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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक हत्या के दोषी की आजीवन कारावास की सजा को निलंबित कर दिया है. ट्रायल कोर्ट से दोषी ठहराए गए नंदलाल राय उर्फ बबलू राय ने हाईकोर्ट में सजा के खिलाफ दाखिल अपील में कहा कि वह उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों में एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में या संभवतः भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहता है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला
दोषी ठहराए गए नंदलाल की अपील पर जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की डिविजन बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न जन प्रतिनिधियों की दोषसिद्धि पर रोक लगाते हुए यह माना है कि राजनेताओं का अपने मतदाताओं के प्रति एक विशेष कर्तव्य होता है और दोषसिद्धि पर रोक प्राप्त करने में विफलता चुनाव लड़ने के अवसर से वंचित होने का कारण बन सकती है. इस प्रकार न्यायालय ने नंदन लाल राय को जमानत दे दी, जिसे अप्रैल 2025 में वाराणसी की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.
राम जन्मभूमि आंदोलन के सदस्य प्रमोद कुमार निगम की हत्या का दोषी
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह तर्क दिया गया कि अभियोजन पक्ष का मामला काफी हद तक परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है. वकील ने जांच में उनके नाम के देर से खुलासा होने, संदिग्ध प्रत्यक्षदर्शी गवाही और हत्या के हथियार की संदिग्ध बरामदगी की ओर भी इशारा किया. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राम जन्मभूमि आंदोलन के सक्रिय सदस्य प्रमोद कुमार निगम की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए लोगों में नन्दलाल राय भी शामिल थे. मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि राय का संबंध गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी से था.
2027 का विधानसभा चुनाव लड़ना चाहता है
हालांकि, अपीलकर्ता के वकील ने बताया कि वह अपनी सजा से पहले भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता थे और 2027 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में या यदि संभव हो तो भाजपा से" चुनाव लड़ना चाहते हैं. हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा, "आम आदमी के आजीविका के अधिकार को ध्यान में रखते हुए, जो किसी राजनेता के चुनाव लड़ने के अधिकार से कम महत्वपूर्ण नहीं है, अपीलकर्ता की दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाई जानी चाहिए, ताकि वह अपनी अपील में अंतिम निर्णय सुनने तक जीवित रह सके.
(प्रयागराज से मोहम्मद गुफरान की रिपोर्ट)