दिल्ली में दिखेगी यूपी कांग्रेस की ताकत: हर विधानसभा से एक-एक बसें, टिकट के दावेदारों का सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन
दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने बड़ी रैली आयोजित की है. इस रैली के जरिए उत्तर प्रदेश कांग्रेस अपने शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में जुटी है. प्रदेश कांग्रेस के अलग-अलग मोर्चों को कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है.
1 नवंबर का दिन कांग्रेस के लिए बेहद अहम रहने वाला है. दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस और विपक्षी इंडी (INDIA) गठबंधन ने 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली करने की तैयारी में है, जिसको लेकर तैयारियां चरम पर हैं. कांग्रेस के नेतृत्व के साथ विपक्ष के कई बड़े दिग्गज नेता शामिल होने वाले हैं. इस महारैली के केंद्र में उत्तर प्रदेश कांग्रेस है, जो इसे केवल एक रैली न मानकर अपने अब तक के सबसे बड़े सांगठनिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रही है.
हर सीट से एक बस का लक्ष्य
पार्टी आलाकमान ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस को इस रैली में कम से कम 50,000 कार्यकर्ता जुटाने का लक्ष्य दिया है. इस रैली को आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर नेताओं और टिकट के दावेदारों की सांगठनिक क्षमता और उनके जनाधार को परखने का जरिया भी माना जा रहा है. ऐसे में उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों से कम से कम एक-एक बस कार्यकर्ताओं से भरकर दिल्ली रवाना करने का फैसला हुआ है.
इस पूरी योजना को जमीन पर उतारने की कमान संबंधित विधानसभा प्रभारियों को सौंपी गई है. पार्टी के अलग-अलग मोर्चों, विंगों और जिला इकाइयों को 24 घंटे सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कार्यकर्ताओं को दिल्ली पहुंचने में किसी तरह की कोई परेशानी न हो.
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मोर्चों को सौंपी जिम्मेदारी, अल्पसंख्यक मोर्चा रेस
इस महारैली को सफल बनाने के लिए यूपी कांग्रेस के अलग-अलग मोर्चों को जिम्मेदारियां बांटी गई हैं. कांग्रेस यूपी अल्पसंख्यक मोर्चा के उपाध्यक्ष हसीब खान ने बताया कि उन्हें प्रदेश के 15 जिलों का प्रभार सौंपा गया है. उनकी प्राथमिकता है कि उनके प्रभार वाले क्षेत्रों की हर हाल में हर जिले से एक-एक बस दिल्ली पहुंचे. इस रणनीति के जरिए पार्टी संदेश देना चाहती है कि उत्तर प्रदेश का जमीनी कार्यकर्ता पूरी ताकत के साथ दिल्ली के राजनीतिक मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने को तैयार है.
टिकट के दावेदारों की असली परीक्षा
जानकारों का मानना है कि यह महारैली केवल केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध दर्ज कराने का जरिया नहीं है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर नेताओं और टिकट के दावेदारों की सांगठनिक क्षमता और उनके जनाधार को परखने का जरिया भी माना जा रहा है. जो नेता अपनी विधानसभा से अधिक से अधिक भीड़ जुटाकर दिल्ली लाएगा, संगठन की नजर में उसका पलड़ा भारी रहेगा. 1 नवंबर को रामलीला मैदान में उमड़ने वाला यह सैलाब उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के नए सियासी भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा.
(लखनऊ से विशाल रघुवंशी की रिपोर्ट)
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