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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद लंबे समय से खामोश चल रहे पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी है. शुक्रवार को सोशल मीडिया पर बसपा सुप्रीमो मायावती के नाम एक भावुक और खुला पत्र जारी करते हुए आकाश आनंद ने अपने दूसरे दल में जाने की तमाम अटकलों को खारिज कर दिया. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे न तो आज किसी दूसरी पार्टी में जा रहे हैं और ना ही कभी जाएंगे.
'मेरी खामोशी को गलत समझा गया, मांगी क्षमा'
आकाश आनंद ने पत्र में लिखा कि बसपा सुप्रीमो मायावती उनकी राजनीतिक गुरु, प्रेरणा और "बुआ मां" हैं. उन्होंने राजनीति में जो कुछ भी सीखा है, वह उन्हीं के मार्गदर्शन में सीखा है. अपनी हालिया चुप्पी पर सफाई देते हुए आकाश ने कहा कि मेरी खामोशी को मीडिया और सोशल मीडिया में गलत समझा गया, जिससे तरह-तरह की अफवाहों को जगह मिली. मैंने खुद को सोशल मीडिया से दूर कर लिया था, जिस वजह से आपकी पोस्ट को रिपोस्ट नहीं कर पाया. अगर इससे आपको कोई ठेस पहुंची है, तो मैं उसके लिए क्षमा मांगता हूं.
परम आदरणीय बहन जी,
आप मेरी राजनैतिक गुरु हैं, मेरी प्रेरणा हैं, और मेरी बुआ माँ भी हैं।
राजनीति में मैंने जो कुछ सीखा, वो आप से ही सीखा, जो कुछ किया, आपके मार्गदर्शन में किया। इसलिए आज अपनी बात सीधे आपके सामने और पूरे बहुजन समाज के सामने रखना चाहता हूँ।
पिछले कुछ दिनों से…— Akash Anand (@AnandAkash_BSP) October 2, 2026
'रिश्ते अपनी जगह, मिशन सबसे बड़ा'
अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निकाले जाने के मायावती के फैसले पर आकाश आनंद ने पूरा समर्थन जताया. उन्होंने कहा कि पारिवारिक और व्यक्तिगत हितों से ऊपर पार्टी और बहुजन आंदोलन का हित रखना उनकी जिम्मेदारी है. आकाश ने लिखा,ससुर जी के संन्यास का आपका फैसला बिल्कुल उचित है और मैं उस फैसले के साथ खड़ा हूं. रिश्ते अपनी जगह हैं, लेकिन मिशन उनसे कहीं बड़ा है.
आचरण और मेहनत से साबित करूंगा निष्ठा
पत्र के अंत में आकाश आनंद ने मायावती के नेतृत्व में फिर से पार्टी और बहुजन मिशन की सेवा करने का मौका मांगा.उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर का मिशन, मान्यवर कांशीराम का रास्ता और मायावती का नेतृत्व ही उनकी राजनीति का आधार है. वे शब्दों से नहीं, बल्कि अपने काम, आचरण और मेहनत से अपनी निष्ठा को साबित करेंगे.