बच्चों का नाम रखना हर माता-पिता के लिए एक बहुत बड़ा टास्क होता है. कोई दादा-दादी की पसंद सुनता है तो कोई ट्रेंडिंग नामों की लिस्ट खंगालने लगता है. कई बार तो मम्मी और पापा के बीच नाम को लेकर इतनी बहस हो जाती है कि बात सुलझने का नाम ही नहीं लेती. लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि माता-पिता की इस रोज-रोज की लड़ाई को अस्पताल की एक नर्स की गलती ने एक सेकंड में खत्म कर दिया हो? सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही बेहद मजेदार मामला सामने आया है जहां एक लड़की को 26 साल बाद पता चला कि उसका नाम किसी गहरे मतलब या प्यार से नहीं, बल्कि एक स्पेलिंग मिस्टेक की वजह से रखा गया था.
कहानी कैरा (Cara) नाम की एक लड़की की है. कैरा पूरी जिंदगी यही सोचती रही कि उसके पेरेंट्स ने बहुत सोच-समझकर उसका इतना प्यारा और यूनिक नाम रखा है. लेकिन जब वह 26 साल की हुई तो उसकी मां ने बातों-बातों में एक ऐसा राज खोला जिसे सुनकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई. कैरा के जन्म के समय उसके मम्मी-पापा के बीच नाम को लेकर कोल्ड वार चल रही थी. मां चाहती थीं कि बेटी का नाम 'Claire' रखा जाए, जबकि पापा अड़े हुए थे कि नाम 'Clara' ही होगा. अस्पताल के डिलीवरी रूम में भी दोनों की बहस खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी.
जब बहस चल ही रही थी, तभी रूम में मौजूद नर्स ने बेड के पास लगे छोटे से व्हाइटबोर्ड पर नाम लिखने की सोची. नर्स ने कैरा के पापा की बात को गलत सुन लिया और बोर्ड पर 'Claire' या 'Clara' की जगह सीधा 'Cara' लिख दिया. जब मम्मी-पापा ने बोर्ड की तरफ देखा तो दोनों ने एक-दूसरे की शक्ल देखी. उन्हें लगा कि दोनों के पसंद किए गए नामों के बीच के कुछ अक्षर गायब करके जो नाम बना है, उसने उनकी पूरी लड़ाई ही खत्म कर दी है. बस फिर क्या था, उन्होंने नर्स की उस गलती को सुधारा ही नहीं और वही स्पेलिंग सरकारी कागजों में दर्ज करवा दी.
कैरा ने रेडिट पर अपनी यह स्टोरी शेयर करते हुए लिखा कि उसे 26 साल की उम्र में पता चला कि उसका नाम कोई मास्टरप्लांट नहीं बल्कि एक टाइपो था जिसे 'डिप्लोमैटिक इम्युनिटी' मिल गई थी. उसकी मां ने बेहद कैजुअल अंदाज में उससे 'Claire-Clara विवाद' का जिक्र किया और हैरानी जताई कि क्या उसे यह बात पहले से नहीं पता थी. कैरा की यह पोस्ट इंटरनेट पर आते ही तेजी से वायरल हो गई और लोगों ने भी अपने-अपने नाम से जुड़े बेहद फनी और अजीबोगरीब किस्से शेयर करने शुरू कर दिए.
कैरा की पोस्ट पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा कि उसके घर में भी कुछ ऐसा ही हुआ था. वह अपने बेटे का नाम 'Benjamin' रखना चाहती थी और उसके पति को 'Emmett' नाम पसंद था. दोनों के बीच काफी बहस हुई और आखिरकार उन्होंने दोनों नामों को मिलाकर अपने बच्चे का नाम 'Bennett' रख दिया. इस तरह न पति की हार हुई और न पत्नी की और बच्चे को एक नया नाम मिल गया.
एक अन्य महिला यूजर ने अपना किस्सा शेयर करते हुए बताया कि उसका नाम अमांडा है. लेकिन जब उसका भतीजा छोटा था तो वह 'Aunt Amanda' ठीक से बोल नहीं पाता था. गलती से उसने अपनी बुआ को 'Aunt Banana' कहना शुरू कर दिया और कंफ्यूजन में केले का इशारा भी करने लगा. महिला ने बताया कि अब वह इस नाम को इतना पसंद करने लगी है कि जब वह दादी या नानी बनेगी तो खुद को 'ग्रैंड बनाना' कहलाना पसंद करेगी.
सोशल मीडिया पर एक और दिलचस्प स्टोरी सामने आई जहां लिली नाम की एक लड़की ने बताया कि उसकी भांजी सालों तक उसे 'Aunt Pizza' कहती रही. जब वह छोटी थी तो कोई समझ नहीं पाता था कि वह ऐसा क्यों कह रही है. लेकिन जब वह 8 साल की हुई और उससे पूछा गया तो उसने बहुत प्यारा जवाब दिया. उसने कहा कि पिज्जा उसका फेवरेट खाना है और उसकी आंटी उसकी फेवरेट इंसान हैं, इसलिए वह उन्हें पिज्जा बुलाती है.
गलतियों का सिलसिला सिर्फ सुनने तक सीमित नहीं था. एक यूजर ने बताया कि उसके बेटे के बर्थ सर्टिफिकेट पर ही ऑफिशियल टाइपो हो गया था. अस्पताल वालों ने नाम की स्पेलिंग में गलती से ब्रैकेट जोड़ दिया था और उसका नाम 'Jona]than' छप गया था. बाद में स्कूल में एडमिशन कराने से पहले उसे कानूनी चक्कर काटकर नया बर्थ सर्टिफिकेट बनवाना पड़ा था.