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नफरत के दौर में अनोखा पैगाम: मुस्लिम महिला की मौत पर दिखा भाईचारे का रंग, बिजनौर में टली रामलीला

Bijnor News: बिजनौर के मोहड़ा गांव में भाई चारे की मिसाल देखने को मिली है. यहां 85 साल की मुस्लिम महिला की मौत पर गांव वालों ने रामलीला का मंचन टालने का फैसला किया.

Written By Amitesh Pandey
Published: Oct 12, 2026, 06:07 PM IST | Updated: Oct 12, 2026, 06:21 PM IST
Image Credit: Bijnor News
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राजवीर चौधरी/बिजनौर: समाज में जब नफरत की दीवारें खड़ी करने की कोशिशें होती हैं, तब आपसी प्रेम, सम्मान और भाईचारे की छोटी-सी पहल भी उम्मीद की बड़ी किरण बन जाती है. ऐसा ही एक खूबसूरत उदाहरण बिजनौर जिले के धामपुर क्षेत्र के गांव मोहड़ा में देखने को मिला. यहां एक मुस्लिम महिला के निधन पर गांव में शुरू होने जा रही रामलीला का मंचन एक दिन के लिए स्थगित कर दिया गया. गांव के इस फैसले ने सांप्रदायिक सौहार्द, सामाजिक एकता और इंसानियत की उस परंपरा को सामने रखा, जिसमें धर्म से पहले रिश्तों और संवेदनाओं को महत्व दिया जाता है.

रामलीला मंचन को टालने का फैसला 
दरअसल, गांव मोहड़ा में रामलीला का मंचन शुरू होने जा रहा था. आयोजन को लेकर तैयारियां पूरी थीं और ग्रामीणों में उत्साह का माहौल था. इसी बीच गांव की रहने वाली गफूरन खातून का इंतकाल हो गया. उनके निधन की खबर से गांव में शोक की लहर दौड़ गई. गफूरन को गांव के लोग केवल एक मुस्लिम महिला के रूप में नहीं, बल्कि अपने परिवार की सदस्य की तरह सम्मान देते थे. उनके जाने का दुख पूरे गांव ने साझा किया.

85 साल की गफूरन का इलाज के दौरान मौत 
बिजनौर का मोहड़ा गांव ने सांप्रदायिक एकता की मिसाल पेश की है. अब ये गांव गंगा जमुना तहजीब के नाम से जाना जाने लगा है. ग्राम प्रधान प्रधान ऋषिपाल सिंह ने बताया कि इसी गांव की रहने वाली 85 साल की गफूरन की इलाज के दौरान मौत हो गई. एंबुलेंस की बजती सायरन गांव से होकर गुजर रही थी कि रामलीला मंचन की तेज आवाज से हो रहे कार्यक्रम को टालने का फैसला लिया गया.

शोक में शामिल होने का फैसला 
आदर्श रामलीला कमेटी ने रामलीला मंचन को गफूरन की मौत की वजह से बीच में ही रोक दिया. हिंदू समाज व रामलीला कमेटी के लोग रामलीला के कार्यक्रम को छोड़कर मृतक के परिवार को घर पहुंच कर उनके गम में शामिल होकर गंगा जमुना तहजीब की मिसाल पेश की गई. गफूरन खातून के इंतकाल के बाद ग्रामीणों ने शोक में शामिल होने का फैसला किया. ग्राम प्रधान ऋषिपाल ने बताया कि गफूरन खातून उनके लिए बुआ जैसी थीं. 

आदर्श रामलीला कमेटी के फैसले का समर्थन 
वहीं, गांव वालों ने भी आदर्श रामलीला कमेटी के फैसले का समर्थन किया है. गांव वालों का कहना है कि दुख की इस घड़ी में हम लोग उस परिवार के साथ हैं. बताया गया कि पहले भी इस गांव के लोगों ने भाई चारे की मिसाल दे चुके हैं.

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About the Author

अमितेश कुमार पांडेय डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सीनियर सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से ताल्लुक रखने वाले अमितेश को मीडिया जगत में 8 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.अमितेश के पास डेस्क एडिटिंग के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से ग्राउंड रिपोर्टिंग का भी व्यावहारिक अनुभव है. अमितेश ने उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों- लखनऊ, प्रयागराज और गाज़ियाबाद में जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है. स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ पेपर अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान में काम करने का अनुभव है. अमितेश ने पत्रकारिता की पढ़ाई प्रयागराज से की है.अमितेश पांडेय से आप amitesh.pandey@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप अमितेश से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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