"अपनी सुरक्षा खुद करें..." जमुई कांड पर भड़कीं पूर्व मेजर खुशबू पाटनी, लड़कियों को दी एयर पिस्टल चलाने की सलाह!
बरेली की रहने वाली पूर्व सैन्य अधिकारी और एक्ट्रेस दिशा पाटनी की बहन मेजर खुशबू पाटनी (रि.) का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जमुई और समस्तीपुर जैसे कांडों से आहत पूर्व मेजर ने साफ कहा है- "अब दूसरों के भरोसे रहने का वक्त चला गया है, बेटियों को अपनी रक्षा खुद करनी होगी।"
बरेली: देश में युवतियों और महिलाओं के साथ बढ़ रही छेड़छाड़ और अपराध की घटनाओं पर चिंता जताते हुए बॉलीवुड अभिनेत्री दिशा पाटनी की बड़ी बहन और भारतीय सेना की पूर्व मेजर खुशबू पाटनी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने लड़कियों को आत्मनिर्भर बनने और अपनी सुरक्षा के लिए एयर पिस्टल (CO2) चलाने का प्रशिक्षण लेने की सलाह दी है.
जमुई की घटना पर जताई चिंता, पोस्ट की एयर पिस्टल वाली वीडियो
बिहार के जमुई में एक किशोरी के साथ हुई छेड़खानी और मारपीट की घटना से आहत होकर खुशबू पाटनी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में वह हाथों में एयर पिस्टल (CO2) थामे नजर आ रही हैं और लड़कियों को इसे सही तरीके से चलाने व इस्तेमाल करने की बारीकियां समझा रही हैं.
'दूसरों पर निर्भर न रहें, खुद करें अपनी सुरक्षा'
सोशल मीडिया पर युवतियों को संबोधित करते हुए पूर्व सैन्य अधिकारी ने कहा कि महिलाओं को अपनी सुरक्षा के लिए किसी और पर निर्भर रहने के बजाय खुद सक्षम बनना चाहिए. उन्होंने कहा कि आपात स्थिति में एयर पिस्टल आत्मरक्षा का एक बेहद प्रभावी साधन साबित हो सकता है। इससे न केवल लड़कियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि वे किसी भी खतरे का निडर होकर मुकाबला कर सकेंगी। वीडियो के अंत में उन्होंने यह साफ भी किया कि उनके हाथ में दिख रही गन एक एयर पिस्टल (ट्रेनिंग टूल) है, कोई असली जानलेवा हथियार नहीं.
सेना में मेजर रह चुकी हैं खुशबू पाटनी
मूल रूप से बरेली की रहने वाली खुशबू पाटनी भारतीय सेना में मेजर के पद पर देश सेवा कर चुकी हैं. उनके पिता जगदीश सिंह पाटनी उत्तर प्रदेश पुलिस में बतौर डीएसपी सेवानिवृत्त हुए हैं. सेना से रिटायरमेंट के बाद खुशबू अब एक फिटनेस ट्रेनर के रूप में सक्रिय हैं और सामाजिक मुद्दों पर बेबाक राय रखने के लिए जानी जाती हैं.
हाथ में एयर पिस्टल थामे खुशबू पाटनी का यह वीडियो सिर्फ एक सलाह नहीं, बल्कि जमुई और समस्तीपुर जैसी घटनाओं के खिलाफ एक कड़ा प्रतिरोध है. उनका मानना है कि जब कानून का खौफ अपराधियों में खत्म होने लगे, तब लड़कियों को खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से इतना मजबूत बनाना होगा कि वे किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब दे सकें. एयर पिस्टल जैसी गैर-घातक (Non-lethal) ट्रेनिंग लड़कियों में आत्मरक्षा का आत्मविश्वास भर सकती है, ताकि समस्तीपुर या जमुई जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.
लकीर का फकीर बनने के बजाय संदेश साफ है: जब तक समाज और सिस्टम बेटियों को सुरक्षा की गारंटी नहीं दे पाता, तब तक हर बेटी को अपना 'रक्षक' खुद बनना पड़ेगा.