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विशाल सिंह/लखनऊ: समाजवादी परिवार (Samajwadi Family) में ‘चाचा आउट, भतीजा इन’! लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष पद पर करीब 9 साल से काबिज शिवपाल सिंह यादव (Shivpal singh yadav) को हटा दिया गया है. अब उनकी जगह सपा प्रमुख अखिलेश यादव को लोहिया ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया है.शिवपाल सिंह यादव वर्ष 2017 से ट्रस्ट के अध्यक्ष थे. अब अखिलेश यादव के पास समाजवादी पार्टी के साथ लोहिया ट्रस्ट और जनेश्वर ट्रस्ट, तीनों की कमान आ गई है.
अखिलेश के हाथ लोहिया ट्रस्ट और जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट की भी कमान
अब अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के पास सपा के साथ लोहिया ट्रस्ट और जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट की भी कमान आ गई है. ट्रस्ट में अखिलेश के अलावा शिवपाल यादव, दीपक मिश्रा, आदित्य यादव, राम नरेश यादव, रामसेवक यादव, वीरपाल यादव और राजेश यादव सदस्य हैं. लोहिया ट्रस्ट में यह बदलाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसकी पृष्ठभूमि समाजवादी परिवार में वर्ष 2017 में हुए विवाद से जुड़ी रही है.
2017 के विवाद की पृष्ठभूमि
2017 में जब पार्टी और परिवार में अंदरूनी कलह हुई थी, तब मुलायम सिंह यादव ने प्रो. रामगोपाल यादव (Ram gopal Yadav) को हटाकर शिवपाल यादव को यह जिम्मेदारी दी थी. अब करीब 9 साल बाद स्थिति पूरी तरह पलट गई है. इसके बाद से शिवपाल लगातार ट्रस्ट के अध्यक्ष बने हुए थे.
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अखिलेश यादव को शिवपाल यादव पर भरोसा नहीं है. शिवपाल यादव पहले पार्टी छोड़कर चले गए थे. फिर खुद की पार्टी बनाई और सपा को चोर उचक्कों और जमीन कब्जाने वालों की पार्टी बताया था. ऐसे में अखिलेश यादव ने अब शिवपाल यादव को ट्रस्ट से बाहर निकाल दिया है.
कब हुआ था लोहिया ट्रस्ट का गठन?
लोहिया ट्रस्ट (Lohia Trust) का गठन 1992 में (समाजवादी पार्टी की स्थापना से ठीक पहले) किया गया था. डॉ. राममनोहर लोहिया के विचारों और समाजवादी विचारधारा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिवंगत मुलायम सिंह यादव और उनके सहयोगियों द्वारा इस ट्रस्ट को स्थापित किया गया था. समाजवादी पार्टी (SP) की औपचारिक स्थापना अक्टूबर 1992 में हुई थी, जबकि लोहिया ट्रस्ट का गठन समाजवादी पार्टी के अस्तित्व में आने से पहले ही कर लिया गया था.
विचारधारा का प्रचार-प्रसार
महान समाजवादी चिंतक डॉ. राममनोहर लोहिया (Dr Ram manohar lohiya) के सिद्धांतों, सामाजिक न्याय और समाजवादी विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाना.
बौद्धिक व सामाजिक गतिविधियां
समाजवादी साहित्य के प्रकाशन, वैचारिक संगोष्ठियों (seminars) और अध्ययनों का आयोजन करना.
रणनीतिक व वित्तीय आधार
पार्टी के लिए एक मजबूत वैचारिक मंच तैयार करने के साथ-साथ शुरुआती दौर में संगठनात्मक गतिविधियों और संसाधनों (फंड Management) को प्रबंधित करना.
अखिलेश के हाथ में सपा के साथ दोनों प्रमुख ट्रस्टों की कमान आने को समाजवादी परिवार और पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन के लिहाज से बड़ा बदलाव माना जा रहा है.