटी चेक, लखनऊ में देखिए क्या मिले इंतजाम?

कोलकाता में हुई दर्दनाक दुर्घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन ने राज्य के सभी दुर्गा पूजा पंडालों की सुरक्षा को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं.

Edited By Preeti Chauhan
Published: Oct 18, 2026, 12:20 PM IST | Updated: Oct 18, 2026, 12:26 PM IST
Image Credit: UP Pandal Safety Reality Check
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नंदन श्रीवास्तव/लखनऊ: कोलकाता के एक दुर्गा पूजा पंडाल में हुए दर्दनाक हादसे के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी धार्मिक आयोजनों और पंडालों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के सभी पुलिस कमिश्नरों, जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों को सख्त निर्देश दिए हैं कि पंडालों में अग्नि सुरक्षा, एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स, इमरजेंसी निकास और बिजली के पुख्ता इंतजामों की बारीकी से जांच की जाए. इसके साथ ही अधिकारियों को खुद फील्ड में उतरकर व्यवस्थाओं का जायजा लेने को कहा गया है.

जमीन पर सुरक्षा का रियलिटी चेक
प्रशासनिक दावों और निर्देशों के बीच हमारी जी मीडिया की टीम ने जमीनी हकीकत जानने के लिए राजधानी लखनऊ के जानकीपुरम स्थित दुर्गा पूजा पंडाल का रुख किया. यहां यह पड़ताल की गई कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आयोजकों और प्रशासन ने क्या तैयारियां कर रखी हैं.

अग्नि सुरक्षा से लेकर बिजली की वायरिंग तक पर नजर
पंडालों में उमड़ने वाली भारी भीड़ के मद्देनजर प्रवेश और निकास (Entry & Exit) के रास्ते स्पष्ट और अलग होना बेहद जरूरी है. हादसे या भगदड़ जैसी किसी भी आपात स्थिति में यदि सभी लोग एक ही रास्ते से बाहर निकलने का प्रयास करें, तो स्थिति बेकाबू हो सकती है. रियलिटी चेक के दौरान पंडालों में इन व्यवस्थाओं की गंभीरता से पड़ताल की गई.

मुख्यमंत्री योगी के स्पष्ट निर्देश हैं कि पंडाल की भव्यता से ज्यादा श्रद्धालुओं की जान की सुरक्षा अहम है. ऐसे में पंडाल के भीतर अग्निशमन यंत्रों (Fire Extinguishers) की उपलब्धता, बिजली की वायरिंग की सही स्थिति और शॉर्ट सर्किट से बचाव के उपायों पर विशेष नजर रखी गई ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके.

निर्देशों के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर नजर
कोलकाता हादसे के बाद यूपी में पंडालों की सुरक्षा जांच को लेकर प्रशासनिक सतर्कता बढ़ाई गई है. अब निगरानी का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा मानकों का पालन हो और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी इंतजाम मौजूद रहें.

प्रशासन के सख्त निर्देशों के बाद अब यह देखना अहम होगा कि ज़मीनी स्तर पर सभी पंडाल संचालक इन सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करते हैं या नहीं.

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About the Author

प्रीति चौहान जीन्यूज में पत्रकार हैं, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड डिजीटल टीम में  ब्रेकिंग, हाइपरलोकल, क्राइम, और अन्य मुद्दों को लेकर खबरें लिखती हैं. 
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