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कानपुर का रहस्यमयी आशा देवी मंदिर: माता सीता से जुड़ा है इतिहास, मन्नत पूरी होने के लिए रखी जाती है ईंट

कानपुर: शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों पर भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है. कल्याणपुर का प्रसिद्ध मां आशा देवी मंदिर अपनी अनोखी मान्यताओं और चमत्कारों को लेकर चर्चा में है. त्रेतायुग से जुड़े इस प्राचीन मंदिर में नवरात्रि के पहले दिन से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हैं और मान्यता है कि यहां सच्चे मन से आने वाले हर भक्त की मुराद पूरी होती है.

Edited By Preeti Chauhan
Published: Oct 11, 2026, 08:54 AM IST | Updated: Oct 11, 2026, 08:59 AM IST
Image Credit: Mata Sita Treta Yuga Temple
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प्रवीण पांडे/कानपुर: त्रेता युग से जुड़े इस मंदिर में शारदीय नवरात्रि की के पहले दिन भक्तों का तांता लग गया है. कल्याणपुर के प्रसिद्ध मां आशा देवी मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ जुटी हुई है. नवरात्रि के इन खास दिनों में दूर-दराज से लोग आ रहे हैं और लंबी लाइनों में लगकर मां के दर्शन कर रहे हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दरबार में जो भी भक्त सच्चे मन से आता है, उसकी हर इच्छा पूरी होती है. इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है और इसका नाता सीधा त्रेता युग से माना जाता है.

त्रेता युग और माता सीता से जुड़ा पुराना इतिहास
मंदिर के पुजारी आशुतोष गिरी ने बताया कि भगवान श्रीराम ने माता सीता का त्याग किया था, तब लक्ष्मण जी उन्हें बिठूर के जंगलों के पास छोड़कर आए थे. महर्षि वाल्मीकि के आश्रम जाने से पहले माता सीता कुछ समय के लिए इसी जगह पर रुकी थीं. यहीं बैठकर उन्होंने भगवान राम से दोबारा मिलने की उम्मीद लगाई थी, जिसके बाद से इस पवित्र जगह का नाम मां आशा देवी पड़ गया. मंदिर के गर्भगृह में मौजूद पुरानी शिला पर जो देवी की आकृति है, उसके बारे में कहा जाता है कि उसे खुद माता सीता ने अपने हाथों से पत्थर पर उकेरा था.

क्या है मंदिर की छत का रहस्य?
इस मंदिर की सबसे बड़ी और हैरान करने वाली बात यह है कि यहां माता रानी खुले आसमान के नीचे ही विराजमान हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक पुराने समय में दो बार इस मंदिर पर पक्की छत डलवाने की कोशिश की गई थी, लेकिन जैसे ही काम पूरा होने को आता था, छत किसी न किसी वजह से गिर जाती थी. इसे चमत्कार माना गया कि मां खुद नहीं चाहती हैं कि वे किसी बंद कमरे या छत के नीचे रहें, बल्कि वे खुले आकाश के नीचे ही अपने भक्तों को दर्शन दें। आज भी मंदिर के ऊपर कोई पक्की छत नहीं है.

मन्नत मांगने का अनोखा तरीका और ईंट रखने की परंपरा
इस मंदिर की एक बहुत ही खास और अलग परंपरा यहां की मन्नत से जुड़ी है. ऐसा माना जाता है कि जो भी भक्त अपनी कोई मनोकामना लेकर आता है, वह मंदिर परिसर में एक ईंट रखकर अपनी अर्जी लगाता है.जब मां के आशीर्वाद से वह इच्छा पूरी हो जाती है, तो भक्त दोबारा यहां आकर उस ईंट को हटाते हैं या अपनी श्रद्धा के अनुसार सेवा करते हैं. इसके अलावा, खास तौर पर संतान सुख की प्राप्ति और परिवार की भलाई के लिए नए जोड़े और दूर-दराज से लोग यहां बड़ी संख्या में हाजिरी लगाने आते हैं.

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About the Author

प्रीति चौहान जीन्यूज में पत्रकार हैं, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड डिजीटल टीम में  ब्रेकिंग, हाइपरलोकल, क्राइम, और अन्य मुद्दों को लेकर खबरें लिखती हैं. 
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