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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर अब बीजेपी लगातार मौजूदा विधायकों के टिकट पर मंथन कर रही है. अलग-अलग राज्यों और यूपी के पुराने समीकरणों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इन्हीं समीकरणों के आधार पर मौजूदा विधायकों के टिकट कंफर्म होंगे या काटे जाएंगे.
2027 में जीत की हैट्रिक लगाने और लोगों की नाराजगी दूर करने के लिए भाजपा नए चेहरों पर दांव लगाने की तैयारी में है. यूपी में गुजरात, मध्य प्रदेश, हरियाणा और असम का पैटर्न अपनाने के संकेत भाजपा से लगातार मिल रहे हैं. इन राज्यों में भाजपा तीन या इससे ज्यादा बार से लगातार सत्ता में वापसी करती रही है. वहां एंटी-इंकंबेंसी से निपटने के लिए बड़ी संख्या में विधायकों के टिकट काटती रही है. भाजपा ने संकेत दिए हैं कि इस बार मौजूदा 40 फीसदी विधायकों के टिकट कट सकते हैं.
बिहार, असम, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और गुजराज में आए चुनावी नतीजों पर नजर डालें तो बिहार 2025 के चुनाव में भाजपा ने अपने 74 विधायकों में से 17 के टिकट (22.97%) काटे, जिनमें से 15 पर पार्टी फिर जीती. 4 सीटें सहयोगियों को दी गईं, जहां जदयू और लोजपा जीते. भाजपा ने 101 में से 89 सीटों पर जीत दर्ज की. वहीं, असम 2026 चुनाव की बात करें तो यहां 64 विधायकों में से 19 के टिकट (29.69%) काटे. नतीजा, इन सभी सीटों पर फिर जीत हासिल की. 126 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा गठबंधन ने 102 सीटें जीतीं.

राजस्थान 2023 चुनाव की बात करें तो सत्ता में वापसी के लिए भाजपा ने अपने 73 विधायकों में से 12 के टिकट (16.44%) काटे. इनमें से 4 पर जीत मिली, जबकि 3 सीटों पर बागी प्रत्याशी जीत गए. पश्चिम बंगाल 2026 चुनाव में 2021 के 77 विधायकों में से दल-बदल के बाद पार्टी के पास 65 विधायक रह गए थे. इनमें से 19 के टिकट (29.23%) काटे गए और उन सभी सीटों पर भाजपा फिर से जीतने में सफल रही.
गुजरात 2022 चुनाव से एक साल पहले 2021 में भाजपा ने मुख्यमंत्री विजय रूपाणी समेत पूरा मंत्रिमंडल बदल दिया. भूपेंद्र पटेल को नया सीएम बनाया. 2022 के चुनाव से पहले पार्टी के पास 112 विधायक थे. एंटी-इंकंबेंसी से बचने के लिए 45 विधायकों (40.18%) के टिकट काटे गए, जिनमें से 43 सीटों (95.56%) पर जीत मिली. कुल 182 में से भाजपा ने रिकॉर्ड 156 सीटें जीतीं. मध्य प्रदेश 2023 में उतरते समय पार्टी के विधायकों की संख्या 130 थी. पार्टी ने 33 विधायकों (25.38%) के टिकट काटे, जिनमें से 26 सीटों पर जीत मिली. कुल 230 सीटों में से भाजपा ने 164 सीटें जीतीं. हरियाणा 2024 चुनाव में जीत की हैट्रिक की चुनौती के बीच भाजपा ने अपने 40 में से 14 विधायकों (35%) के टिकट काटे, जिनमें से 12 सीटों पर जीत मिली. 90 सदस्यों वाली विधानसभा में पार्टी ने 48 सीटें हासिल कीं.
2024 का लोकसभा चुनाव यूपी भाजपा के लिए बहुत बड़ा संदेश दे गया है. लगातार 10 साल सांसद रहने के बाद भी जब भाजपा ने तीसरी बार प्रत्याशी बनाया, तो उनमें से ज्यादातर हार गए. 2024 के चुनाव में जनता की नाराजगी भाजपा के लिए उतनी नहीं थी, जितनी स्थानीय प्रत्याशियों के खिलाफ थी. इसके बावजूद भाजपा ने उस अनुपात में टिकट नहीं काटे. यही कारण रहा कि भाजपा के केवल 33 सांसद ही जीत सके. इनमें 11 सीटें वे थीं, जहां पार्टी ने टिकट काटकर नए चेहरों को मौका दिया था.
2027 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा के सामने यही चुनौती होगी. वर्तमान में भाजपा के 186 विधायक ऐसे हैं, जो दो या उससे ज्यादा कार्यकाल से जीत रहे हैं. जबकि, केवल 69 विधायक पहली बार जीतने वाले हैं. भाजपा ने 2022 में नाराजगी से बचने के लिए 104 मौजूदा विधायकों के टिकट काटे थे. यह लगभग 32% होता है. इनमें से 80 सीटों पर वह फिर से जीत गई. यानी 77% सीटें जीत लीं. वहीं, दोबारा मौका पाए 205 विधायकों में से 175 यानी 85.37% जीतने में सफल रहे. 30 विधायकों को हार का सामना करना पड़ा.
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने यूपी की 80 में से 71 सीटें जीती थीं. 2019 में पार्टी के सामने अपना पुराना प्रदर्शन दोहराने की चुनौती थी. इस बार भाजपा ने 21 मौजूदा सांसदों के टिकट काट दिए, 4 सांसदों की सीट बदल दी. यानी पार्टी ने करीब 35% सीटों पर अपने उम्मीदवार बदल दिए. इसका फायदा भी मिला, जिन 21 सीटों पर नए उम्मीदवार उतारे गए थे, उनमें से 14 पर भाजपा जीत गई. वहीं, जिन 4 सांसदों की सीट बदली गई थी, उनमें से 3 भी चुनाव जीतने में सफल रहे. कुल मिलाकर भाजपा ने 2019 में यूपी की 62 सीटें जीतीं. यानी 2014 के मुकाबले सिर्फ 9 सीटों का नुकसान हुआ.

