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यूरोप में बुर्का बैन पर यूपी में रार: मौलानाओं ने बताया सुरक्षा, तो अयोध्या-मथुरा के संतों ने दागे तीखे सवाल

Burqa Ban Controversy: यूरोप के कई देशों में बुर्के पर प्रस्तावित पाबंदी के बाद भारत में इस मुद्दे पर तीखी बहस छिड़ गई है. शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास और देवबंदी मौलाना कारी इसहाक ने बुर्के को महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा बताते हुए इस फैसले का विरोध किया है. वहीं, हिंदू संतों और श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास ने इन तर्कों को संकीर्ण मानसिकता करार देते हुए महिलाओं को पर्दे में कैद रखने की वकालत का कड़ा विरोध किया है.

Edited By Preeti Chauhan
Published: Sep 22, 2026, 01:04 PM IST | Updated: Sep 22, 2026, 01:10 PM IST
Image Credit: Burqa Ban Controversy UP
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Burqa Controversy in UP: 

लखनऊ/अयोध्या/मथुरा: यूरोप के कई देशों और इटली में स्कूलों व सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का और नकाब को प्रतिबंधित (Burqa Ban) करने की चर्चाओं का असर अब भारत की राजनीति और धर्मगुरुओं के बयानों में साफ देखने को मिल रहा है. एक तरफ जहां मुस्लिम धर्मगुरु बुर्के का समर्थन करते हुए इसे महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा बता रहे हैं, वहीं हिंदू धर्मगुरुओं और संतों ने इन तर्कों पर तीखा पलटवार किया है.

'यूरोप की पाबंदी इस्लाम से नफरत का प्रतीक': मौलाना यासूब अब्बास
शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने यूरोप के करीब 24 स्थानों पर बुर्के को प्रतिबंधित करने के प्रयासों पर कड़ा ऐतराज जताया है. उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से इस्लाम विरोधी मानसिकता को दर्शाता है.

मौलाना शिया धर्मगुरु यासूब अब्बास ने कहा, "जिस तरीके से इटली में बुरखे पर बैन लगा है और यूरोप के तकरीबन 24 जगह पर बुरखे को बैन करने की बात हो रही है। इससे पूरी तरीके से मानसिकता का पता चल रहा है कि इस्लाम धर्म से कितनी नफरत है। इस्लाम ने औरत को एक ज्वेलरी की तरह समझा है। इस्लाम ने औरत को सम्मान दिया है, इस्लाम ने औरत को इज्जत दी है। बुर्के का मतलब यह नहीं है कि औरत को पिंजरे की चिड़िया बना के घर में बिठा दिया जाए...लोग कहते हैं बुरखे से कट्टरता फैलती है, असल में ये उनके मानसिकता की बात है, ना इस्लाम की विचारधारा की बात है, ना बुर्के की बात है।

देवबंदी मौलाना की दलील: 'इस्लाम में कीमती चीज ढकी जाती है'
उधर, सहारनपुर के देवबंदी धर्मगुरु मौलाना कारी इसहाक गौरा ने भी बुर्के और नकाब का खुलकर समर्थन किया. उन्होंने कहा कि इस्लाम में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को सर्वोपरि रखा गया है. मौलाना ने तर्क देते हुए कहा कि जिस तरह दुनिया में किसी भी कीमती चीज को संभालकर और ढककर रखा जाता है, ठीक उसी तरह इस्लाम में भी महिलाओं के लिए कहा गया है कि वे खुद को छिपाकर और पर्दे में रखें.

देवबंदी मौलाना के बयान पर भड़के हिंदू संत, साधा निशाना
मुस्लिम धर्मगुरुओं के इन तर्कों पर अयोध्या और मथुरा के संतों की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है.

संतों का ऐतराज (अयोध्या): अयोध्या में संत विष्णुदास महंत और अंतरराष्ट्रीय कथावाचक इंद्रेश कौशिक ने मुस्लिम धर्मगुरुओं के बयानों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि आधुनिक समाज में महिलाओं की स्वतंत्रता और उनके अधिकारों को किसी बंदिश में नहीं बांधा जाना चाहिए.  ऐसे मौलानाओं की हिंदुस्तान में कोई जगह नहीं होनी चाहिए.

फलाहारी महाराज का पलटवार (मथुरा): श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने देवबंदी मौलाना कारी इसहाक गौरा के बयान पर कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने मौलाना पर निशाना साधते हुए कहा कि महिलाओं की तुलना बेजान चीजों या वस्तुओं से करना ही संकीर्ण मानसिकता का सबूत है. महिलाओं को स्वतंत्र कीजिए. भारत और दुनिया में आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं.

यूरोप में बुर्के को लेकर शुरू हुई बहस ने भारत में धार्मिक और सामाजिक वैचारिक मतभेदों को एक बार फिर सतह पर ला दिया है. एक तरफ जहां मुस्लिम धर्मगुरु इसे धार्मिक स्वतंत्रता और महिलाओं के सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं हिंदू संत और आलोचक इसे रुढ़िवादिता करार देकर इस पर सवाल उठा रहे हैं.

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About the Author

प्रीति चौहान जीन्यूज में पत्रकार हैं, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड डिजीटल टीम में  ब्रेकिंग, हाइपरलोकल, क्राइम, और अन्य मुद्दों को लेकर खबरें लिखती हैं. 
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