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Jauhar University Case/ आकाश शर्मा: रामपुर के मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी प्रकरण में मुरादाबाद मंडलायुक्त न्यायालय में शुक्रवार को एक अहम सुनवाई हुई. अदालत ने जौहर यूनिवर्सिटी प्रशासन की याचिका पर सुनवाई करते हुए रामपुर जिलाधिकारी कार्यालय को निर्देश दिया है कि अगर यूनिवर्सिटी की ओर से आवेदन किया जाता है, तो उन्हें संबंधित नक्शे और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं.
कोर्ट में यूनिवर्सिटी के वकीलों ने रखा अपना पक्ष
सुनवाई के दौरान जौहर यूनिवर्सिटी के अधिवक्ता जुनैद एहजाज ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि यूनिवर्सिटी के नक्शे और संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज रामपुर डीएम कार्यालय में जमा हैं. उन्होंने कोर्ट से अपील की कि इन दस्तावेजों को रामपुर डीएम कार्यालय से मंगवाया जाए.
क्या है यूनिवर्सिटी पक्ष का कहना?
दरअसल, मंडलायुक्त कोर्ट में पिछले काफी समय से जौहर यूनिवर्सिटी के नक्शे को लेकर बहस और मांग चल रही थी. यूनिवर्सिटी पक्ष का लगातार यह कहना था कि पुलिस और प्रशासन की छापेमारी के बाद उनके कई अहम दस्तावेज गायब हो गए थे या जब्त कर लिए गए थे, जो कि रामपुर प्रशासन के पास सुरक्षित हैं.
साक्ष्य देकर प्राप्त करेंगे दस्तावेज-यूनिवर्सिटी वकील
जौहर यूनिवर्सिटी के अधिवक्ता जुनैद एहजाज का कहना है कि उनके पास इस बात के ठोस सबूत हैं कि दस्तावेज और नक्शा रामपुर डीएम कार्यालय में ही मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि कोर्ट के निर्देशानुसार वे जल्द ही रामपुर प्रशासन के समक्ष आवेदन और आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे. दस्तावेज मिलने के बाद उन्हें अगली सुनवाई में मंडलायुक्त न्यायालय के सामने पेश किया जाएगा.
मामले पर क्या बोले सरकारी वकील?
वहीं, मामले में पैरवी कर रहे सरकारी अधिवक्ता दिनेश चौहान ने मीडिया को बताया कि मंडलायुक्त ने रामपुर जिलाधिकारी को आदेश जारी किए हैं. आदेश के अनुसार, अगर जौहर यूनिवर्सिटी प्रबंधन की तरफ से विधिवत आवेदन आता है, तो उन्हें संबंधित दस्तावेज मुहैया कराए जाएं.
जौहर यूनिवर्सिटी प्रकरण केवल एक शैक्षणिक संस्थान से जुड़ा कानूनी विवाद नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से उत्तर प्रदेश की सियासत और शासन-प्रशासन के बीच खींचतान का एक प्रमुख केंद्र रहा है. मंडलायुक्त न्यायालय का यह ताजा आदेश इस मामले में एक नया मोड़ लेकर आया है, जिससे यूनिवर्सिटी प्रशासन को अपनी कानूनी लड़ाई में एक अहम आधार मिलने की उम्मीद जागी है.
लंबे समय से कागजों और नक्शों के अभाव में उलझे इस मामले में अब गेंद रामपुर जिला प्रशासन के पाले में है. अगर आने वाले दिनों में यूनिवर्सिटी प्रबंधन को संबंधित नक्शे और दस्तावेज मिल जाते हैं, तो इससे न केवल अदालती कार्यवाही की गति तेज होगी, बल्कि संस्थान की निर्माण संबंधी वैधता पर भी स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो सकेगी. अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं कि क्या यूनिवर्सिटी प्रशासन को रामपुर डीएम दफ्तर से नक्शे मिल पाते हैं या नहीं, और आगामी तारीख पर कोर्ट का क्या रुख रहता है.