2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपने 62 सांसदों में से 16 के टिकट काटे. इनमें से 11 सीटों पर पार्टी नए उम्मीदवारों के साथ जीतने में सफल रही. इसके अलावा, पिछली बार हारी हुई 4 सीटों पर नए चेहरों को मौका दिया गया. इनमें से 2 सीटों पर भाजपा जीत गई.
राजनीतिक विशेषज्ञ रुद्र दुबे ने बताया कि असम, हरियाणा, गुजरात और मध्य प्रदेश के औसतन 30 से 40% टिकट काटने के आंकड़े को यूपी पर लागू किया जाए, तो यह संख्या लगभग 102 विधायकों तक पहुंचती है. 2022 के चुनाव में भी भाजपा ने 104 विधायकों के टिकट काटे थे. फिलहाल विधायकों के टिकट बड़ी संख्या में कटने के कई संकेत दिखाई पड़ रहे है.
ये भी दे रहे संकेत
- भाजपा ने राज्यसभा चुनावों में बड़े चेहरों की चकाचौंध से बचते हुए सभी नए चेहरों को प्रत्याशी बनाया.
- यूपी प्रदेश अध्यक्ष की घोषित टीम में 70% चेहरों को बदल दिया गया.
- प्रदेश के महामंत्रियों और उपाध्यक्षों में बदलाव किया गया.
- प्रदेश के सभी 6 क्षेत्रीय अध्यक्षों को एक साथ हटाकर नए चेहरों को कमान सौंपी गई.

2017 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के पास 47 विधायक थे. चुनाव में पार्टी ने इनमें से 12 के टिकट काट दिए थे, जो करीब 25.53% होता है. 35 विधायकों को फिर से चुनावी मैदान में उतारा था. भाजपा का यह दांव काम कर गया. परिणाम आया, तो बदलाव वाली सभी 12 सीटों पर भाजपा जीतने में सफल रही, यानी इन सीटों पर 100% सफलता मिली. भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट काटने और देने का पैमाना दो तरह से तय किया है. यूपी में भाजपा के पास 2 तरह के विधायक हैं.
जो पार्टी संगठन से आए हैं और भाजपा लहर के बल पर जीतते रहे हैं. इनमें से कई विधायकों ने 5 साल यह बहाना बनाकर काम नहीं किया कि सरकार में उनकी सुनवाई नहीं होती. ऐसे विधायकों के टिकट कटने पर पार्टी को कोई खास नुकसान नहीं होगा. न ही कोई बड़ा विरोध देखने को मिलेगा.
जिनका अपने क्षेत्र और सामाजिक समीकरणों में मजबूत जनाधार है. वे जनता के बीच सक्रिय रहे और जरूरत पड़ने पर अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करने से नहीं चूके. ऐसे विधायकों का टिकट कटने पर पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है. ऐसे में सवाल ये है कि एंटी-इनकंबेंसी से बचने के लिए विधायकों के टिकट काटने का यह फॉर्मूला यूपी जैसे जातिगत समीकरण वाले राज्य में कितना सफल होगा?
(लखनऊ से विशाल सिंह की रिपोर्ट)