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नागेन्द्र मणि त्रिपाठी/गोरखपुर: गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ. गोरक्षपीठाधीश्वर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से लेकर सनातन धर्म, गोरक्षपीठ की परंपरा और शिक्षा के क्षेत्र में महंत दिग्विजयनाथ के योगदान का जिक्र किया. सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या का वैभव देखकर रामद्रोही और सनातन विरोधी भ्रम फैलाने का प्रयास करेंगे, इसलिए सनातन धर्मावलंबियों को सतर्क और जागरूक रहना होगा.
अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनकर तैयार
सीएम योगी ने कहा कि 1949 में अयोध्या में रामलला का प्राकट्य तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ जी की देखरेख में बनी रणनीति की परिणति था. उनके मुताबिक यही घटना आगे चलकर श्रीराम मंदिर निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव बनी. मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आज अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बन चुका है, लेकिन उनके अनुसार सनातन विरोधी ताकतें अयोध्या के इस वैभव को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं. सीएम योगी ने रामायण के कालनेमि प्रसंग का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्तमान दौर में भी रामभक्तों और सनातन धर्मावलंबियों को ऐसे लोगों से सावधान रहना होगा, जो भ्रम पैदा करने का प्रयास करते हैं.
किसी प्रकार का भ्रम या संशय नहीं होना चाहिए
सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या और काशी में दिखाई दे रही भव्यता इस बात का परिणाम है कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि इसे लेकर किसी प्रकार का भ्रम या संशय नहीं होना चाहिए. मुख्यमंत्री ने अयोध्या के साथ काशी, विंध्याचल, प्रयागराज और वृंदावन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि काशी में बाबा विश्वनाथ का भव्य धाम, विंध्याचल में मां विंध्यवासिनी धाम, प्रयागराज का कुंभ और वृंदावन का वैष्णव कुंभ इन आयोजनों और धार्मिक स्थलों के वैभव को लेकर दुष्प्रचार और भ्रम फैलाने की कोशिशें हो सकती हैं.
सनातन धर्मावलंबियों से सतर्क रहने की अपील
सीएम ने सनातन धर्मावलंबियों से सतर्क और जागरूक रहने की अपील की. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरक्षपीठ की परंपरा और उसकी भूमिका का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि शैव परंपरा की गोरक्षपीठ समूचे सनातन के लिए समर्पित पीठ है और यहां किसी पंथ, संप्रदाय, व्यक्ति या जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता. सीएम के मुताबिक, अलग-अलग पंथ और संप्रदाय अपनी विशिष्ट उपासना पद्धति का पालन कर सकते हैं, लेकिन सबके कल्याण का आधार व्यापक सनातन परंपरा है.
सीएम योगी ने दिया एकजुटका संदेश
मुख्यमंत्री योगी ने एकजुटता का संदेश देते हुए कहा कि वसुधैव कुटुंबकम की भावना को साकार करने के लिए सभी पंथों और संप्रदायों को एक भाव, एक स्वर और एक साथ आगे बढ़ना होगा. उन्होंने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों में एक साथ चलने का सामर्थ्य पैदा हो जाए तो दुनिया की कोई भी ताकत देश के सामने टिक नहीं पाएगी. साथ ही सीएम ने अलग-अलग स्वर और अलग-अलग गति से आगे बढ़ने को दुर्गति का कारण बनने की बात कही. श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री योगी ने महंत दिग्विजयनाथ के शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को भी विस्तार से याद किया. उन्होंने कहा कि देश की गुलामी के दौर में सीमित संसाधनों के बावजूद महंत दिग्विजयनाथ ने शिक्षा के क्षेत्र में दूरगामी कार्य शुरू किए.
महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना का जिक्र
1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना से लेकर बालिका शिक्षा और संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने तक उनके प्रयासों का सीएम ने उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ का मानना था कि गोरक्षपीठ की संपत्ति का उपयोग लोक कल्याण के कार्यों में होना चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि संत और महापुरुष केवल वर्तमान के लिए नहीं सोचते, बल्कि उनके कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत नींव तैयार करते हैं. उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से जुड़ी 50 से अधिक संस्थाओं का आह्वान किया कि वे महंत दिग्विजयनाथ के आदर्शों को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाएं.