सहारनपुर से शंखनाद और पंजाब तक हुंकार: क्या आकाश आनंद दिलाएंगे बसपा को अपना खोया हुआ वजूद?
बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद 28 अक्टूबर से बुलंदशहर से चुनाव प्रचार का आगाज करेंगे. बुलंदशहर के अनूपशहर में पार्टी प्रत्याशी मनोज कुमार प्रधान के समर्थन में जनसभा करेंगे. इसके बाद आकाश आनंद धुआंधार प्रचार करेंगे. ऐसे में जानिए बुलंदशहर से लेकर अयोध्या और पंजाब तक क्या है पार्टी का नया गेमप्लान?
उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों के आगामी चुनावी रण में अपनी सियासी जमीन को मजबूत करने के लिए बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने अब आक्रामक रुख अपना लिया है. बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद एक बार फिर चुनावी मैदान में उतरने जा रहे हैं. आकाश आनंद यूपी से लेकर पंजाब तक धुआंधार प्रचार करेंगे. उनका यह तूफानी दौरा इस बात का गवाह है कि पार्टी अब किसी भी मोर्चे पर सुस्ती बरतने के मूड में नहीं है.
बुलंदशहर से होगा चुनावी शंखनाद
28 अक्टूबर से बुलंदशहर के अनूपशहर विधानसभा क्षेत्र से आकाश आनंद अपने चुनाव प्रचार का आगाज करेंगे. वे यहां पार्टी प्रत्याशी मनोज कुमार प्रधान के समर्थन में जनसभा को संबोधित करेंगे. जानकारों का मानना है कि पश्चिमी यूपी की राजनीति में जाटव और अन्य पिछड़ी जातियों के समीकरण को साधने के लिए बुलंदशहर से इस अभियान की शुरुआत करना पार्टी का एक बड़ा और सोचा-समझा रणनीतिक कदम है.
यूपी से लेकर पंजाब तक बिछेगी सियासी बिसात
बुलंदशहर के बाद आकाश आनंद का यह दौरा प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से होते हुए दूसरे राज्यों तक अपनी पहुंच बनाएगा. जानकारी के अनुसार, दो नवंबर को सहारनपुर के नकुड़ में प्रत्याशी नरेश कुमार सैनी के पक्ष में वोट मांगेंगे. वह 20 नवंबर को अयोध्या के बीकापुर, 22 नवंबर को आगरा और 29 नवंबर को कानपुर के बिल्हौर में भी जनसभाओं को संबोधित करेंगे. यूपी के बाद 26 नवंबर को पंजाब के जालंधर में जनसभा करेंगे. वहीं, डॉ. भीमराव आंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर 6 दिसंबर को हरिद्वार में जनसभा को संबोधित करेंगे. कार्यक्रमों के दौरान कई सीटों पर प्रत्याशियों के नाम भी घोषित किए जा सकते हैं.
क्या है बसपा का यह नया गेमप्लान?
जानकारों का मानना है कि आकाश आनंद की इन ताबड़तोड़ रैलियों के पीछे बसपा का लक्ष्य अपने परंपरागत दलित वोट बैंक के साथ-साथ ओबीसी और अन्य उपेक्षित वर्गों को फिर से पार्टी के पाले में खींचना है. हाल ही में खूब राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिली थी. अब बसपा इस अभियान के जरिए कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने की कोशिश कर रही है.
क्या है बसपा का प्लान?
बसपा की योजना प्रत्याशियों की घोषणा को बड़े सियासी कार्यक्रमों से जोड़ने की है, ताकि उम्मीदवार के परिचय के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी संगठन की गतिविधियां रफ्तार पकड़ सके. सहारनपुर बसपा का पुराना गढ़ रहा है. कभी पार्टी ने दलित-मुस्लिम और सैनी समीकरण के सहारे अपना दबदबा बनाए रखा था, लेकिन सत्ता से बाहर होने के बाद पार्टी का जनाधार खिसकता चला गया. ऐसे में आकाश आनंद को सहारनपुर से उतारकर फिर से अपने जनाधार को जोड़ने का प्लान है.
वजूद की लड़ाई लड़ रही बसपा
सहारनपुर की हरोड़ा सीट (अब सहारनपुर देहात) बसपा सुप्रीमो मायावती के लिए बेहद लक्की थी. 1996 और 2002 में यहां से चुनाव जीतकर मायावती मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचीं थीं. हालांकि, 2007 में इस सीट से उनके सीधे चुनाव न लड़ने के बाद पार्टी का जनाधार धीरे-धीरे खिसक गया. अब यह सीट सपा के कब्जे में है. जहां कभी अजेय रही बसपा आज अपने ही वजूद की लड़ाई लड़ रही है.
क्या यह रणनीति दिलाएगी संजीवनी?
अब सवाल यह उठता है कि क्या आकाश आनंद का यह तूफानी दौरा बसपा को उसकी खोई हुई सियासी जमीन वापस दिला पाएगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि पार्टी के इस 'मास्टर प्लान' ने अन्य सियासी दलों में हलचल पैदा कर दी है. मैदान में उतरी बसपा अब अपनी सियासी ताकत का अहसास कराने के लिए तैयार है.
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