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आकाश आनंद की 21 महीने की सियासी टाइमलाइन: 3 बार OUT, 2 बार IN... अब मायावती ने हमेशा के लिए बंद किया रास्ता?

Akash Anand BSP Timeline: उत्तर प्रदेश की सियासत में 'मायावती का फैसला और बसपा का अनुशासन' हमेशा से अप्रत्याशित रहा है, लेकिन आकाश आनंद के मामले में जो कुछ हुआ, उसने बहुजन समाज पार्टी के इतिहास का सबसे बड़ा उथल-पुथल मचाकर रख दी है...

आकाश आनंद की 21 महीने की सियासी टाइमलाइन: 3 बार OUT, 2 बार IN... अब मायावती ने हमेशा के लिए बंद किया रास्ता?
Image Credit: Akash Anand Political Career Graph

विशाल सिंह/Akash anand bsp political journey: बहुजन समाज पार्टी के भीतर चल रहा हाई-प्रोफाइल सियासी ड्रामा अब अपने सबसे नाटकीय और कड़े मोड़ पर पहुंच चुका है! भतीजे आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य को बचाने के लिए उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ ने मायावती की शर्त मानते हुए राजनीति से संन्यास का ऐलान कर दिया. लेकिन मायावती का फैसला उससे भी ज्यादा सख्त निकला-उन्होंने इसे 'देर से लिया गया फैसला' करार देते हुए आकाश आनंद को पार्टी से ही बाहर का रास्ता दिखा दिया. लगभग 21 महीनों में आकाश आनंद का सियासी ग्राफ कैसे अर्श से फर्श पर पहुंचा आइए जानते हैं.

आकाश के सियासी ग्राफ गिरने की कहानी- आकाश आनंद को कब-कब जिम्मेदारी दी और कब हटाया?

10 दिसंबर 2023: उत्तराधिकारी घोषित
कहानी शुरू हुई थी 10 दिसंबर 2023 को, जब मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को अपना उत्तराधिकारी और नेशनल कोऑर्डिनेटर घोषित कर बसपा का भविष्य बताया था. लेकिन महज 21 महीनों के भीतर आकाश का सियासी ग्राफ इतनी तेजी से बदला कि तीन बार उन्हें पदों से हटाया गया, दो बार उनकी वापसी हुई, और आखिरकार आज उन्हें पार्टी से ही निष्कासित कर दिया गया.

मई 2024 के लोकसभा चुनाव में आक्रामक बयानों के चलते जब मायावती ने उन्हें 'अपरिपक्व' बताकर हटाया, तो 47 दिन बाद जून 2024 में उनकी वापसी हुई. फिर मार्च 2025 में ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में आने का आरोप लगाकर उन्हें बाहर किया गया, लेकिन अप्रैल और अगस्त 2025 में फिर से माफी देकर 'चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर' और 'राष्ट्रीय संयोजक' जैसी बड़ी जिम्मेदारियां सौंप दी गईं.

लेकिन असली मोड़ आया 3 सितंबर को, जब मायावती ने एक बार फिर आकाश को अपरिपक्व बताकर जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया. आकाश ने अपने 'X' हैंडल पर पहले 'BSP वर्कर' और फिर 'BSP सपोर्टर' लिखा, तो दूसरी तरफ 4 सितंबर को मायावती ने अपने दूसरे भतीजे ईशान आनंद को मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाकर बड़ा सियासी संदेश दे दिया.

सोशल मीडिया पर 'उम्मीद का आकाश' कैंपेन चलता रहा... 9 सितंबर को मायावती ने शर्त रखी कि ससुर अशोक सिद्धार्थ राजनीति छोड़ेंगे तभी आकाश की वापसी होगी. आज सुबह (10 सिंतबर 2026) को अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास का ऐलान भी कर दिया, लेकिन महज एक घंटे बाद मायावती का वो चाबुक चला जिसने सबको चौंका दिया! मायावती ने कहा, 'यह फैसला बहुत देर से लिया गया है' और आकाश आनंद को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया.

साफ है, बीएसपी में अब 'अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद चैप्टर' पूरी तरह क्लोज हो चुका है और ईशान आनंद की एंट्री के साथ मायावती ने यह साबित कर दिया है कि बसपा में अनुशासन और फैसले सिर्फ और सिर्फ 'बहनजी' की मर्जी से तय होते हैं...

आकाश आनंद का 21 महीने का सियासी टाइमलाइन 
उत्तराधिकारी घोषित-10 दिसंबर 2023
मायावती ने आकाश आनंद को अपना उत्तराधिकारी और नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया।

पहली बार पदों से हटाए गए
07 मई 2024
चुनाव प्रचार के दौरान बयानों के बाद 'अपरिपक्व' करार देकर जिम्मेदारी वापस ली।

पहली वापसी
23 जून 2024
47 दिन बाद मायावती ने फैसला बदला, दोबारा उत्तराधिकारी बनाया।

पार्टी से बाहर किया
02-03 मार्च 2025
ससुर के प्रभाव में अहंकारी होने का आरोप लगाकर पार्टी से बेदखल किया।

दूसरा मौका और चीफ कोऑर्डिनेटर
13 अप्रैल 2025
माफी के बाद वापसी हुई और 29 अगस्त 2025 को 'राष्ट्रीय संयोजक' का नया पद मिला

पद से हटाए गए व ईशान की एंट्री
03-04 सितंबर 2026
फिर जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया; छोटे भाई ईशान आनंद बने मुख्य सेक्टर प्रभारी

ससुर का संन्यास व पूर्ण निष्कासन
10 सितंबर 2026
अशोक सिद्धार्थ के संन्यास को 'देर से लिया फैसला' बताकर आकाश को BSP से बाहर किया.

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About the Author

Preeti Chauhan

Preeti Chauhan

प्रीति चौहान जीन्यूज में पत्रकार हैं, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड डिजीटल टीम में  ब्रेकिंग, हाइपरलोकल, क्राइम, और अन्य मुद्दों को लेकर खबरें लिखती हैं. 
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