नफरत के दौर में अनोखा पैगाम: मुस्लिम महिला की मौत पर दिखा भाईचारे का रंग, बिजनौर में टली रामलीला
Bijnor News: बिजनौर के मोहड़ा गांव में भाई चारे की मिसाल देखने को मिली है. यहां 85 साल की मुस्लिम महिला की मौत पर गांव वालों ने रामलीला का मंचन टालने का फैसला किया.
राजवीर चौधरी/बिजनौर: समाज में जब नफरत की दीवारें खड़ी करने की कोशिशें होती हैं, तब आपसी प्रेम, सम्मान और भाईचारे की छोटी-सी पहल भी उम्मीद की बड़ी किरण बन जाती है. ऐसा ही एक खूबसूरत उदाहरण बिजनौर जिले के धामपुर क्षेत्र के गांव मोहड़ा में देखने को मिला. यहां एक मुस्लिम महिला के निधन पर गांव में शुरू होने जा रही रामलीला का मंचन एक दिन के लिए स्थगित कर दिया गया. गांव के इस फैसले ने सांप्रदायिक सौहार्द, सामाजिक एकता और इंसानियत की उस परंपरा को सामने रखा, जिसमें धर्म से पहले रिश्तों और संवेदनाओं को महत्व दिया जाता है.
रामलीला मंचन को टालने का फैसला
दरअसल, गांव मोहड़ा में रामलीला का मंचन शुरू होने जा रहा था. आयोजन को लेकर तैयारियां पूरी थीं और ग्रामीणों में उत्साह का माहौल था. इसी बीच गांव की रहने वाली गफूरन खातून का इंतकाल हो गया. उनके निधन की खबर से गांव में शोक की लहर दौड़ गई. गफूरन को गांव के लोग केवल एक मुस्लिम महिला के रूप में नहीं, बल्कि अपने परिवार की सदस्य की तरह सम्मान देते थे. उनके जाने का दुख पूरे गांव ने साझा किया.
85 साल की गफूरन का इलाज के दौरान मौत
बिजनौर का मोहड़ा गांव ने सांप्रदायिक एकता की मिसाल पेश की है. अब ये गांव गंगा जमुना तहजीब के नाम से जाना जाने लगा है. ग्राम प्रधान प्रधान ऋषिपाल सिंह ने बताया कि इसी गांव की रहने वाली 85 साल की गफूरन की इलाज के दौरान मौत हो गई. एंबुलेंस की बजती सायरन गांव से होकर गुजर रही थी कि रामलीला मंचन की तेज आवाज से हो रहे कार्यक्रम को टालने का फैसला लिया गया.
शोक में शामिल होने का फैसला
आदर्श रामलीला कमेटी ने रामलीला मंचन को गफूरन की मौत की वजह से बीच में ही रोक दिया. हिंदू समाज व रामलीला कमेटी के लोग रामलीला के कार्यक्रम को छोड़कर मृतक के परिवार को घर पहुंच कर उनके गम में शामिल होकर गंगा जमुना तहजीब की मिसाल पेश की गई. गफूरन खातून के इंतकाल के बाद ग्रामीणों ने शोक में शामिल होने का फैसला किया. ग्राम प्रधान ऋषिपाल ने बताया कि गफूरन खातून उनके लिए बुआ जैसी थीं.
आदर्श रामलीला कमेटी के फैसले का समर्थन
वहीं, गांव वालों ने भी आदर्श रामलीला कमेटी के फैसले का समर्थन किया है. गांव वालों का कहना है कि दुख की इस घड़ी में हम लोग उस परिवार के साथ हैं. बताया गया कि पहले भी इस गांव के लोगों ने भाई चारे की मिसाल दे चुके हैं.